बीएचयू : अब कुकूरमुत्ते की तरह उग आये "सलाहकार".......



--- हरेन्द्र शुक्ला,वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।

☆ अवकाश प्राप्ति के बाद भी मौजा ही मौजा

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जो वर्तमान समय में हालात है उसमें कुकूरमुत्ते की तरह "सलाहकार" उग आये हैं यह कहना गलत नहींं होगा। कारण जिन जिन दगे हुये कारतूस सरीखे लोग जिन्हें सेवानिवृत्ती के बाद जिन - जिन समस्यायों पर नियंत्रण के रास्तों को सुधारने के लिए इन्हें मोटी पगार की शर्तो पर ओहदा दिया गया था। वह समस्याओं पर नियंत्रण तो नहीं कर पाये, मगर जब परिसर में जब घटनाएं हो गई तब बीच बाजार में सीना तानकर यह "सलाहकार" खड़े हो गये और अपनी अपनी चुप्पी तोड़ने लगे। यह बताने में भी जुट गये कि वह विशेषज्ञ हैं।

अब आईये जरा गौर करते हैं इन "सलाहकारों" की उन गतिविधियों पर जो न हों, पर होती है और सेवानिवृत्ती के बाद ऐनकेन प्रकारेण सलाहकार की कुर्सी हासिल कर जीवन की शेष दिनों को काटते हुये नजर आते है।

बीएचयू के रजिस्ट्रार के पद से अवकाश प्राप्त करने के बाद डा• के• पी• उपाध्याय प्रशासनिक सलाहकार नियुक्त कर दिये गये। इसके चलते उनके परीक्षा नियंता और रजिस्ट्रार रहते हुये उन्हें प्राप्त सभी वेतन भत्ते सहित सरकारी गाड़ी, बंगला और सुरक्षागार्ड मुहैया करा दी गई है। उनसे संबंध संयुक्त परीक्षा नियंत्रक डा• एम• आर• पाठक को भी वह सारी सुविधाएं दी गई जो डा• उपाध्याय के ही साथ अवकाश प्राप्त किये है। चर्चा यह भी है कि कुलपति प्रो• जी• सी• त्रिपाठी इनके अलावा पिछले दरवाजे से संघ के उच्च पदस्थ पदाधिकारियों के सिफारिश पर और भी कई नियुक्तियां की है। जिनमें के• चन्द्रमौली और गौरव गर्ग भी शताब्दी समारोह प्रकोष्ठ से संबंध कर मोटी तनख्वाह पर सलाहकार नियुक्त किये गये।

शर्तो के अधीन नियुक्त उपरोक्त सलाहकार मनमाने ढंग से रहते है और कार्य करते है। इनके कार्यों की वैद्यानिक मूल्यांकन की कोई व्यवस्था नहींं है। ये पिछले दरवाजे से मोटी तनख्वाह पाते है। ये सलाहकार लक्ष्णदास अतिथि गृह में गत दो वर्ष से डेरा जमाये हुये हैं जहां मुफ्त में भोजन और नाश्ते का लुत्फ उठा रहे है। पिछले दरवाजे से की गई इन नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच के साथ ही इनके चल - अचल संपत्तियों की जांच यदि हो जाय तो इनकी कलई खुलना तय है।

विश्वविद्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार इन सलाहकारों की नियुक्ति प्रक्रिया एवं कार्यों के दायित्वों की कोई वैद्यानिक रुप रेखा नहींं है। वर्तमान रजिस्ट्रार भी यह सब जानते हुये इस षडयंत्र में शामिल हैं। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि विश्वविद्यालय के ग्रामीण विकास केंद्र में सर्वेयर जनरल आफ इंडिया के कार्यालय से संबद्ध उच्च सिफारिश पर निर्धारित मानद वेतन पर एक नियुक्ति भी जांच के घेरे में है।

इतना ही नहींं बिहार के पूर्व एडीजीपी ए• के• सेठ को दो वर्ष पूर्व "1.5 लाख रुपये" प्रतिमाह मानदेय के साथ ही अन्य सुविधाओं से लैस करके बीएचयू प्रशासन ने उनको बीएचयू का सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया था। चर्चा यह भी है कि सेवानिवृत्ती के बाद डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह पाने वाले यह सुरक्षा सलाहकार विश्वविद्यालय के किसी अधिकारी के समधी भी है। नियुक्ति के दो वर्ष तक विश्वविद्यालय की सुरक्षा को लेकर कभी भी सेठ जी तत्पर नहींं दिखे लेकिन इधर बीच बीएचयू हिंसा के बाद वह यदाकदा जांच समितियों को अपना सुझाव देते हुये पाये जा रहे हैं। इसके अलावा बीएचयू के पूर्व रजिस्ट्रार डा• के• पी• उपाध्याय भी अपनी कला के बलपर लगभग 10 वर्षों तक बीएचयू के परीक्षा नियंता और रजिस्ट्रार जैसे महत्त्वपूर्ण पदों पर रहते हुये अपने रिश्तेदारों की नियुक्ति कराने में सफल रहे।

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