कोलकाता : मोदी के खिलाफ बुद्धजीवियों की सभा शिशिर मंच में



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 01 सितंबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

देश के मौजूदा हालात से चिंतित बु्दधीजीवियों की ओर से अब खुलकर मोदी सरकार के खिलाफ रास्ते पर उतरने का फैसला किया गया है। इसका कारण यह है कि वे धर्म के नाम पर विभिन्न राज्यों में अराजक हालात बनाने का षडयंत्र रच रहे हैं। प्रतिवाद करने पर प्रतिवादी को गिरफ्तार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि विद्वानों की चिंता हाल में गिरफ्तार किए गए लोगों को लेकर दिख रही है। जबकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की व्यापक निंदा की है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि विरोधी स्वर लोकतंत्र के सेफ्टी वाल्व हैं। विरोधी स्वर नहीं रहने पर प्रेशर कुकर ही फट जाएगा।

ऐसे हालात में रविवार को शिशिर मंच में सुबह 10 बजे प्रतिवाद की आवाज उठाई जा रही है। शंख घोष, सौमित्र चटर्जी जैसे लोगों के इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। मालूम हो कि शुक्रवार को एक बयान जारी करके उन्होंने कहा है कि देश में अभूतपूर्व अंधकार लाने की कोशिश की जा रही है। शंख घोष के हस्ताक्षर से जारी बयान में कहा गया है कि मुक्त चिंता, बहुस्वर, विचार और पथ की स्वाधीनता आज खतरे में है। लोगों या समूहों की जीवन शैली और धार्मिक आचरण भी खतरे में है। इसके लिए एक और सम्मिलित होकर प्रतिरोध करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि इस समय देशवासी देख रहे हैं कि दिल्ली में सत्ता धारण करने वाली सरकार एक के बाद एक लोकतंत्र विरोधी तौर तरीके अपना रही है। इसके माध्यम से लोकतंत्र विहीन भारत कायम करने की कोशिश की जा रही है। विभिन्न जगह लोक आक्रांत हो रहे हैं। धर्म के नाम पर राज्यों में एक अस्थिर माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रतिवाद करने पर प्रतिवादियों को गिरफ्तार किया जा रहा है।

इस बयान में आगे कहा गया है कि भारतवर्ष इस समय एक विचित्र लोकतांत्रित हालात से गुजर रहा है। संविधान के नाम पर, लोकतंत्र के नाम पर सत्ता हासिल करने वाला दल अब लोकतांत्रिक व्यवस्था को तहस-नहस करने पर तुला है।

रविवार की इस सभा में शंख घोष, सौमित्र चटर्जी के साथ शिशिर मंच में रूद्रप्रसाद सेनगुप्त, तरुण मजूमदार, जय गोस्वामी, देवेश राय, विभाष चक्रवर्ती, अशोक मुखोपाध्याय, सब्यसाची चक्रवर्ती, कौशिक सेन जैसे जाने माने लोग उपस्थित रहेंगे। सभा की शुरुआत कैलकाटा केयर की ओर से रवींद्रनाथ टैगोर के गान के साथ होगी। इसके बाद विद्वान देश में मौजूदा असहनीय माहौल के बारे में अपने विचार पेश करके देश को दिशा प्रदान करने का काम करेंगे।

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