काशी मंथन द्वारा 'कॉन्क्लेव ऑन लीडरशिप - एज वी सी इट' विषयक लीडरशिप पर संगोष्ठी का आयोजन



वाराणसी, 11 जनवरी 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह में काशी मंथन द्वारा 'कॉन्क्लेव ऑन लीडरशिप - एज वी सी इट' विषयक लीडरशिप पर संगोष्ठी का आयोजन गुरुवार 10 जनवरी को किया गया। इस कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, रामकृष्ण मिशन-वाराणसी के अध्यक्ष स्वामी वरिष्ठानंद, कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं पूर्व जीओसी 15 कॉर्प लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन एवं भारतीय पुरुष हॉकी टीम के मुख्य कोच हरेंद्र सिंह वक्ता के रूप में मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो• दिनेश चंद राय ने सभी का स्वागत किया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्वाइंट रजिस्ट्रार मयंक नारायण सिंह ने काशी मंथन का उद्देश्य एवं कार्यक्रम प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए बताया कि काशी मंथन का उद्देश्य आम जन मानस के अवचेतन को देश के सांविक हितो सहित उनके अंदर के नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि हम कुछ भी करें, लेकिन हम सबको तिरंगे को सर्वोपरि रखना चाहिये।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में रामकृष्ण मिशन के अध्यक्ष स्वामी वरिष्ठानंद ने अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि लीडरशिप केवल राजनीति क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, लीडरशिप हर क्षेत्र में जरूरी है। व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में लीडर बन सकता है। स्वामी जी ने कहा की एक अच्छा लीडर बनने के लिए आपका शरीर स्वस्थ एवं ताकतवर होना चाहिए। उन्होंने स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि इस देश के युवा को स्वामी विवेकानंद के जीवन को पढ़ना चाहिए।

उसके उपरांत भारतीय पुरुष हॉकी टीम के मुख्य कोच हरेंद्र सिंह ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हर इंसान एक लीडर होता है। इस देश में लोग दूसरे को देख कर उसके फॉलोवर बनने की कोशिश करते हैं लेकिन अपने अंदर झांक कर नहीं देखते। अगर मनुष्य अपने अंदर झांक कर अपनी ताकत को पहचाने और उसी क्षेत्र में आगे बढ़े तो हर व्यक्ति कामयाबी की नई बुलंदियों को छू सकता है। हरेंद्र सिंह ने सभा को बताया कि कैसे मेजर ध्यानचंद खेल के प्रति समर्पित थे और कैसे उन्होंने बर्लिन ओलंपिक में जर्मनी की धरती पर अपना पहला प्रैक्टिस मैच हारने के बाद टीम को आगे बढ़ कर अपने प्रयासों से नेतृत्व दिया और हिटलर के सामने जर्मनी की टीम को हरा कर देश का मान ऊंचा किया।

इसके बाद कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं पूर्व जीओसी 15 कॉर्प लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने अपने विचार रखे। उन्होंने सभागार में मौजूद सभी युवाओं को यह कह कर प्रेरित किया कि हमें अपने क्षेत्र में निपुण बनना चाहिए। उन्होंने यह कहा कि हमें छोटी-छोटी चीजों को सीखना समझना चाहिए और ऐसा करने से हम पूर्ण रूप से उस चीज को जान जाएंगे। उन्होंने भारतीय सेना और लीडरशिप से जुड़े अपने तमाम अनुभवों को साझा किया।

कार्यक्रम के अंत में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज मैं आप सबके सामने खड़ा हूं यह मौका मुझे इसी विश्वविद्यालय ने दिया है। अपने स्नातक और परास्नातक के समय को याद करते हुए हरिवंश ने कहा कि मालवीय जी की इस पावन भूमि पर मैंने अपने जीवन के स्वर्णिम पल बिताए और मैंने यहां से बहुत कुछ सीखा। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में मौलिक एवं नैतिक मूल्यों का बहुत महत्व है। व्यक्ति के जीवन में साहित्य उसकी बहुत मदद करता है, जब कभी किसी व्यक्ति को यह महसूस हो कि वह अकेला है और उसे कुछ सीखना समझना है तो उसे साहित्य पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा की 2014 के उपरांत लिये गए जनहित में लिए गए नेतृत्व के निर्णयों से देश की आय में काफी बढ़ोतरी हुई है जिससे देश हित के कार्य किये जा सकते हैं। यह दर्शाता है कि नेतृत्व कठोर निर्णय लेने से चुकता नहीं यदि वह निर्णय राष्ट्रहित में हो। यह बदलाव 2014 से देखने में आया है। उन्होंने मनुष्य की इच्छाशक्ति की ताकत पर भी बल दिया और कहा कि इससे मनुष्य सब कुछ कर सकता है। लीडरशिप के विषय में अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को किसी भी चीज के बारे में एक संकल्प ले लेना चाहिए और उसे पूरा करने में जुट जाना चाहिए। मालवीय जी एवं उनके मूल्यों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि हम सभी को उनके सिखाये रास्ते पर चलना चाहिए। उन्होंने गांधी का स्मरण करते हुए कहा कि सही काम को सही तरीके से करना चाहिए। गलत तरीके से अर्जित आय गलत विचार उत्पन्न करती है और यह हमारे नाश का कारण बनती है। उन्होंने सभी श्रोताओं को यह कहा कि बिना श्रम और मेहनत के कुछ नहीं होता। हमें किसी भी कार्य को करने के लिए संकल्प लेना चाहिए और सही इच्छाशक्ति के साथ उस काम को करना चाहिए।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थियों सहित बीएचयू के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रो• विवेक सिंह, प्रो• अभिमन्यु सिंह, डॉ• नेहा पाण्डेय, डॉ• पंकज सिंह, डॉ• हेमंत गुप्ता, डॉ• मोनिका गुप्ता, डॉ• प्रवीण राणा, डॉ• धीरेन्द्र राय, डॉ• नेहा पाण्डेय, डॉ• अमर सिंह, प्रो• कल्याण घडेई, डॉ• सुप्रिया शाह आदि मौजूद रहे। इस अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन डॉ• सुमिल तिवारी ने दिया। कार्यक्रम का संचालन चंद्राली मुखर्जी ने किया।





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