नोटबंदी फेल...! बैंक कर्मचरी से लेकर सुक्ष्म और लघु कारोबारी पूछ रहे हैं सवाल



---रंंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 02 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

केंद्र सरकार की ओर से 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट बंद करने के एलान के डेढ़ साल बाद आरबीआई ने बताया है कि 93 फीसद से ज्यादा प्रचलन में रही करंसी वापस लौट आई है। इसके साथ ही सवाल उठने लगे हैं कि जब तकरीबन सारी रकम वापस लौट आई है, तब नोटबंदी क्यों की गई ? सुक्ष्म और लघु उद्योग से जुड़े कई लोगों का कहना है कि उनका कारोबार दो साल होने को आए हैं, लेकिन अभी तक पटरी पर नहीं चल सका है। बैंक कर्मचारी पूछ रहे हैं कि रात-रात भर जग कर काम करने के बदले न तो उन्हें पर्याप्त मुआवजा ही मिला है न ही काला धन रोका जा सका। कालेज स्ट्रीट के विक्रेता हो या कपड़े के दुकानदार, गहना विक्रेता नोटबंदी के दौरान उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ा था। उनका सवाल है कि आखिर क्यों ऐसा किया गया ?

मालूम हो कि सुक्ष्म और लघु कारोबार में पूंजी निवेश कम होता है और इसके मुताबिक ही बड़े और मध्यम कारोबार की तुलना में आमदनी और फायदा भी कम होता है। सुक्ष्म और लघु कारोबारी सीधे खरीददार या विक्रेता तक सामान पहुंचाते हैं। दोनों मामलों में लेन-देन नगद पर ही निर्भर है। नोटबंदी के कारण अनेक लोगों का कारोबार तबाह हो गया था और साल बीतते न बीतते जीएसटी की एक और आघात दिया।

दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहाट के चांदी के बाट से लेकर गहनों (सिवर फिलिग्रि) बनाने वाले क्लस्टर, कोलकाता के बांशद्रोणी के फैन क्लस्टर के मालिक तापस मंडल और सुभाष सेनापति पूछते हैं कि कई संस्थाओं का कारोबार बंद हो गया लेकिन फायदा आखिर किसे हुआ ? मगराहाट के तीन ग्राम पंचायत इलाके में करीब दो हजार छोटे कारखानों में चांदी के गहने बनाए जाते थे। तापस का कहना है कि नोटबंदी के कारण करीब 300 कारखाने बंद हो गए। काम बंद होने के कारण श्रमिक रंग मिस्त्री, राज मिस्त्री के सहायक, सुरक्षा कर्मचारी का काम करने के लिए गांव छोड़ कर बाहर चले गए। दोबारा वैसे हालात को देखते हुए अब तक वे गांव लौटने को तैयार नहीं हैं।

बांशद्रोणी के फैन क्लस्टर में करीब 70 कारखाने नगदी पर चलते थे। नोटबंदी के कारण करीब आधों का काम बंद हो गया है। सुभाष का कहना है कि नीरव मोदी तो पैसे लेकर भाग गया, काला धन मिला कहां ? बीच में भुगतना हमें पड़ा।

सिंगुर में सरसों तेल, आटा, बेसन बनाने का कारखाना चलाने वाले सपन दास हुगली जिले में अपना सामान बेचते थे। नगदी के कारण कारोबार ठप हो गया और अब तक पटरी पर नहीं लौटा है। कोलकाता से लेकर राज्य के जिलों में तकरीबन सभी दुकानदारों का कहना है कि अभी तक हालात सामान्य नहीं हुए हैं। ग्राहकों की संख्या कम हो गई है। ऐसा लगता है कि ज्यादातर ग्राहक अब लौट कर नहीं आएंगे। गहनों के एक व्यापारी का कहना है कि तब जो कारोबार ठप हुआ था, अभी तक पटरी पर नहीं आ सका है। एक गिफ्ट विक्रेता का कहना है कि लगता है कि कारोबार को पाला मार गया है, अभी तक ग्राहकों की मार झेल रहे हैं।

कैलकाटा चेंबर आफ ट्रेंड के चेयरमैन एमेरिटस फिरोज अली मानते हैं कि नोटबंदी की मार अभी तक संभल नहीं सकी है। उनका दावा है कि बड़ाबाजार इलाके में काम करने वाले 10 हजार दिहाड़ी मजदूरों में 40 फीसद बेरोजगार हो गए।

बैंक कर्मचारी भी नोटबंदी के नाकाम रहने पर नाराज हैं। आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन नागर का कहना है कि कहा गया था कि काला धन बरामद करने के लिए नोटबंदी की गई है, लेकिन आरबीआइ खुद बता रही है कि रद्द रकम करीब सारी की सारी बैंकों में वापस लौट आई है। तब काला धन कहां चला गया ? केंद्र की ओर से बैंक कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई थी, उन्हें 12-14 घंटे काम करना पड़ा था। अतिरिक्त काम करने वाले कर्मचारियों को अभी तक पूरी रकम नहीं मिली है।

आल इंडिया बैंक आफिसर्स कंफेडरेशन के राज्य सचिव संजय दास का कहना है कि नोटबंदी के बाद सिर्फ नए नोट छापने में ही 16 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। देश भर में 2 लाख एटीएम हैं। नए नोट के साथ बदलने के लिए कैलिब्रेशन किया गया, इसमें हजारों करोड़ रुपए खर्च हुए। कर्मचारियों से ज्यादा समय काम करवाने के लिए बैंकों को ओवरटाइम देना पड़ा है। इसके साथ ही उस समय करंसी नोट रिजर्व बैंक, करंसी चेस्ट और बैंकों की शाखाओं में गाड़ी से पहुंचाने में भी खासी रकम खर्च हुई है। लेकिन इतने खर्च के बाद भी नतीजा शुन्य रहा है।

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