शिक्षक क्या पढ़ाते हैं यह जानने के लिए विद्यार्थियों को मिलेगी मुफ्त में डायरी



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 18 नवम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

आम तौर पर अभिभावकों की ओर से शिकायत की जाती है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती है। कभी शिक्षकों की गैर हाजरी तो कभी स्कूल में आने के बाद भी दूसरे कामों में शिक्षकों के व्यस्त रहने के आरोप लगाए जाते रहे हैं। पश्चिम बंगाल के शिक्षा विभाग ने कक्षाओं में होने वाली पढ़ाई पर निगरानी करने के लिए एक नया तरीका अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत छात्र-छात्राओं को मुफ्त में डायरी देने की परियोजना बनाई गई है। प्रतिदिन कक्षाओं में क्या पढ़ाया जाता है, उन्हें डायरी में सिर्फ यह लिखना होगा। प्राइमरी, उच्च प्राइमरी और माध्यमिक-उच्च माध्यमिक स्तर पर तीन तरह की डायरी देने का फैसला किया गया है। बताया जाता है कि इस बारे में विशषज्ञों से सलाह-मश्विरा किया जा रहा है। हाल तक मिली जानकारी के मुताबिक 02 जनवरी को पुस्तक दिवस के मौके पर राज्य स्कूलों में पढ़ने वालों को डायरी प्रदान करेगा।

शिक्षा विभाग की ओर से कुछ दिन पहले स्कूलों से मूल्यांकन को लेकर रिपोर्ट मंगवाई गई थी। इस दौरान स्कूलों की जांच में पता चला कि कई स्कूलों में रजिस्टर ही नहीं हैं। इसलिए प्रतिदिन के कामकाज, कक्षाओं में क्या पढ़ाया गया और दूसरे कामकाज की कोई जानकारी कहीं दर्ज नहीं की जा रही थी। कुछ लोगों का मानना है कि यह देख कर ही राज्य सरकार ने डायरी देने का फैसला किया है। इसके साथ ही सबसे बड़ी बात यह है कि डायरी में छात्र लिखेंगे कि शिक्षकों ने क्या पढ़ाया। प्रधानशिक्षक, छात्र, अभिभावक सभी लोगों को पता चल सकेगा कि कक्षा में क्या पढ़ाई हो रही है। बताया जाता है कि साल पूरा होने पर डायरी के आधार पर अभिभावक व शिक्षा विभाग शिक्षक से उनकी कारगुजारी के बारे में सवाल भी पूछ सकता है। इससे यह भी पता चल सकेगा कि बच्चे ने क्या सीखना था और वह क्या सीख सका है। मालूम हो कि पहले ही एक बुकलेट में अभिभावकों को पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम के बारे में जानकारी दे दी जाएगी, जिससे अभिभावकों को यह जानकारी रहेगी कि क्या पढ़ाया जाना चाहिए था।

शिक्षा विभाग से लेकर जिले के डीआई तक नियमित तौर पर ऐसी डायरियों की जांच करेंगे। प्राथमिक तौर पर तय किया गया है कि छोटे बच्चों की डायरी शिक्षक ही लिखेंगे, लेकिन बड़े लड़के-लड़कियों के बारे में अभी फैसला नहीं किया गया है।

हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि छात्र-छात्राओं के बजाए यह डायरी अगर शिक्षकों को लिखने के लिए दी जाती, तब अच्छा होता। जबकि दूसरे कुछ लोगों का कहना है कि शिक्षक बगैर पढ़ाए भी लिख सकते हैं कि हमनें पढ़ा दिया। ऐसे में छात्र-छात्राओं की डायरी अभिभावकों के पास भी पहुंचेगी।

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