खबरें विशेष : प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन व लोकार्पण



नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश, 14 दिसम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥■॥ प्रधानमंत्री नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत प्रयागराज के लिए 195.65 करोड़ रुपये की लागत वाली सीवर परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 16 दिसंबर, 2018 को प्रयागराज (इलाहाबाद) में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 199.65 करोड़ रुपये वाली दो सीवर अवसरंचना परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। वे झूसी में एक कार्यक्रम के दौरान 1671.59 करोड़ रुपये की दो परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे। इन परियोजनाओं से गंगा में प्रतिदिन 7.8 करोड़ लीटर सीवर का अशोधित गंदा पानी गिरने से रुकेगा जिन परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाना है। उनके पूरे हो जाने पर गंगा में प्रतिदिन 7.2 करोड़ लीटर सीवर का अशोधित गंदा पानी गिरने से रुकेगा।

सीवर प्रणाली की जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाना है, उनमें से एक परियोजना जिला “सी” और अल्लाहपुर में है। इनकी स्वीकृत लागत 46.87 करोड़ रुपये है और सीवर नेटवर्क की लंबाई 134.19 किलोमीटर है। अन्य सीवर नेटवर्क परियोजना प्रयागराज के जिला “ई” (भाग-2) है, जिसकी स्वीकृत लागत 52.78 करोड़ रुपये और सीवर नेटवर्क की लंबाई 52.66 किलोमीटर है।

प्रधानमंत्री शहर में दो परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे। इनमें से एक परियोजना गंदे पानी को रोकने और उसके प्रवाह को बदलने के संबंध में है। इसके लिए नैनी, फाफामऊ और झूसी क्षेत्र में सीवर उपचार संयंत्र भी बनाए जाएंगे। इसकी स्वीकृत लागत 767.59 करोड़ रुपये और सीवर नेटवर्क की लंबाई 16.41 किलोमीटर है। इस परियोजना में 72 एमएलडी क्षमता वाले तीन सीवर उपचार संयंत्र शामिल हैं, जिनमें से 42 एमएलडी का संयंत्र नैनी में, 14 एमएलडी का संयंत्र फाफामऊ में और तीसरा 16 एमएलडी का संयंत्र झूसी में बनाया जाएगा। इस परियोजना में 7 सीवर पम्पिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। इसका ठेका ‘चलाओ और रखरखाव करो’ के आधार पर 15 वर्षों के लिए दिया जाएगा।

शिलान्यास की जाने वाली दूसरी परियोजना मौजूदा सीवर उपचार ढांचे को दुरुस्त करने और ‘चलाओ और रखरखाव करो’ के संबंध में है। इसकी स्वीकृत लागत 904 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के तहत नैनी में मौजूद 80 एमएलडी सीवर उपचार संयंत्र को दुरुस्त करना तथा ‘चलाओ और रखरखाव करो’ वाले नैनी, नुमायादही, राजापुर, कोडरा, पनघाट और सलोरियांड में मौजूदा 254 एमएलडी क्षमता के छह सीवर उपचार संयंत्र शामिल हैं। प्रत्येक स्थान पर दस-दस सीवर पम्पिंग स्टेशन मौजूद हैं।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने प्रयागराज में निम्नलिखित काम हाथ में लिए हैं –

कुंभ 2019

• शौचालय – 27,500 शौचालयों और 20,000 मूत्रालयों के लिए 113 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता।
• ठोस कचरा प्रबंधन – 16,000 कूड़ेदानों और अस्तर वाले बैगों के लिए 3.6 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता।
• आईईसी गतिविधियां – आईईसी गतिविधियों के लिए 16.68 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता।
• नालियों का जैवोपचारण – कुंभ के मद्देनज़र छह महीनों के लिए 53 नालियों के जैवोपचारण के संबंध में परियोजनाओं को स्वीकृति।

घाट और शवदाहगृह

88.03 करोड़ रुपये की लागत से छह घाटों और तीन शवदाहगृहों के निर्माण के लिए परियोजनाओँ को स्वीकृति। इसका काम प्रगति पर है और मार्च 2019 तक पूरा हो जाने की संभावना है।

नदी की तलहटी और घाटों की सफाई

नदी पर बहने वाली गंदगी को जमा करने के लिए प्रणाली शुरू कर दी गई है। इसके अतिरिक्त 21 घाटों की निरंतर सफाई के लिए 3.3 करोड़ रुपये की लागत वाली एक परियोजना को मंजूरी दी गई। यह परियोजना संविदा प्रक्रिया में है।


॥■॥ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय राजमार्ग – 232 के पुनर्निमित रायबरेली-फतेहपुर-बांदा सेक्शन का लोकार्पण करेंगे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 16 दिसंबर, 2018 को रायबरेली में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय राजमार्ग – 232 के पुनर्निमित रायबरेली-फतेहपुर-बांदा सेक्शन का लोकार्पण करेंगे। 133 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को 558 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है। यह राजमार्ग उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड, चित्रकूट, लखनऊ और पूर्वांचल को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क है। इस राजमार्ग पर निर्माण सामग्री ढोने वाले ट्रकों का भारी यातायात होता है। जब 2013 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस राजमार्ग का काम हाथ में लिया था, तब उस समय इसकी बहुत जर्जर हालत थी। उस दौरान बांदा से रायबरेली जाने में 7 से 8 घंटे लगते थे। मरम्मत के बाद इन दोनों शहरों के बीच सफर का समय अब ढाई घंटे हो गया है।

यह राजमार्ग दो लेनों का है और दोनों तरफ फुटपाथ बने हैं। बांदा जिले के शहरी हिस्से में राजमार्ग चार लेन का हो जाता है। इस राजमार्ग पर दो बाई-पास भी बनाए गए हैं। पहला बाई-पास 11 किलोमीटर लंबा है जो फतेहपुर जाता है और दूसरा बाई-पास पांच किलोमीटर लंबा है जो रायबरेली के लालगंज को जाता है। लालगंज और फतेहपुर में दो आरओबी (रेलवे लाइन के ऊपर पुल) भी बनाए गए हैं। इन दोनों पुलों को इस तकनीक से बनाया गया है, ताकि व्यस्त दिल्ली-कोलकाता रेलवे ट्रंक रूट पर ट्रैफिक जाम न हो सके।

बांदा और रायबरेली के बीच यात्रा समय में भारी कमी करने के साथ यह राजमार्ग इन शहरों में ट्रैफिक जाम से भी मुक्ति दिलाएगा और प्रदूषण में कमी आएगी तथा ईंधन की खपत भी कम होगी। राजमार्ग खुल जाने से इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा राज्य के पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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