--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।
* फिर वही दिन हिंदी फिचर फिल्म के प्रीमियर शो पर आये सिक्मिम सरकार के सलाहकार प्रो• सतीश जैन ने फिल्म को दूरदर्शन पर प्रसारित करने का दिया सुझाव
लकवा रोग ब्रेन की समस्याओं से होता है। जिस प्रकार ह्रदय में हार्ट अटैक होता है वैसे ही मस्तिष्क में अटैक होने से लकवा होता है। लकवा रोग में मस्तिष्क के नस जाम हो जाता है जिसके कारण ब्रेन में ब्लड का सर्कुलेशन बंद हो जाता है। मानव जीवन के लिए ब्रेन और हार्ट दोनों ही रिस्क फैक्टर है। समाज में हार्ट अटैक को लेकर बहुत जागरूकता है लेकिन ब्रेन अटैक के लिए कोई जागरूकता नहींं है। यही कारण है कि जागरूकता के आभाव में समय से इलाज नहीं मिलने के कारण लोग असमय काल के गाल में समा रहे है। यह बात काशी हिंदू विश्वविद्यालय चिकित्सा विज्ञान संस्थान न्यूरोलाजी विभाग की ओर से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर " लकवा रोग " जनजागरुकता पर विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो• वी• एन• मिश्र की परिकल्पना और नरेन्द्र आचार्य के निर्देशन में भारत की पहली हिंदी फीचर फिल्म " फिर वही दिन " के 2 अकटूबर को आईपी सिगरा माल वाराणसी में लोकार्पण समारोह में शिरकत करने आये दुनिया के ख्यातिलब्ध न्यूरोलाजिस्ट , सिक्मिम सरकार के कैबिनेटमंत्री दर्जा प्राप्त सलाहकार प्रोफेसर सतीश जैन ने रविवार को बीएचयू लक्ष्णदास अतिथि गृह में अनौपचारिक बातचीत में कही।
प्रोफेसर जैन ने कहा कि लकवा रोग के मामले में पोलियो अभियान की तर्ज पर सरकार का सहयोग जरूरी है तभी इस घातक बीमारी से लोगों को बचाया जा सकता है। बीएचयू न्यूरोलाजी विभाग के प्रो• वी• एन मिश्र द्वारा अपने संसाधन से लकवा रोग जागरूकता पर हिंदी फिचर फिल्म "फिर वही दिन" की प्रशंसा करते हुये प्रोफेसर जैन ने कहा कि यदि सरकार दूरदर्शन और राज्यसभा टीवी चैनल पर इस फिल्म का प्रसारण करे तो भारत के अधिकांश सुदूर इलाकों में रहने वाले लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही उन्होंने निजी टीवी चैनलों के प्रबंधन से भी यह अपील किया है कि समाजहित और देशहित में लकवा रोग पर जनजागरुकता के सहभागी बनकर देश को स्वास्थ्य की दिशा में सहयोग करें।