कृषि और प्रबन्धन रणनीतियों पर जलवायु परिवर्तन और अजैविक तनाव का प्रभाव : दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी



वाराणसी, 18 नवम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

शनिवार 17 नवम्बर 2018 को विज्ञान संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के महामना हाल, सेमिनार कामप्लेक्स में ‘कृषि और प्रबन्धन रणनीतियों पर जलवायु परिवर्तन और अजैविक तनाव का प्रभाव’ नामक विषय पर एक दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन अपरान्ह 12.00 बजे प्रो• ए• मुशनजी, विभागाध्यक्ष, कृषि अर्थशास्त्र एवं प्रसार विभाग, फोर्ट हारे विश्वविद्यालय, दक्षिण अफ्रिका के कर कमलों द्वारा हुआ।

प्रो• ए• मुशनजी ने बताया कि कृषि एक क्षेत्र है जो मौसम और जलवायु से काफी प्रभावित है। जलवायु परिवर्तन में संभावित रूप से खेती के स्थापित तरिकों को खतरे में डाला जा सकता है और देश की बढ़ती आबादी को खिलाने के लिए फसल उत्पादन को बनाए रख सकता है। बढ़ी हुई फसल इंडेक्स और बीमारी प्रतिरोध के प्रजनन के माध्यम से बेहतर किस्मों को सापेक्ष जलवायु स्थिरता की इस अवधि के दौरान आसानी से अपनाया जा सकता है। जलवायु परिवर्तन की कई चुनौतियों को देखते हुए पानी की आपूर्ति में कमी, और कई क्षेत्रों में मिट्टी की प्रजनन क्षमता में गिरावट, मौजूदा दिनों में नए दृष्टिकोण और तकनीकों को टिकाऊ फसल उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है।

भूमि सुधार में तंबाकू उत्पादन एक नया आयाम है जो जलवायु परिर्वतन से लड़ने की क्षमता रखता है। जिम्बाम्बे में इसकी खेती बहुत जोरो से चल रही है तथा भूमि की उर्वता में भी सुधार हो रहा है। अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि जिम्बाम्बे में वाणिज्यिक तंबाकू किसान जलवायु परिवर्तन और परिवर्तनशीलता के लिए मामूली रूप से कमजोर है, वाणिज्यिक तंबाकू किसनों के जलवायु परिवर्तन की समस्या और वित्त, बाहरी समर्थन, पर्यावरण की प्रकृति, प्राकृति और जलवायु परिवर्तन पहलुओं को हासिल करनें में परिवर्तनशीलता के कारण कारक बढ़ रहें हैं। किसनों की समस्या को कम करने के साथ-साथ सिंचाई या जल संचयन प्रौद्योगिकियों जैसे शमन रणनीतियों में निवेश को कम करने के लिए विस्तार और तकनिकी सहायता से संबंधित संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता है।

इस कार्यक्रम में प्रो• सी• एस• मुटेन्ग्वा, एग्रोनामी विभाग, फोर्ट हारे विश्वविद्यालय, दक्षिण अफ्रिका विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने भाषण में बताया कि उच्च तापमान तनाव और सब्जियों की बढ़ती अवधि में गंभीर सूखे के लिए सहिष्णुता की सीमा को बढ़ाने के लिए आनुवांशिक भिन्नता की आवश्यकता होगी, जो इस शताब्दी में जलवायु परिवर्तन के साथ अधिक चरम पर होने की भविष्यवाणी की जाती है। विशेष रूप से चरम स्थितियों की घटनाओं को वर्तमान में समशीतोष्ण उष्णकटिबंधीय फसल क्षेत्रों में अधिक होने की उम्मीद है। यह विश्व खाद्य सुरक्षा के लिए विशेष रूप से दुनिया की वार्षिक प्रमुख खाद्य फसलों के उत्पादन के लिए खतरा बनता है, जैसे-गेहूँ, चावल, मक्का, ज्वार और आलू।

प्रो• पी• के• शर्मा, मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग, कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू, वाराणसी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में बताया कि पौधे अजैविक तनाव के क्षेत्र में पर्यावरण से अबाध कारकों या तनाव पर सभी अध्ययन शामिल हैं, जो विभिन्न प्रजतियों पर तनाव लगा सकते हैं। इन तनावों में प्रकाश के उच्च स्तर (उच्च और निम्न), विकिरण (यूवी-बी और यूीव-ए), तापमान (उच्च और निम्न, ठण्डा), पानी (सूख, बाढ़ और जलमग्न), रासायनिक कारक (भारी धातुओं और पी•एच•), अत्यधिक छंकम या आवश्यक पोषक तत्त्वों, गैसीय प्रदूषक (ओजोन, सल्फर डाइआॅक्साइड), यांत्रिक कारक और अन्य कम अक्सर होने वाले तनाव के कारण लवणता। चूँकि इन तनावों के संयोजन जैसे गर्मी और सूखे क्षेत्र की स्थितियों के तहत होते हैं, अद्वितीय प्रभाव पैदा कर सकते हैं। भारत में हालांकि कुल वर्षा में मामुली वृद्धि हुई है। बरसात के दिनों में कमी आई है। इस प्रकार खाद्य और प्राथमिक उत्पादन की निरन्तर माँग को पूरा करने के लिए कम से कम सीमित प्राकृतिक और गैर-लाभकारी संसाधनों से कम से कम उत्पादन किया जाना चाहिए, क्योंकि भारत 2050 तक दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश होगा जो 1.5 अरब से अधिक की अनुमानित आबादी के साथ और इसके खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए उसके खाद्य उत्पादन को दोगुना करने की आवश्यकता होगी।

इस कार्यक्रम में डाॅ• नयन कुमार प्रसाद, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल को ‘‘महिमा लाईफ टाईम एचीवमेन्ट अवार्ड’’ से सम्मानित किया गया, जो जूलाॅजी विषय में बहुत ही महत्त्वपूर्ण कार्य किया है।

इस गोष्ठी में दक्षिण अफ्रिका, नेपाल, पश्चिम बंगाल, करनाटका, फैजाबाद, जौनुपर, जम्मू एवं काश्मीर, लेह, चण्डीगढ़, भागलपुर, इलाहाबाद, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, लखनऊ, मध्यप्रदेश, बिकानेर, भुबनेश्वर, बिहार, हिमांचल प्रदेश, अरूणांचल प्रदेश, हिसार, हरियाणा, जबलपुर, जयपुर, राजस्थान, पूणे आदि से प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

अंत में, गोष्ठी में आये हुए अथितियों का स्वागत रत्नेश कुमार राव, सचिव, महिमा रिसर्च फाउण्डेशन एण्ड सोशल वेलफेयर ने किया। संचलान डा• जयन्त उपाध्याय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो• ए• के• राय ने किया।

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