कैटल तस्करों का गढ़ है उत्तर बंगाल



विशेष रिपोर्ट- विशेष संवाददाता, कोलकाता, 01 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥■॥ पश्चिम बंगाल और असम तस्करी का हाट स्पाट माना जाता है

॥■॥ भारत-बांग्लादेश सीमा - नार्थ बंगाल से 939 किलोमीटर व असम से 495 किलोमीटर

उत्तर बंगाल में कैटल तस्कर गिरोह इतने सक्रिय हैं कि बिना किसी भय के खुलेआम सड़कों पर गौ वंशों को लाद कर भूटान व बांग्लादेश सरहद तक पहुंचा रहे हैं और मुंह मांगी कीमत वसूल रहे हैं। वैसे भारत में गौ तस्करी कानूनी तौर पर नहीं की जा सकती है। बावजूद इसके गैरकानूनी तरीके से तस्करी का खेल जारी है। कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर एक याचिक को आधार बना इस काले कारोबार की पड़ताल में सबसे पहले याचिकाकर्ता मुन्ना सैकिया से सम्पर्क किया गया। गौर हो कि मुन्ना खुद एमडीएन एसोसिएट्स नाम से लाइव स्ट्रोक ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं और बकायदा इस काम के लिए उन्हें दार्जिलिंग जिला शासक से अनुमति भी प्राप्त था, लेकिन किन्ही वजहों उनका अनुमति अवधि आगे न बढ़ सका। आर्डर कापी पर साफ अंकित है कि वे गौ वंशों का इस्तेमाल उत्तर-पूर्व राज्यों में सिचाई माध्यम के तौर पर करेंगे। उनकी माने तो वे सभी नियम कायदों का पालन करते हुए अपने कारोबार में जुटे थे। लेकिन तमाम अनुमतियों के बावजूद आये दिन प्रशासन की ओर से उन्हें तस्करों की सह पर परेशान किया जा रहा है। जिसकी मुखालफत करते हुए उन्होंने विशेष तौर पर सिलीगुड़ी के फांसीदेवा थाना के आफिसर इन चार्ज संजय दास के खिलाफ कई संगीन आरोप भी लगाए और उनकी माने तो कैटल तस्करों के साथ संजय मिले हुए हैं और उनके पास इससे जुड़े ढ़ेरों सबूत भी है, इसकी पुष्टी उन्होने की। इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि कई बार संजय ने उनसे गैरवाजिब रुपयों की मांग भी की, जिसे ना देने की सूरत में उन्हें धमकियां देते हुए उनके वैद्य लाइसेंस को तीन लाख प्रति माह पर देने की बात कही गई। हालांकि पीड़ित कारोबारी ने इसकी शिकायत एसपी से की और थाना प्रभारी संजय दास को एसपी ने चेतावनी भी दी थी। बावजूद इसके थाना प्रभारी संजय अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे थे।

आखिरकार पीड़ित ट्रांसपोर्टर द्वारा इसकी शिकायत राज्य की मुख्यमंत्री व गृह विभाग के साथ ही राज्य पुलिस प्रमुख से भी की गई और उन्हें आश्वासन दिया गया है कि जल्द ही शिकायत पर संज्ञान लिया जाएगा। इधर, मुन्ना से चली लंबी बातचीत के बाद हम हकीकत के आइने से रू-ब-रू होने के लिए उन हाट बाजारों व लोडिंग प्वाइंटों की ओर बढ़े, जहां से इस गौरखधंधे को संचालित किया जाता है। इस क्रम में दो सहयोगियों से मुलाकात हुई, जो पेशे से ड्राइवर हैं और कैटल स्मगलरों के बारे में काफी हद तक जानते थे।

उन्हीं में से एक के कहने पर हम नेपाल के कांकरभिट्टा स्थित बीरतामोड़ मुक्ति चौक पहुंचे, जहां इस धंधे के सरगना युवराज चमरिया से मुलाकात हुई। युवराज मूल रूप से नेपाली नागरिक हैं और उत्तर प्रदेश व बिहार के सरहदी इलाकों से सस्ते कीमत पर गौ वंशों को खरीद पहले नेपाल लाता है और फिर कांकरभिट्टा सीमा मार्ग पार करा भारत में तस्करों को सुपुर्द करता है। बातचीत के दौरान उनसे बताया कि एसएसबी से लेकर सिलीगुड़ी दार्जलिंग के कई थाना प्रभारी के साथ उसके अच्छे संबंध हैं। कैटल साइज व वजन पर बात करते हुए उनसे कहा कि वो 4 से 6 मन तक का माल मुहैया करा देगा और कीमत 7000 मन के हिसाब से तय हुई। इसके बाद माल देखने के बाबत पूछे गये सवाल के जवाब में उसने शुक्रवार को बिहार के किसानगंज जनपद अंतर्गत पड़ने वाले लोहागढ़ा गोरूहाट बुलाया। उसके कहेनुसार निर्धारित समय पर हम वहां पहुंचे, जहां पहले से इस्लामपुर के कई बड़े तस्कर माल का मोलभाव कर रहे थे।

