चुनाव के कारण प्रधानमंत्री में जगा सुभाष प्रेम - फारवर्ड ब्लाक



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 06 जनवरी 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

लोकसभा चुनाव के पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति लोगों की भावनाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भुनाना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने नेताजी को लेकर कई तरह के कार्यक्रम का एलान किया है, लेकिन नेताजी के आदर्श और उनकी भावनाओं को तिलाजंलि देकर उनकी सरकार और भाजपा सारे देश को अस्थिर करने में लगी हुई है। इसलिए मोदी और भाजपा के ‘छद्म सुभाष प्रेम’ को बंगाल के लोगों के सामने रखने के लिए फारवर्ड ब्लाक की ओर से आगामी 11 जनवरी से राज्य भर में अभियान शुरू किया जा रहा है। नेताजी भावना यात्रा नामक यह कार्यक्रम 21 जनवरी तक जारी रहेगा। इस दौरान राज्य के एक हिस्से से लेकर दूसरे हिस्से तक पदयात्रा करते हुए अभियान चलाया जाएगा। दल की राज्य कमेटी के अध्यक्ष बरुण मुखर्जी और सचिव नरेन चटर्जी ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी।

फारवर्ड ब्लाक के नेताओं का कहना है कि हाल में अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेताजी के प्रेम में मशगुल हो गए हैं। आजाद हिंद सरकार की स्थापना के 75वें साल की पूर्ति के मौके पर लाल किले पर झंडा फहराया है। इसके बाद अंडमान जाकर नेताजी की याद में स्मारक -मुद्रा और तीन द्वीप के नाम परिवर्तन का भी एलान किया है। लेकिन हमारा सवाल है कि साढ़े चार साल तक सत्ता में रहने के दौरान उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया, अचानक यह प्रेम कैसे जग गया? इसके पहले उन्होंने या उनके दल के किसी नेता ने इस तरह का प्रेम जाहिर नहीं किया था। सबसे बड़ी बात यह है कि नेताजी धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति थे। धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले व्यापारियों के खिलाफ उन्होंने तब ही लिखित तौर पर देशवासियों को सतर्क किया था। इसके साथ ही वे देश को सिर्फ ब्रिटिश साम्राज्यवाद से मुक्त ही करवाना नहीं चाहते थे, उसके बाद देश के लोगों के विकास के मद्देनजर योजना कमिशन और पंच वर्षीय योजना के बारे में पहले से सोच रखा था। लेकिन मोदी ने सत्ता में आते ही सुभाष चंद्र बोस के ‘योजना आयोग’ को ही समाप्त कर दिया। कार्पोरेट पूंजी को वे और ज्यादा तेजी से जकड़ कर बैठे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि देश की हवाओं में सांप्रदायिकता का जहर घोल रहे हैं। नेताजी के विचार के साथ इनका कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने कहा कि 23 जनवरी को नेताजी के जन्मदिवस को देश प्रेम दिवस के तौर पर मनाए जाने की मांग के बारे में भी उन्होंने कोई कोशिश नहीं की है। इसलिए नेताजी को लेकर उनकी अति सक्रियता ‘अति भक्ति चोरों का लक्षण’ के अलावा कुछ और नहीं है। यह पूरी तरह से नाटक ही है।

उन्होंने बताया कि राज्य के लोगों के सामने मोदी-भाजपा की दोहरी नीति का मुखौटा खोलने के लिए फारवर्ड ब्लाक 11 जनवरी से अलीपुरदुआर से पहली ‘नेताजी भावना यात्रा’ शुरू कर रहा है। इसके बाद 13 जनवरी को यह यात्रा आसनसोल से और 16 जनवरी को बीरभूम से निकलेगी। तीनों यात्राएं विभिन्न जिलों की परिक्रमा करते हुए 21 जनवरी को कोलकाता स्थित एलगिन रोड पहुंचेगी। 23 जनवरी को राज्य में भी ‘देशप्रेम दिवस’ के तौर पर मनाया जाए, इसके लिए वाममोर्चा और इसके सहयोगी दलों की ओर से जल्द ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखा जाएगा।





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