बंगाल में भी जमकर बेचा जा रहा है गो मूत्र



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 08 फरवरी 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

गो मूत्र की कीमत दूध से ज्यादा है और कोलकाता में भी यह महंगी कीमत में बिक रहा है। इतना ही नहीं बीते कुछ सालों के दौरान इसमें पांच गुणा की वृद्धि हुई बताई जाती है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में भले ही गोमूत्र में किसी भी रोग प्रतिरोधक गुण के दावे को स्वीकार नहीं किया गया है, लेकिन गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की राह पर चलते हुए बीते तीन-चार साल में कोलकाता में इसकी बिक्री में रिकार्ड वृद्धि हुई है।

सूत्रों ने बताया कि कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल में कई जगह गोमूत्र चिकित्सा क्लिनिक चल रहे हैं। गोमूत्र कैप्सुल, डिस्टिल्ड और मेडिकेटेड गोमूत्र की जमकर बिक्री की जा रही है। नेशनल मेडिकल कालेज फार्मोलाजी के अध्यापक सपन जाना का कहना है कि कुल मिलाकर बकवास है, पेड़-पौधों से तो रासायनिक तत्व निकलते हैं, जिससे दवाएं तैयार की जा सकती हैं। उनके कायनेटिक्सस और डायनामिक्स रहता है, लेकिन ऐसा कुछ गोमूत्र में नहीं होता।

गो मूत्र से मरीजों को फायदा होता है या नहीं होता, यह तो विवाद व चर्चा का विषय है। लेकिन महानगर के कई एजेंट दूसरे राज्यों से यहां गो मूत्र लाकर जमकर कारोबार करने में जुटे हुए हैं। ऐसे ही एक एजेंट का कहना है कि बीते कुछ सालों के दौरान गो मूत्र की मांग पांच गुणा बढ़ गई है। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल में महीने में करीब 10 हजार लीटर गो मूत्र की बिक्री होती है। हालांकि यहां गोमूत्र का मांग के मुताबिक नहीं होने के कारण हमलोग नागपुर से इसे मंगवाते हैं। उनका कहना है कि नागपुर से दूध मंगवाकर हम 150 रुपए किलो की दर से बेचते हैं, जबकि गो मूत्र 350 रुपए किलो की दर से बिकता है।

मालूम हो कि महानगर में आम तौर पर दूध 40-50 रुपए किलो की दर से बिकता है। लेकिन गोमूत्र आम तौर पर दूध से तीन गुणा ज्यादा कीमत पर बिकता है। बताया जाता है कि नागपुर के जिस गो विज्ञान अनुसंधान केंद्र से गोमूत्र और दूध मंगवाया जाता है, वह आरएसएस संचालित संस्था है। देश भर में उनकी 500 गौशाला हैं। बताया जाता है कि संस्था ने पश्चिम बंगाल में भी 16 जगह गोशाला चालू कर दी है।

महानगर की एक और संस्था की राज्य में पांच गौशालाएं हैं। बताया जाता है कि हर साल इनके गोमूत्र की बिक्री में 20 से लेकर 25 फीसद तक वृद्धि होती है। कोलकाता में करीब तीन हजार लीटर गो मूत्र बेचा जाता है और एक लीटर गो मूत्र की कीमत 175 रुपए है। जबकि यह संस्था 50 रुपए प्रति लीटर में दूध बेचती है। जबकि मेडिकेटेड गोमूत्र 210 रुपए लीटर बिकता है।

पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक मार्क्सवाद का शासन रहा है। ऐसे में गोमूत्र की बिक्री में लगातार हो रही वृद्धि क्या दर्शाती है? समाजशास्त्र के अध्यापक अभिजीत मित्र का कहना है कि राज्य में हिंदी भाषी लोगों की संख्या में वृद्धि, मल्टीरेसियल सोसाइटी के कारण गणेश पूजा, धनतेरस, शादी में मेहंदी लगाने की धूम देखी जा सकती है। इसी तरह गोमूत्र भी लोगों की खरीद में शामिल हो रहा है।





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