---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 03 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
महानगर के लेखकों व बुद्धिजीवियों ने पिछले दिनों महाराष्ट्र की कोरेगांव हिंसा के मामले में पुलिस द्वारा पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का कड़ा विरोध करते हुए इसे केंद्र की भाजपा सरकार का ‘फासीवादी कृत्य’ करार दिया। रविवार 02 सितम्बर 2018 को महानगर के शिशिर मंच में आयोजित एक प्रतिवाद सभा में इन बुद्धिजीवियों ने पुरोजर तरीके से इस गिरफ्तारी के खिलाफ आंदोलन चलाने का आह्वान किया। मालूम हो कि बीते मंगलवार को महाराष्ट्र पुलिस ने देश के विभिन्न हिस्सों से पांच वामपंथी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। इन कार्यकर्ताओं के कथित रूप से माओवादियों के साथ संपर्क होने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अभी इन पांचों कार्यकर्ताओं को आगामी छह सिंतबर तक घर में नजरबंद करके रखा गया है।
सभा को संबोधित करते हुए लेखक-स्तंभकार देवेश राय ने कहा कि फासीवादी संसदीय पद्धति से ही आता है। फासीवादी शासकों के इस कृत्य के खिलाफ देश के हर कोने में विरोध जताना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये फासीवादी शासक विरोध की आवाज करने पर किसी के भी घरों में छापेमारी करते हैं।
राय ने कहा-उन्होंने (भाजपा) इन पांच कार्यकर्ताओं को ‘शहरी माओवादी’ की संज्ञा दी है। उन्होंने कहा कि यह शब्द अमेरिकी संविधान से आयात किया गया है। हम इसके खिलाफ सांकेतिक नहीं, बल्कि पूर्ण रूप से आंदोलन चलाने का आह्वान करता हूं। राय ने कहा-मैं बंगाल के नाट्यकर्मियों को अपने लोकप्रिय फासीवादी-विरोधी नाटकों को दोबारा मंच पर मंचित करने का आह्वान करता हूं ताकि हमारे आंदोलन के समर्थन में जनमत को जुटाया जा सके। उन्होंने कहा-वे सभी फासीवादी-विरोधी ताकतों को, जो महात्मा गांधी के विचारों में विश्वास करते हैं, इस आंदोलन में शामिल होना चाहिए।
इस मौके पर नाट्यकर्मी रुद्रप्रसाद सेनगुप्त ने कहा-देश में आंतक का साम्राज्य कायम है। पांच विशिष्ट लोगों की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए सेनगुप्त ने कहा-यह नागरिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप है। हमें फासीवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा।
अभिनेता कौशिक सेन ने कहा कि इस ज्वंलत मुद्दे पर कलाकारों को एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। सेन ने कहा-हमें अपनी आवाज को और ज्यादा प्रभावकारी तरीके से बुलंद करनी होगी, क्योंकि 2019 का लोकसभा चुनाव करीब है। हमें(बुद्धिजीवी) मिल-बैठकर इसके बारे में अगली योजना के बारे में रणनीति तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा-यह जरूरी है कि हम खुद को और स्वीकारयोग्य बनाएं और सांप्रदायिक व फासीवादी ताकतों के खिलाफ अपनी लड़ाई को लोगों के सामने और विश्वसनीय बनाना चाहिए।
करीबन दो घंटे तक चली इस सभा में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें लोगों के नागरिक अधिकारों के हरण के खिलाफ आवाज उठाई गई थी। इस प्रस्ताव पर करीब दो सौ लोगों ने हस्ताक्षर किए। इनमें कई विशिष्ट लोग शामिल थे, जिनमें लेखिका मंदाक्रांता सेन व वरिष्ठ कवि शंख घोष, चंदन सेन आदि प्रमुख थे।
देश के मौजूदा हालात से चिंतित बुद्धिजीवीयों की ओर से अब खुलकर मोदी सरकार के खिलाफ रास्ते पर उतरने का फैसला किया गया है। इसका कारण यह है कि वे धर्म के नाम पर विभिन्न राज्यों में अराजक हालात बनाने का षडयंत्र रच रहे हैं। प्रतिवाद करने पर प्रतिवादी को गिरफ्तार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि विद्वानों की चिंता हाल में गिरफ्तार किए गए लोगों को लेकर दिख रही है। जबकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की व्यापक निंदा की है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि विरोधी स्वर लोकतंत्र के सेफ्टी वाल्व हैं। विरोधी स्वर नहीं रहने पर प्रेशर कुकर ही फट जाएगा। इसके पहले शुक्रवार को एक बयान जारी करके उन्होंने कहा कि देश में अभूतपूर्व अंधकार लाने की कोशिश की जा रही है। शंख घोष के हस्ताक्षर से जारी बयान में कहा गया है कि मुक्त चिंता, बहुस्वर, विचार और पथ की स्वाधीनता आज खतरे में है। लोगों या समूहों की जीवन शैली और धार्मिक आचरण भी खतरे में है। इसके लिए एकक और सम्मिलित होकर प्रतिरोध करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इस समय देशवासी देख रहे हैं कि दिल्ली में सत्ता धारण करने वाली सरकार एक के बाद एक लोकतंत्र विरोधी तौर तरीके अपना रही है। इसके माध्यम से लोकतंत्र विहीन भारत कायम करने की कोशिश की जा रही है। विभिन्न जगह लोक आक्रांत हो रहे हैं। धर्म के नाम पर राज्यों में एक अस्थिर माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रतिवाद करने पर प्रतिवादियों को गिरफ्तार किया जा रहा है।
इस बयान में आगे कहा गया है कि भारतवर्ष इस समय एक विचित्र लोकतांत्रित हालात से गुजर रहा है। संविधान के नाम पर, लोकतंत्र के नाम पर सत्ता हासिल करने वाला दल अब लोकतांत्रिक व्यवस्था को तहस-नहस करने पर तुला है। सभा की शुरुआत कैलकाटा केयर की ओर से रवींद्रनाथ टैगोर के भय भांगार गान के साथ हुई।