मुर्शिदाबाद जिले में कांग्रेस-माकपा को परास्त करके तृणमूल का दबदबा



---रंजीत लुधियानवी, 24 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कट्टर विरोधी प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर चौधरी को हटा कर उनकी जगह सोमेन मित्र को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। हालांकि चौधरी का गढ़ माना जाने वाला मुर्शिदाबाद का किला ममता ने पहले ही ढहा दिया था। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में पंचायत चुनाव में 2013 में कांग्रेस और माकपा का दबदबा था, तृणमूल कांग्रेस ने किसी तरह वहां कुछ जगह जीत हासिल की थी। लेकिन 5 साल बाद स्थिति पूरी तरह उलट गई है। कांग्रेस-माकपा का गढ़ माने जाने वाले जिले में चारों ओर तृणमूल का झंडा लहरा रहा है। हालांकि दोनों दलों के बजाए भाजपा जरुर अपनी स्थिति का एहसास कराती दिख रही है।

मुर्शिदाबाद जिले में कुल मिलाकर 250 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें अकेले तृणमूल कांग्रेस ने 245 पंचायतों पर कब्जा करने में सफलता प्राप्त की है। भाजपा के साथ गठजोड़ करके कांग्रेस ने एक पंचायत पर कब्जा किया है। फरक्का जिले के बेवा -2 नंबर पंचायत को छोड़ कर बाकी चार पर भाजपा का कब्जा हो गया है। जबकि किसी समय जिसका विकल्प नहीं था, माकपा का खाता भी नहीं खुला है।

अगर 2013 के आंकड़ों की बात करें तब कांग्रेस को 125, माकपा को 80, तृणमूल को 8-10 सीटें मिली थी और भाजपा का खाता ही नहीं खुला था। इसी तरह, जिले की 26 पंचायत समिति में कांग्रेस 14, माकपा 11 और तृणमूल एक समिति जीत सकी थी। जबकि इस साल तृणमूल को जिले की 26 में 25 सीटें मिली हैं। इकलौती फरक्का पंचायत समिति का फैसला भाजपा करेगी। यहां 27 सीटों में कांग्रेस को 13, तृणमूल कांग्रेस को 12 और भाजपा को 2 सीटें मिली हैं। तृणमूल को ठिकाने लगाने के लिए भाजपा कांग्रेस के साथ मिलकर समिति का गठन कर सकती है।

जिला परिषद की 70 सीटों में तृणमूल कांग्रेस ने 69 सीटों पर जीत हासिल की है। फरक्का की एक सीट कांग्रेस की झोली में गई है। जबकि 2013 में तृणमूल को एक और कांग्रेस-माकपा को 69 सीटें मिली थी।

अधीर चौधरी का गढ़ ढहने को लेकर कांग्रेसी खुद भी हैरान हैं। माना जा रहा है कि जिले में हालात परिवर्तन होने के तीन मुख्य कारण हैं। पहला 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल का संगठन मजबूत होता जा रहा था जबकि दोनों दलों का किला ढहने लगा था। दूसरे, माकपा के साथ गठजोड़ को पुराने कांग्रेसी पचा नहीं सके और तृणमूल के पक्ष में चले गए। तीसरे सालों से उपेक्षित रहने वाले जिले का चहुंमुखी विकास किया जाना है। तृणमूल कांग्रेस के जिले के कार्यकारी अध्यक्ष सौमिक हुसैन का कहना है कि कांग्रेस-माकपा-भाजपा एक हो गए हैं, लोगों को यह हजम नहीं आ रहा है। इसलिए जिले में हम पहले नंबर पर पहुंच गए हैं।

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