---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 18 फरवरी 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर•एस•एस•) पुलवामा हमले के मुद्दे पर पूरे देश में दंगे भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संघ, विहिप व भाजपा सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का प्रयास कर रही है। राज्य के बेहाला, वनगांव व श्रीरामपुर में ऐसी घटनाएं हुई हैं।
ममता ने कहा कि लोकसभा चुनाव नजदीक आने पर हवा में युद्ध की बातें तैर रही हैं। संघ व विहिप झूठी खबरें फैला रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि इन संगठनों को कहां से सहायता मिल रही है। रात को 12-1 बजे संघ व बाजपा के कुछ लोग हाथों में झंडे लेकर सड़कों पर उतर कर आतंक फैला रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि लोगों की भावनाएं भड़का कर दंगा फैलाने का प्रयास चल रहा है। ऐसी हरकतों को देख कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि राजनीति के नाम पर दंगे बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने पुलिस को ऐसे मामलों में जीरो टालरेंस की नीति अपनाने का निर्देश दिया है। तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने पुलिस को ऐसे मामलों से कड़ाई से निपटने का निर्देश दिया है। आतंकवादियों का कोई धर्म, जाति या राजनीतिक आदर्श नहीं होता। ममता ने सवाल किया कि क्या अमेरिकी खुफिया विभाग की वह रिपोर्ट सही है कि भारत में चुनावों से पहले दंगे भड़काने की कोशिश हो सकती है?
पुलवामा की घटना पर केंद्र की भूमिका को लेकर गहरा असंतोष जताते हुए मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि पहले से हमले की सूचना होने के बावजूद सुरक्षा के उपाय क्यों नहीं किए गए? सीआरपीएफ ने जवानों को हवाई मार्ग से भेजने का अनुरोध किया था। लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया गया? तमाम मदों में इतनी रकम खर्च होती है। पहले से हमले की सूचना होने के बावजूद उनको हवाई मार्ग से क्यों नहीं भेजा गया? इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए ममता ने इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच की भी वकालत की। उन्होंने पुलवामा की घटना के बाद केंद्र से कड़े कदम उठाने की अपील की।
॥■॥ कश्मीरी डाक्टर का दावा-शहर छोड़ने की धमकी मिली
कोलकाता में 22 साल से रहने वाले एक कश्मीरी डाक्टर ने दावा किया है कि पुलवामा हमले के बाद उसे महानगर छोड़ने या गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी मिली है। लेकिन राज्य सरकार के उसके बचाव में आने के बाद उसने यहीं रहने का फैसला किया है। डाक्टर ने अफना नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि पुलवामा की घटना के बाद उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया और धमकियां मिलीं। शुरुआत में उसने इन धमकियों को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन कुछ लोगों ने उसके घर के बाहर जमा होकर धमकाया कि अगर वह पाकिस्तान नहीं लौटा तो उसकी पुत्री को नुकसान पहुंचाया जाएगा। डाक्टर ने बताया कि पुलवामा हमले के अगले दिन 15 फरवरी को 20 से 25 साल की उम्र के पांच लोग उसके घर पहुंचे। उस समय वह अपने चैंबर से लौटे ही थे। उन लोगों ने डाक्टर को फौरन शहर छोड़ने की धमकी दी और कहा कि कश्मीरियों के लिए कोई जगह नहीं है। वह तुरंत पाकिस्तान चला जाए। उन्होंने धमकी दी कि अगर उसने ऐसा नहीं किया तो उसकी पुत्री को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
डाक्टर ने कहा कि धमकी की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उसने कोलकाता छोड़ने का मन बना लिया था। लेकिन इससे पहले उसने राज्य सरकार से मदद मांगने का फैसला किया। उसने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस घठना की सूचना दी। डाक्टर ने मुख्यमंत्री के फेसबुक पेज पर भी एक संदेश पोस्ट किया। उसके अगले दिन ही उसे राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने फोन किया। आयोग के अधिकारियों ने उसे हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। आयोग की अध्यक्ष अनन्या चक्रवर्ती ने बताया कि डाक्टर के परिवार की सुरक्षा के लिए तमाम ऐहतियाती उपाय किए गए हैं ताकि उसे कोई दिक्कत नहीं हो। डाक्टर के परिवार को चौबीसों घंटे पुलिस सुरक्षा मुहैया करा दी गई है। इसके अलावा नजदीकी थाने के अधिकारी भी उस पर लगातार नजर रख रहे हैं।
डाक्टर ने पत्रकारों को बताया कि शुरुआत में धमकियां मिलने के बाद उसने कश्मीर लौटने का फैसला किया था। लेकिन पड़ोसियों और प्रशासन का सहयोग मिलने के बाद उसने यहीं रहने का फैसला किया है। उसका कहना है कि कोलकाता में उसे जैसा प्यार व सम्मान मिला है उसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती।