डलमऊ-रायबरेली, 03 नवम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
● खसरा-रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान की पहुंच को बढ़ाते हुए
भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों के साथ वर्ष 2020 तक खसरा तथा रूबेला/वंशानुगत खसरा लक्षण (सीआरएस) को समाप्त करने का संकल्प व्यक्त किया है। इस दिशा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 9 महीने से 15 वर्ष से कम आयु वर्ग में पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से खसरा एवं हल्का खसरा टीकाकरण अभियान शुरू किया है।
26 नवम्बर 18 से 5 सप्ताह के शुरुआती अभियान का लक्ष्य डलमऊ की स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम ने डलमऊ ब्लॉक के सभी बच्चों को कवर करना है और यह पूरे विश्व में सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान बनने जा रहा है।
अभियान के दौरान 9 महीने से 15 वर्ष के कम आयु के सभी बच्चों को खसरे और हल्के खसरे से बचाने के लिए एक सूई लगाई जाती है।
इस अभियान के संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी डॉ• विनोद चौहान व डॉ• रोहित चौरासिया एवं आशा नोडल अधिकारी निर्भय श्रीवास्तव के अनुसार पहले दो सप्ताह सभी विद्यालयों, मदरसों में टीकाकरण किया जाएगा इसके उपरांत आउटरीच के तर्ज पर टीकाकरण किया जाएगा और आखिरी के सप्ताह में छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा।
इस अभियान के बाद एमआर टीका नियमित टीकाकरण का हिस्सा हो जाएगा और यह अभी 9-12 महीने के 16-24 महीनों के बच्चों को दिए जा रहे खसरे के टीका का स्थान ले लेगा।
• अभियान का उद्देश्य
अभियान का उद्देश्य समुदाय में खसरा और हल्के खसरे की बीमारी से प्रतिरोध क्षमता बढ़ाना है ताकि बीमारी पर प्रहार किया जा सके।
इसलिए अभियान के दौरान सभी बच्चों को एमआर टीका लगवाना चाहिए। जो बच्चे पहले इस तरह के टीके लगवा चुके हैं उनके लिए यह नया डोज आया है।