ग्रेटर नोएडा, 06 अक्टूबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
प्रमुख बैंकरों और बहु-क्षेत्रीय एजेंसियों के नवीकरणीय ऊर्जा वित्त पोषण विशेषज्ञों ने गुरुवार 04 अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा में आयोजित दूसरी वैश्विक री-इन्वेस्ट भारत-आईएसए साझेदारी नवीकरणीय ऊर्जा निवेशक बैठक और एक्सपो (री-इन्वेस्ट 2018) के एक पूर्ण सत्र के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्त पोषण से जुड़े मुद्दों के समाधानों पर विचार-विमर्श किया। ‘नवीकरणीय ऊर्जा पर बैंकरों के परिप्रेक्ष्य’ शीर्षक वाले इस पूर्ण सत्र के दौरान इस बात पर भी चर्चाएं हुईं कि विश्व भर में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के लिए वित्त पोषण तक पहुंच कैसे बढ़ाई जा सकती है।
इस पैनल परिचर्चा में विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, जर्मनी के केएफडब्ल्यू, सिटीग्रुप और प्रमुख भारतीय कंपनियों जैसे कि पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी), ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी), यस बैंक और भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (इरेडा) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सत्र के दौरान पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन के निदेशक (परियोजनाएं) चिन्मय गंगोपाध्याय ने कहा, ‘हम दीर्घकालिक लाभप्रदता के दृष्टिकोण से सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर अपना ध्यान केन्द्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। चूंकि सौर ऊर्जा व्यवसाय में प्रवेश के मार्ग में ज्यादा बाधाएं नहीं हैं, इसलिए सभी ने इसमें अपना कदम रख दिया है। हालांकि, प्रमोटर कुछ ही वर्षों में इससे बाहर निकलने की कोशिश करने लगते हैं। इससे कभी-कभी परिेयाजनाओं की लाभप्रदता के आकलन में कठिनाई होती है।’
श्री गंगोपाध्याय ने कहा, ‘सोलर पैनलों की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे भी हैं। सोलर पैनलों की गुणवत्ता के आकलन के लिए कोई मानक नहीं है। जिन आपूर्तिकर्ताओं को आज प्रथम श्रेणी का माना जाता है, वे बाद में अपना दर्जा खो देते हैं और ऐसी स्थिति में गुणवत्ता के आकलन में कठिनाई आती है।’
सौर ऊर्जा परियोजनाओं में शुल्क दरें दरअसल ग्रिड मूल्यों की तुलना में अत्यंत कम होती हैं। पैनल परिचर्चा में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि उन्हें इस बात का अंदेशा है कि इन कम दरों से सौर ऊर्जा परियोजनाओं की दीर्घकालिक लाभप्रदता बेहतर होगी।
सिटीग्रुप के प्रबंध निदेशक एवं वैश्विक प्रमुख (पर्यावरणीय वित्त एवं स्थायित्व) माइकल एकहार्ट ने सौर ऊर्जा क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए नीतिगत कदमों के लिए उसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा उपक्रमों को पुनर्वित्त प्रदान करने के लिए चलाया जा रहा भारत का ‘उदय’ कार्यक्रम दुनिया के लिए एक अनुकरणीय सटीक मॉडल है। उन्होंने कहा, ‘मुझे वास्तव में ऐसा प्रतीत होता है कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक मॉडल बनता जा रहा है। मैंने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) से अनुशंसा की है कि वह इस पर एक केस स्टडी तैयार करे कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के साथ-साथ दुनिया को शिक्षित करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए हैं।’