इधर, बातचीत का सिलसिला बढ़ाते हुए तस्करों के बारे में पता करने जुट गया तो कई नमो के बारे में पता चला। जिसमें कामिल अख्तर, वाहिद, सरफराज, मो• सलीम, अरशाद, मुद्दसर और गुड्डू के नाम सामने आए। आपको बता दे कि ऊपर लिखे सभी नाम तस्करी के इस काला बाजारी में इतने शुमार हैं कि इनके नाम से किसनगंज से लेकर इस्लामपुर तक खौफ का आलम है। वहीं युवराज ने बताया कि उसका माल असम में भी जाता है। बातचीत के कारवां को किसी तरह से विराम दे वहां से निकल सिलिगुड़ी पहुंचा। दूसरे दिन सिलीगुड़ी स्थिल नार्थ बंगाल फंटियर कार्यालय के एक बड़े अधिकारी से मिलने पहुंचा और उनसे गौ वंश तस्करी को लेकर लंबी बातचीत भी हुई। इसके बाद एसएसबी नार्थ बंगाल के असिस्टेंट डायरेक्टर अमिताभ भट्टाचार्य से मुलाकात हुई और क्षेत्र में जोर पकड़ रही गौ वंश तस्करी पर खास बातचीत भी हुई इस दौरान उन्होंने बताया कि इलाके में बेरोजगारी होने की वजह से एक समुदाय विशेष के लोग इस धंधे में संलिप्त हैं और एसएसबी अपने अधिकार क्षेत्र में पड़ने वाले सरहदी इलाकों में चलने वाले तस्करी की रोकथाम में सक्रिय है।

खैर, इस बातचीत में कुछ खास हाथ नहीं लगा और महज आंकड़ों को एकत्र करना मेरा मकसद नहीं था।

इसके बाद उत्तर दिनाजपुर स्थित सोनापुर पहुंचा, जहां बिहार के एक गौवंश तस्कर करीम बिहारी के बारे में पता चला। सोनापुर तस्करों के लिए एक मुफीद लोडिंग प्वाइंट माना जाता है और यहां से छुप-छिपाकर उक्त माल को अलीपुर द्वार स्थित सोनापुर पहुंचाया जाता है, जहां से गौ वंशों को बांग्लादेश सीमा दिनहाटा (कूचबिहार) और भूटान की सीमा जयगांव तक पहुंचाया जाता है।

इस इलाके में भी कई तस्कर सक्रिय हैं, जिनमें रूस्तम, लतीफ, मुक्ति, गब्बर सिंह, राहुल समेत अन्य कई नाम सामने आए।

गौर हो कि ये खेल महज बंगाल तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके तार असम से भी जुड़े हैं। असम के ध्रूवी जिले को तस्करों का गढ़ माना जाता है और यहां जलाल, जहांगीर, अकबर, रवि रेड्डी, सरफराज आलम उर्फ चंडी उसका भाई फयाद अहमद और इन सबको मुस्तफा और उसका भाई यूसूफ कंट्रोल करता हैं। मुस्तफा मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है और पिछले कई सालों से असम में रहकर तस्करी का खेल चला रहा है। ये सारे नाम नेपाली नागरिक व गोरू तस्कर युवराज से हासिल हुए।

मुस्तफा बंगाल के सक्रिय तस्करों की मदद से असम में माल मंगवाता है, जिसे ऊंची कीमत पर बांग्लादेश में बेचता है। इसी क्रम में असम पुलिस के बार्डर एसपी मुकुल सैकिया से गुवाहाटी में मुलाकात हुई।

विशेष चर्चा के दौरन उन्होंने गौ वंश तस्करी से जुड़ी राज्य की समस्याओं से अवगत कराया। वहीं बातचीत के दौरान पता चला कि असम पुलिस ने पायनीयर लाइव स्टोक नाम से ट्रांसपोर्ट कारोबार चलाने वाले हजरत मास्टर नाम के एक शख्स को गैरकानूनी तरीके से गौ वंश तस्करी के आरोप में माल समेत गिरफ्तार किया है।

याचिकाकर्ता मुन्ना साईकिया कि माने तो हजरत मास्टर और ए• के• मंडल नाम के एक अन्य लाइव स्टोक लाइसेंसधारी ट्रांसपोर्टर ने लीज पर बंगाल के कई तस्करों को तस्करी के लिए लाइसेंस दिए हैं और असम पुलिस के हथे चढ़े आरोपी हजरत मास्टर अपनी पत्नी मेहरबानू बेगम के नाम से लाइव स्टोक कारोबार कर रहा है। इतना ही नहीं इसके तार बंगाल से लेकर असम और बांग्लादेश तक विस्तृत है।

याचिकाकर्ता मुन्ना साईकिया से बिना प्रभावित हुए, इस रिपोर्ट को यथा संभव पेश किया गया।

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