कोलकाता। मुकुल राय कितने सांसद, विधायकों को लेकर भाजपा में शामिल होने वाले हैं, इस मुद्दे पर सूत्रों का कहना है कि मोलभाव चल रहा है। इस दौरान निजाम पैलेस में अपने करीबी लोगों से मुकुल ने कहा है कि औपचारिक तौर पर दल बदले बगैर भी दूसरे दल के लिए काम किया जा सकता है। विधानसभा के पूर्व स्पीकर हासिम अब्दुल हालिम ने यह रास्ता दिखा दिया है।
सूत्रों का कहना है कि उक्त महत्वपूर्ण टिप्पणी के साथ ही मुकुल राय का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस के कई नेता भी उनके संपर्क में हैं। इस सूची में कई विधायक भी शामिल हैं। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि कांग्रेसी विधायक फिलहाल भाजपा में जाने के लिए तैयार नहीं हैं। लेकिन सीधे दल बदल किए बगैर गोपनीय तौर पर वे मुकुल के साथ हैं, इसका उन्होंने भरोसा दिया है।
गौरतलब है कि पहले भी कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं ने विधायक पद से इस्तीफा दिए बगैर अनौपचारिक तौर पर दल बदल किया है। कांग्रेस के कई विधायक विधानसभा में कांग्रेस के साथ बैठते रहे हैं, लेकिन बाहर वे तृणमूल के साथ रहे हैं। बताया जाता है कि मुकुल का कहना है कि बंगाल की राजनीति में ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है। उन्होंने अपने करीबी नेताओं को साफ तौर पर बता दिया है कि मौजूदा हालात के कारण विधानसभा में दोहरा दल करने वाले विधायकों की संख्या में वृद्धि होगी।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा नेतृत्व चाहता है कि मुकुल कई विधायकों-सांसदों को लेकर भाजपा में प्रवेश करें। राज्य भाजपा इस बात को लेकर ज्यादा उत्साहित दिख रही है कि देखते हैं मुकुल कितने विधायकों को लेकर दल में शामिल होने जा रहे हैं। मालूम हो कि भाजपा में मुकुल विरोधी गुट का मानना है कि अकेले मुकुल के दल में आने का फायदा नहीं होगा, इसलिए यह देखना मुनासिब होगा कि वे कितने विधायकों को लाने में सफल हो सकते हैं। जबकि मुकुल की ओर से भाजपा को यह बताया जा रहा है कि कितने विधायक उनके साथ शामिल हो रहे हैं, इससे ज्यादा यह महत्वपूर्ण है कि विधानसभा के बाहर कितने विधायक उनके पक्ष में हैं। भाजपा में मुकुल समर्थक एक नेता का कहना है कि राष्ट्रपति वोट में क्रास वोटिंग से साफ है कि तृणमूल के कई सांसद मुकुल के पक्ष में हैं।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि मुकुल अभी तृणमूल कांग्रेस में नहीं हैं, इसलिए उन्हें दल विरोधी काम करने वाला नहीं कह सकते। लेकिन वे दल के साथ गद्दारी कर रहे हैं। दल में रहकर लंबे समय से उसे कमजोर करने की कोशिश करते रहे हैं। अब कह रहे हैं कि भाजपा को साथ लेकर तृणमूल का जन्म हुआ है। जब रेल मंत्री थे दल की सारी सत्ता का व्यवहार करते हुए ऐसा क्यों नहीं कहा ? अटल बिहारी बाजपेयी के कारण हम उनके साथ थे क्योंकि वे गैर सांप्रदायिक चेहरा थे। क्या मुकुल बाजपेयी के साथ मोदी-शाह की तुलना कर सकते हैं ? दिल्ली दौरे के बहाने उन्होंने सांसद पद का जमकर दुर्व्यवहार किया था, उनके खिलाफ लगाए जा रहे सारे आरोप मुकुल के कारण सच साबित हो रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें मुकुल को चैलेंज देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है कि राज्य की 294 सीटों में से किसी एक भी सीट पर मुकाबला करके देखें, पता चल जाएगा कि बंगाल के लोग किसके साथ हैं। ममता ने उनके गैस के गुब्बारे की हवा निकाल दी है, हवा निकलने के बाद उन्होंने केंद्र के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। सभी लोगों को मालूम है कि नुकसानदेह कौन है। ममता ने उसे अनेक मौके दिए थे।