तुलसीदास द्वारा स्थापित तुलसीघाट की प्राचीन रामलीला, मुकुट पूजन के साथ शुरु



वाराणसी, 05 अक्टूबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● महंत प्रो• विश्वम्भरनाथ मिश्र ने मानस की पाण्डुलिपि और लीला के पात्रों की मुकुट का विधि विधान से किया पूजन

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित तुलसीघाट की रामलीला का शुभारंभ मुकुट पूजा से हुआ। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास के अध्यक्ष, श्री गोस्वामी तुलसीदास अखाड़ा के सभापति एवं संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो• विश्वम्भरनाथ मिश्र ने रामलीला के स्वरुपों का विधि विधान से पूजन किया। इस अवसर पर गोस्वामी तुलसीदास द्वारा विरचित श्रीरामचरित मानस की पाण्डुलिपि का पूजन के बाद उसकी चौपाईयों का वाचन भी हुआ। तुलसीघाट की यह प्राचीन लीला तुलसीघाट, रामलीला मैदान, लोलार्ककुंड, आनंदबाग, दुर्गाकुंड, संकटमोचन, लंका, भदैनी और तुलसीघाट पर श्रीरामचरित मानस के विभिन्न प्रसंगों के आधार पर लगभग 5 कि•मी• क्षेत्रफल में भ्रमणकर मंचित होता है।

गौरतलब है कि अयोध्याधीश प्रभु ने मर्यादा पुरुषोत्तम रामावतार धारण करके वैदिक धर्माचरण का आदर्श लोक के सामने रख दिया। ब्रह्म के मानव रुप में अवतार के साथ ही ब्रह्मयश वेद भी रामायण के रुप में प्रकट हुआ। गोस्वामी तुलसीदास ने कलिमलग्रसित जीवों के उपकारार्थ उसी दुरवगाह रामायण को 'श्रीरामचरित मानस' के रुप में रच दिया। भगवान श्रीराम के चरित्रों को नेत्रों के समक्ष मूर्तरुप देने के लिए रामलीला का प्रादुर्भाव हुआ।

गोस्वामी तुलसीदास की रामलीला प्रचलित सभी लीलाओं की मूलभूत आदिलीला है। सन् 1933 में गोस्वामी तुलसीदास रामलीला समिति संत तुलसीपुरी,भदैनी, काशी बनी। तब से तुलसीघाट की रामलीला परंपरागत ढंग से अनवरत मंचित होती चली आ रही है।

ताजा समाचार

National Report



Image Gallery
इ-अखबार - जगत प्रवाह
  India Inside News