बाल शोषण और अपराध के मामलों से आयोग चिंतित



कोलकाता, 4 अक्टूबर। राज्य बाल आयोग की ओर से करीब तीन महीने पहले सभी पुलिस थानों को निर्देश दिए गए थे कि बच्चों के प्रति होने वाले किसी भी तरह के अपराध की सूचना उन्हें दी जाए। इस दौरान 100 से ज्यादा मामलों के बारे में आयोग को सूचना मिली है जिससे आयोग के अधिकारी चिंतित हैं। उनका मानना है कि संख्या में और वृद्धि हो सकती है।

मालूम हो कि देश भर में बच्चों के प्रति अपराध की घटनाएं और उनके अधिकारों का उल्लंघन करने की घटनाओं में लगातार वृद्धि होती जा रही है। आयोग की ओर से इस बारे में आंकड़े इकट्ठा करने शुरू किए गए हैं कि कैसे और कहां इस तरह के अपराध हो रहे हैं।

आयोग के सूत्रों ने बताया कि हाल के आंकड़े खासा चिंताजनक हैं। पुलिस से मिले आंकड़ों के मुताबिक बाल अपराध के मामले में पहले स्थान पर बांकुड़ा जिला है। जिले में बीते तीन महीने में 23 मामलों के बारे में जानकारी मिली है, जिसमें 10 बलात्कार के मामले हैं। दूसरे स्थान पर नदिया जिला है। वहां यौन उत्पीड़न से लेकर छेड़खानी तक सभी तरह के मामले दर्ज हुए हैं। कोलकाता में सात, उत्तर चौबीस परगना और दक्षिण चौबीस परगना जिले में छह - छह मामले दर्ज हुए हैं। पूर्व मेदिनीपुर से आठ और हावड़ा से दो शिकायतें मिली हैं।

सूत्रों ने बताया कि ज्यादातर शिकायतें बलात्कार की मिल रही हैं। औसतन चार साल की उम्र से लेकर 15 साल की बच्चियों के साथ बलात्कार किए जा रहे हैं। इस दौरान कई जगह पिता के बेटी से बलात्कार की शिकायतें भी मिली हैं। हलदिया में एक बाप ने अपनी दो बेटियों के साथ बलात्कार किया। जबकि कहीं गृह शिक्षक की ओर से भी बलात्कार की शिकायतें मिली हैं। कोलकाता में एक छह साल के बच्चे के साथ उसके पिता और दोस्तों की ओर से बलात्कार की शिकायत दर्ज हुई है। पुलिस ने इस मामले में पिता को गिरफ्तार किया है।

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