चेन पुलिंग, 182 और बेचारे रेल यात्री



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 06 जनवरी 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

हावड़ा और अमृतसर के बीच प्रतापगढ़, बनारस, अंबाला, फगवाड़ा जैसे लाखों रेल यात्रियों के लिए बरसों से पंजाब मेल और डुप्लीकेट ट्रेन ही सहारा रही हैं। केंद्र में सरकारें और रेल मंत्री बदलते रहे हैं लेकिन इन ट्रेनों में गंदगी, देरी से चलने का एक के बाद एक रिकार्ड कायम करने और ट्रेनों को रद्द करने का लगता है कि जैसे रिकार्ड बनता जा रहा है। खास तौर से तो नवंबर से फरवरी के बीच यह समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है। दिसंबर के अंतिम हफ्ते से लेकर 2 जनवरी तक पंजाब मेल (अमृतसर मेल 13005 अप और 13006 डाउन) दो बार रद्द हो चुकी है। अपने समय के लिए यह ट्रेन पटना, पटना साहिब से लेकर मुगलसराय, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर जैसे स्टेशन के लाखों यात्रियों की भी पहली पसंद रही है।

ट्रेन की देरी का आलम यह है कि बीते दिनों एक परिवार पटना स्टेशन बच्चों को लेकर स्टेशन पर पहुंचा था। रात साढ़े ग्यारह बजे की ट्रेन पकड़ने के लिए घर से आठ बजे ही निकल पड़ा था। कड़ाके की ठंड में आधी रात को आने वाले ट्रेन सुबह छह बजे स्टेशन पहुंची तो परिवार को गुस्से में पसीने छूट रहे थे। इसके बाद हावड़ा स्टेशन जब नौ घंटे देरी से यह ट्रेन पहुंची तो परिवार की हालत देखने लायक थी।

इसी तरह, पंजाब में दरबार साहिब समेत कई तीर्थ स्थलों का दर्शन करके तीन परिवार लखनऊ से अमृतसर से रवाना होने वाली डाउन अमृतसर मेल में जब हावड़ा आने के लिए ट्रेन में सवार हुए तो खासे खुश थे। इंटरनेट पर उन्होंने देख लिया था कि 30 दिसंबर की यह ट्रेन लुधियाना अपने तय समय रात 9.15 बजे रवाना हुई है। लेकिन लखनऊ और इसके बाद ट्रेन जैसे-जैसे देरी का समय बढ़ाते जा रही थी, परिवार के लोगों की हालत दयनीय होने लगी। नौवीं कक्षा की एक लड़की को दोपहर बाद पहली और शाम को दूसरी ट्यूशन पढ़ने के लिए जाना था। पिता ने कलेक्शन के लिए लोगों को बुला रखा था। ट्रेन की मेहरबानी के कारण उन्हें हावड़ा के बजाए बर्दवान उतरने का फैसला किया और एक गाड़ी बुक करके गंतव्य स्थल जाने का फैसला किया। परिवार की एक महिला का कहना था कि कान को हाथ लगाते हैं, अगली बार वैष्णो देवी के दर्शन को जाना है ट्रेन के बजाए प्लेन से जाना ही बेहतर रहेगा।

ट्रेन समय पर नहीं चलने के कारण जहां हजारों लोगों की दिनचर्या गड़बड़ा जाती है। वहीं, चार महीने पहले हफ्ते की छुट्टियों की प्लानिंग करके टिकट लेने वालों के सिर पर तब जैसे आसमान ही गिर जाता है, जब उन्हें पता चलता है कि आज रवाना होने वाली ट्रेन रद्द की जा रही है। हालांकि रेलवे की ओर से यात्रियों का पूरा किराया वापस करने और समस्या के लिए खेद प्रकट जरुर किया जाता है। अब वे बेचारे अपने गंतव्य स्थल पर कैसे पहुंचे, उनकी नौकरी जाए या वेतन कटे, रेलवे का इससे कोई लेना-देना नहीं है। कुछ एक घंटे की देरी में उसी टिकट पर वैकल्पिक ट्रेन पर सवारी का मौका देने के बारे में रेल यात्रियों की सालों से की जा रही मांग पर मीडिया में तो कई बार छप चुका है। लेकिन रेलवे की ओर से लगता है कि रद्द ट्रेन यात्रियों से चार महीने पहले ली गई किराए की एडवांस रकम के बाद भी उन्हें गंतव्य स्थल पर पहुंचाने की कोई जिम्मेवारी नहीं है।

