---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 01 दिसम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से बाबरी मस्जिद ध्वंस की यादगार के तौर पर हर साल मनाए जाने वाले प्रतिवाद दिवस के दूसरे दिन राज्य में रथ यात्रा निकाली जा रही है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस की ओर से भाजपा को किसी भी तरह की छूट नहीं दी जा रही है जिससे वह राजनीतिक फायदा लूट सके। कुछ महीने पहले कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली स्थल और इसके चारों ओर जिस तरह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीरों, बैनर और पोस्टर के साथ जैसे तृणमूल कांग्रेस का प्रचार किया गया था। ठीक उसी तर्ज पर रथयात्रा के शुरू होने से पहले ही राज्य के हर जिले और इलाके की दीवारों, रास्तों, सड़कों पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीरें- उन्नीस-बीजेपी फिनिश, भाजपा हटाओ-देश बचाओ समेत विभिन्न नारों के साथ ब्रिगेड रैली का प्रचार कर रही हैं। सूबे का कोई गली-कूचा ऐसा नहीं जहां ममता और तृणमूल नहीं दिख रहा है। माना जा रहा है कि इससे दिल्ली से आने वाले नेताओं और मंत्रियों को भी तृणमूल की शक्ति का आभास हो जाएगा। रथ यात्रा में शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कई फिल्म स्टार, केंद्रीय मंत्री, कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के आने की चर्चा है।
तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि भाजपा के उग्र हिंदुत्व के जवाब में तृणमूल कांग्रेस की ओर से बंगाल की हिंदू संस्कृति को हथियार बनाकर उग्र हिंदुत्व के हथियार को भथरा करने की रणनीति बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने एलान किया है कि भाजपा की ओर से राज्य में माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन उस माहौल की सफाई पवित्र यात्रा से की जाएगी। रथ यात्रा के जवाब में दल की ओर से उसी रूट पर यह यात्रा निकाली जाएगी। भाजपा की रथयात्रा लोगों को बांटने के लिए की जा रही है। इसके दूसरे दिन ही राज्य में शुद्धिकरण करने के लिए बंगाल की हिंदू संस्कृति के मुताबिक शंख बजाकर तृणमूल की पवित्र यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद गंगा जल का छिड़काव करके, गोबर के पानी से रास्ते को शुद्ध किए जाने की योजना है। बताया जाता है कि पवित्र यात्रा में सारे रास्ते जगन्नाथ, बलराम और शुभद्रा के कटआउट साथ-साथ चलने चाहिए। जिला नेतृत्व की ओर से राज्य के सभी ब्लाकों में इस बारे में दिशा-निर्देश पहुंच चुके हैं।
मालूम हो कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा की ओर से बंगाल में पैठ बनाने की बीते कई सालों से कोशिश की जा रही है। तृणमूल के 7 साल के शासनकाल में जहां वाममोर्चा और कांग्रेस कमजोर होती जा रही है, वहीं भाजपा उनकी जगह लेने की कोशिश कर रही है। ऐसे में तृणमूल और भाजपा में टक्कर तेज होती जा रही है। भाजपा जहां अमित शाह को लाकर राज्य सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है वहीं तृणमूल केंद्र से भाजपा सरकार को उखाड़ने के लिए विरोधी दलों को इकट्ठा करके केंद्र को ही संकट में डाल दिया है।
ममता ने विधायक दल के नेताओं के साथ बैठक में धर्म को लेकर राजनीति करने वालों का मुकाबला करने के लिए तैयार रहने के लिए कहा है। भाजपा की सभी सुविधासंपन्न पांच तारा होटल वाली सुविधाओं से सुसज्जित बस, जिसे रथ बनाया जा रहा है, का भी जमकर मखौल उड़ाया जा रहा है।
तृणमूल के महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि वे धर्म के नाम पर लोगों को बांटना चाहते हैं और तृणमूल मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य के सभी लोगों का सामूहिक विकास करके सद्भावना कायम रखने के लिए सक्रिय है। इसलिए पवित्र यात्रा के माध्यम से तृणमूल की ओर से सर्व धर्म सद्भभाव का संदेश ही दिया जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से पवित्र यात्रा के लिए दल को भेजे गए एक गोपनीय संदेश में कहा गया है कि महिलाएं लाल किनारे वाली साड़ियां पहन कर गंगाजल या गोबर के जल से भरे मंगलघट से रास्ते के चारों ओर जल का छिड़काव करके शुदिधकरण करेंगी। पवित्र यात्रा में शामिल हर 10 लोगों में एक व्यक्ति के पास जगन्नाथ, बलराम, शुभद्रा का कटआउट होगा और उसके नीचे लिखा होगा उन्होंने ईश्वर को रथ से उतार कर खुद रथ की सवारी शुरू कर दी है और हम लोगों ने ईश्वर को छाती से लगा कर रखा है। इसके पीछे चलने वाली युवतियां शंख बजाती जाएंगी। इसके बाद कतार में पुरूष होंगे। कांसर, खड़ताल, ढोल-मजीरे बजाते हुए वे इसमें शामिल होंगे। पवित्र यात्रा में शामिल सभी लोगों के पास मुख्यमंत्री की तस्वीर और तृणमूल के चुनाव चिन्ह वाले झण्डे होंगे।
यह पवित्र यात्रा जिस विधानसभा इलाके से गुजरेगें, उस विधानसभा केंद्र का नाम वाला बैनर तो होगा, लेकिन किसी व्यक्ति का नाम वहां नहीं होगा। दल की ओर से दिए गए निर्देश में कहा गया है कि पवित्र यात्रा में इलाके के सांसद, विधायक समेत सभी जनप्रतिनिधियों का उपस्थित रहना बाध्यतामूल है।
तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि भाजपा जिस तरह खुद को हिंदुओं का इकलौता दल घोषित करके लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है, यह किसी भी हालत में मान्य नहीं है। धर्म को लेकर भाजपा की राजनीति को रोकने के लिए ही पवित्र यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से जिस तरह संगठित होकर यात्रा का आयोजन किया जा रहा है, इससे माना जा रहा है कि राज्य में भाजपा धर्म को लेकर राजनीति करना छोड़ देगी।