बारी के इस खेल में कल आ सकती है आपकी भी बारी.....



काशी, 12 नवम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● बनारस में 150 इलेक्ट्रॉनिक न्यूज मैनों के रोजी के सवाल पर पत्रकार संगठनों की चुप्पी क्यों ?

एक प्रशासनिक फ़रमान का वज्रपात हुआ और रातो रात वाराणसी शहर के करीब डेढ सौ से भी अधिक इलेक्ट्रॉनिक न्यूज मैन अपनी रोजी से महरुम हो गये। त्रासद यह कि सबकी खबर लेने वाले इन बेचारों का कोई पुरसाहाल नहीं। महिना पूरे होने को हो आया लेकिन इस घटना पर न तो अखबारों ने कोई प्रतिक्रिया दी और न ही स्वहित पोषित पत्रकारों की हित का दंभ भरने वाला कोई संगठन ही आगे आया। यह ठीक है कि मानकों की कसौटी पर निजी चैनलों के इस मीडियाकर्मियों की हैसियत कुछ भी रही हो। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि खबर लेने और उसे देने की जिम्मेदारी का वें निष्ठा से निर्वहन कर रहे थे। बात कड़वीं लग सकती है मगर है एक दम खरी कि यह सिर्फ बारी का खेल है। किसी को यह मुगालता नहीं होना चाहिए कि अखबारों या चैनलों के रजिस्टर में उनकी नियुक्ति का ठप्पा पक्की स्याही का है। उन्हें यह मानना पड़ेगा कि बारी के इस खेल में अगली बारी किसी की भी हो सकती है। अभी भी वक्त है और वक्त का तकाजा है कि रोजी से वंचित अपने इन साथियों के लिए आवाज़ उठाई जाय और इस बंदिश से अलग कि वे किसी पत्रकार संगठन के सदस्य हैं या नहीं।

गौरतलब है कि यह पूरा मामला एक नेता के कथित रंगरेलियों के एक विडियो से जुड़ा है। यह भी हो सकता है कि विडियो से छेड़छाड़ की गई हो। यह तकनीकी जांच का विषय है। लेकिन किसी एक की गलती के लिए पूरे समूह को सजा देना निश्चित ही नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है।

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