---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 09 नवंबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
केंद्र की कृषि बीमा योजना में दो-तिहाई रकम देने के बाद भी राज्य के किसानों को किसी तरह की सुविधा नहीं मिलने के विरोध में पश्चिम बंगाल सरकार ने फैसला किया है कि अब वह केंद्र की इस योजना का हिस्सा नहीं रहेगी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से नाराज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तय किया है कि बाढ़, सूखा समेत दूसरी प्राकृतिक आपदाओं में किसानों की मदद करने के लिए राज्य सरकार बंगाल फसल बीमा योजना चालू करेगी। इस योजना का सारा प्रीमियम राज्य सरकार की ओर से दिया जाएगा। इसके लिए 600 करोड़ रुपए का एक फंड गठित किया जाएगा। बताया जाता है कि इ स मामले में राज्य सरकार की ओर से बीमा कंपनियों के साथ बातचीत शुरू की गई है।
सूत्रों ने बताया कि बंगाल के किसानों को मुफ्त में फसल बीमा योजना का लाभ दिलवाने के लिए राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में दो-तिहाई प्रीमियम (अर्थात परियोजना का 75 फीसद हिस्सा) देना स्वीकार किया था। जबकि केंद्र की ओर से 25 फीसद हिस्सा दिया जाना है। यह परियोजना 2014 में चालू हुई है और अभी तक राज्य सरकार तकरीबन 1200 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुकी है। जबकि प्रधानमंत्री की तस्वीरों के साथ इस तरह प्रचारित किया जा रहा है कि परियोजना के लिए सारी रकम केंद्र की ओर से दी जा रही है। आरोप है कि इसके बाद भी बीमे की राशि को लेकर राज्य को पूरी तरह से अंधेरे में रखा जा रहा है।
इतना ही नहीं, यह भी आरोप है कि केंद्र की बीमा योजना में पंजीकरण करवाने के बाद किसानों की परेशानी हद से ज्यादा बढ़ गई है। बताया जाता है कि 2017-18 के लिए अभी तक क्षतिपूर्ति की रकम नहीं मिली है, जबकि 2016-17 में पंजीकरण करवाने वाले किसानों के एक हिस्से की इस तरह की शिकायतें हैं। केंद्र से इस कारण मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नाराज हैं। उनका कहना है कि बीमा के प्रीमियम का 75 फीसद हिस्सा देने के बाद भी किसानों को फायदा नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही यह भी आरोप है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ लेने के लिए जिस पोर्टल पर आवेदन करना पड़ता है, वह 27 जुलाई तक काम ही नहीं कर रहा था। इसलिए आवेदन की अंतिम तारीख 31 जुलाई होने के कारण ज्यादातर किसान आवेदन ही नहीं कर सके। इसके साथ ही आरोप है कि केंद्र की ओर से राज्य को यह भी नहीं बताया जा रहा है कि कितने किसानों को बीमा के फायदा मिल रहे है, किसानों को बीमे की कितनी रकम मिल रही है। इस बारे में केंद्र को बार-बार पत्र लिखने पर भी कोई फायदा नहीं हुआ। ऐसी भी शिकायत है कि बाढ़ या सूखे के कारण किसी एक मौजा में एक किसान की ज्यादा फसल क्षतिग्रस्त हुई है तो उसे कम मुआवजा मिला है जबकि दूसरे किसान की कम फसल क्षतिग्रस्त हुई लेकिन उसे ज्यादा मुआवजा मिल गया। इसका भी जवाब नहीं मिला कि रकम बांटने का तरीका क्या है।
मुख्यमंत्री के कृषि मामले के सलाहकार प्रदीप मजूमदार का कहना है कि प्रीमियम के 75 फीसद से भी ज्यादा रकम देने के बाद केंद्रीय परियोजना में राज्य के किसानों को लाभ नहीं मिल रहा था। इसलिए मुख्यमंत्री ने आर्थिक संकट के बाद भी बंगाल का अपना फसल बीमा योजना चालू करने का निर्देश दिया है। हर साल प्राकृतिक आपदा के कारण राज्य में नुकसान होता ही है, इसलिए 600 करोड़ रुपए की राशि मंजूर करके यह परियोजना चालू की जा रही है।