अदालतों में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा न्याय की मांग कर रहे याचिकाकर्ताओं की समझ में आनी चाहिए : उपराष्ट्रपति



इलाहाबाद, 15 अक्टूबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

भारत के उपराष्ट्रपति एम• वेंकैया नायडू ने कहा है कि अदालतों में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा उन याचिकाकर्ताओं के समझ में आनी चाहिए, जो न्याय की मांग रहे हैं। वह शनिवार 13 अक्टूबर को इलाहाबाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए नई इमारत (नई एनेक्सी) का उद्घाटन करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने न्यायाधीशों और बार एसोसिएशन के सदस्यों से कहा कि हमारे संविधान में कार्यकारिणी शक्ति से न्यायपालिका की आजादी की परिकल्पना की गई है। विधानमंडल और न्यायपालिका को परस्पर स्वस्थ सम्मान को साझा करने के साथ एक दूसरे का पूरक होना चाहिए। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा चौरी चौरा मामले, मेरठ षड्यंत्र और आईएनए जैसे मामलों की, की गई ऐतिहासिक सुनवाइयों के बारे में जजों तथा बार एसोसिएशन सदस्यों को याद दिलाया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि न्यायपालिका हमारी लोकतांत्रिक राजनीति का एक प्रमुख स्तंभ है और सुझाव दिया कि न्यायपालिका को शीघ्र न्याय सुनिश्चित करके लोकतंत्र को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय ऐसा दिया जाना चाहिए जिसे पूरी तरह से निष्पक्ष माना जाए। उन्होंने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि भारतीय अदालतों में बड़े पैमाने पर मामले लंबित हैं। उन्होंने अनुशंसा की कि न्यायालयों को त्वरित न्याय मुहैया कराने के लिए लोक अदालतों, ग्राम न्यायालयों और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे तौर-तरीकों का उपयोग करना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने सलाह दी कि न्यायिक प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए प्रौद्योगिकी की अंतहीन संभावनाओं का पूरा इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने भारत में न्यायालयों की प्रक्रियाओं में स्थानीय भाषाओं के उपयोग के महत्व को रेखांकित किया ताकि आम लोग उसे आसानी से समझ सकें।

उपराष्ट्रपति ने न्यायिक प्रणाली में बड़े पैमाने पर रिक्तियों को लेकर गहरी चिंता जाहिर की और आशा व्यक्त की कि मानव संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास जल्द ही फलीभूत होंगे। साथ ही उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समर्पण को स्वीकार किया जो छुट्टियों के दौरान तत्काल आपराधिक मामलों का निपटान करने पर सहमत हैं।

बिजनेस रिपोर्ट 2018 में वाणिज्यिक अनुबंधों के प्रवर्तन को सुविधाजनक बनाने के लिए राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के कामकाज की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें न्यायिक मुकदमे में देरी से बचना चाहिए, और निवेशकों में और अधिक आत्मविश्वास बढ़ाने के वास्ते एक मजबूत नियामक ढांचा तैयार करना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने साइबर अपराधों की संख्या में वृद्धि के बारे में बात की, जिसने न्यायशास्त्र में सभी नए आयामों को एक साथ सामने रखा है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध और उनकी तमाम शाखाएं न्याय की परिभाषित क्षेत्राधिकारों से परे हैं और उपराष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि अदालतें इन सब नई चीजों से खुद से निपटने के लिए तैयार होंगी। उन्होंने चुनाव संबंधी याचिकाओं के फास्ट ट्रैक निपटान के साथ ईमानदार और जोरदार तरीके से दल-बदल विरोधी कानून को लागू करने की आवश्यकता के बारे में भी बात की।

उपराष्ट्रपति ने कानूनी प्रावधानों के बारे में सावधान रहने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जैसे न्यायिक महाभियोग संवैधानिक और न्यायिक प्राधिकारों पर असर डालते हैं।

उपराष्ट्रपति ने अदालतों से हर समय सच्चाई के साथ खड़े होने का आग्रह किया ताकि प्रत्येक नागरिक यह आत्मविश्वास महसूस कर सके कि सच्चाई अकेले इस देश में जीत जाएगी। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त और वर्तमान जज, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और प्रतिष्ठित कानूनी दिग्गज इस अवसर पर उपस्थित थे।

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