स्लीपर श्रेणी के डिब्बों में बगैर टिकट, वेटिंग टिकट, जनरल डिब्बे का टिकट लेकर चलने और डेली पैसेंजरों की समस्या भी एक विकराल रूप धारण कर चुकी है। आम तौर पर आरक्षित टिकट लेकर यात्रा करने वालों को कई बार लेटने का मौका भी नहीं मिलता है। इसके साथ ही सामान चोरी की घटनाएं भी उक्त ट्रेनों में होती ही रहती हैं। कई लोगों का कहना है कि स्लीपर श्रेणी के यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए रेलवे अगर बगैर टिकट वाले यात्रियों को रोक नहीं सकता तो कम से कम ज्यादा संख्या में जनरल डिब्बे तो ट्रेन में जोड़ ही सकता है। ऐसे यात्री अपने पसंद के स्टेशन पर चेन खींच कर ट्रेन से उतर जाते हैं और ट्रेन लेट से और ज्यादा लेट होती जाती है। कई लोगों का कहना है कि आधुनिक और डिजीटल इंडिया में ट्रेन के हर डिब्बे में चेन की कोई जरुरत ही नहीं है क्योंकि शिकायत के और कई साधन मौजूद हैं। चेन वहीं होनी चाहिए, जहां उसकी निगरानी में सुरक्षा कर्मचारी मौजूद होें।

रेलवे की ओर से लगातार यह प्रचार किया जा रहा है कि ट्रेन में किसी तरह की समस्या होने पर 182 नंबर पर शिकायत करें। अमृतसर मेल में 24 दिसंबर की देर रात एक मोबाइल चोरी होने की रपट बिहार आरपीएफ ने दर्ज की, वह नंबर लगातार 12 दिन चालू रहा। इसके बाद भी न तो मोबाइल का नंबर बंद किया जा सका और न ही मोबाइल बरामद किए जाने की कोई सूचना है।

हालांकि कई रेल यात्रियों का कहना है कि 182 नंबर पर शिकायत किए जाने के कुछ ही मिनटों में आरपीएफ के जवान घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं। मोबाइल चोरी की शिकायत के 10 मिनट के भीतर ही आरपीएफ ने पहुंच कर इसे साबित भी किया। इसके साथ ही लोगों का कहना है कि ट्रेन के डिब्बे में अगर कोई यात्री शराब-सिगरेट पीकर लोगों को परेशान करता है या महिलाओं से बदसलूकी करने की कोशिश करता है तो ऐसे लोगों को तुरंत इस नंबर की मदद से काबू में किया जा सकता है।

चुनावी साल होने के बाद भी केंद्र सरकार की ओर से ऐसे संकेत दिए जा रहे हैं कि इस साल भी राज्य के लोगों के भाग्य में नई ट्रेनों के चलने की उम्मीद कम है। ऐसे में ट्रेनों की रफ्तार और ढांचागत विकास पर जोर दिया जा सकता है। ऐसे में बजट से पहले ज्यादातर रेल यात्रियों की मांग है कि ढांचागत विकास के तहत अमृतसर मेल जैसी पुरानी और महत्वपूर्ण ट्रेनों की साफ-सफाई, समय पर चलने की व्यवस्था करने के साथ ही रद्द ट्रेन के यात्रियों को कुछ घंटे के दौरान दूसरी ट्रेन से उसी टिकट पर आरक्षण की सुविधा प्रदान करने के साथ ज्यादा से ज्यादा जनरल डिब्बों की व्यवस्था की जाए। कुछ लोगों का तो कहना है कि ऐसी ट्रेनों में एक एसी और एक स्लीपर श्रेणी का डिब्बा कम करके जनरल डिब्बों को जोड़ा जा सकता है।

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