खबरें विशेष : पश्चिम बंगाल से



---रंजीत लुधियानवी, 22 फरवरी 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥■॥ गुमनामी बाबा की फाइलों को सार्वजनिक करनेके लिए नेताजी के परिवार ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

गुमनामी बाबा के साथ नेताजी का कोई संबंध नहीं था लेकिन भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं कि वे ही वास्तव में नेताजी थे।

नेताजी सुभाष चंद्र बसु के परिवार के कई सदस्यों ने विवादित चरित्र गुमनामी बाबा के बारे में देश के खुफिया विभाग से मांग की है कि संबंधित गुप्त जानकारी सार्वजनिक की जाए। इस बारे में परिवार की ओर से सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सख्त चिट्ठी लिखी गई है। नेताजी के परिवार के सदस्यों का साफ तौर पर कहना है कि गुमनामी बाबा नामक जिस अदृश्य चरित्र का नाम नेताजी के साथ जोड़ कर घटिया षडयंत्र शुरू किया गया है। किताब लिख कर या फिल्म बना कर इस विवाद को उकसाया जा रहा है। इसलिए उनका कहना है कि विवाद को समाप्त करने के लिए गुमनामी बाबा से संबंधित खुफिया फाइल लोकसभा चुनाव के पहले ही सरकार सार्वजनिक करे। ऐसा नहीं किया गया तो नेताजी का परिवार खामोश बैठ कर नहीं रहेगा।

नेताजी परिवार के कई वरिष्ठ पुरुष और महिला सदस्यों ने इस बारे में पत्रकारों से बातचीत की। परिवार की ओर से नेताजी के रिश्ते के नाती चंद्र कुमार बसु ने चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में पर्दे में रहने वाले गुमनामी बाबा को किसी ने देखा हो, ऐसी जानकारी नहीं मिलती है। 1985 में इस विवादित व्यक्ति की मौत के बाद नेताजी को लेकर नया वितर्क शुरू हुआ। हालांकि नेताजी के गायब होने के मामले की जांच करने के लिए गठित मुखर्जी कमिशन ने गुमनामी बाबा के साथ नेताजी के किसी तरह से मेल को खारिज किया है। कमिशन के निर्देश पर गुमनामी बाबा के डेरे से बरामद दांत के डीएनए की जांच के लिए बसु परिवार के कई सदस्यों का रक्त लिया गया। यह रिपोर्ट भी नकारात्मक मिली। बाद में इलाहाबाद हाइकोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक जांच आयोग का गठन किया था। लेकिन उस आयोग की रिपोर्ट जारी नहीं की गई। कहा जा रहा है कि वह रिपोर्ट फिलहाल केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है। उनका कहना है कि हम लोगों ने जहां तक सुना है आयोग की उस रिपोर्ट में भी नेताजी और गुमनामी बाबा के बारे में ऐसा कोई संपर्क नहीं बताया गया है।

उन्होंने कहा कि सुना गया है कि गुमनामी बाबा के साथ इंदिरा गांधी, प्रणव मुखर्जी जैसे महत्वपूर्ण लोगों ने मुलाकात की थी। अगर ऐसा है तब 30 साल तक परदे के पीछे रहने वाले गुमनामी बाबा के बारे में केंद्रीय और उत्तर प्रदेश की खुफिया विभाग की गोपनीय फाइल में जानकारी तो रहेगी ही। इसलिए हमारी मांग है कि दुष्प्रचार और षडयंत्र को बंद करने के लिए गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किया जाना जरूरी है।


॥■॥ कोलकाता पुलिस ने भेजा सीबीआइ के संयुक्त निदेशक को समन

कोलकाता पुलिस ने बीते महीने दर्ज एक मामले के सिलसिले में सीबीआइ के संयुक्त निदेशक पंकज श्रीवास्तव को समन भेज कर महानगर के भवानीपुर थाने के जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने को कहा है। कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यहां बताया कि श्रीवास्तव को बीते महीने दर्ज मामले की जांच के सिलसिले में सात दिनों के भीतर जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने को कहा गया है। उनको उक्त समन वृहस्पतिवार को भोजा गया। तब श्रीवास्तव दफ्तर में नहीं थे।

वैभव खट्टर नामक एक व्यक्ति ने भवानीपुर थाने में दर्ज अपनी शिकायत में सीबीआइ के खिलाफ एक ऐसे मामले में अवैध रूप से हिरासत में लेने और टार्चर करने का आरोप लगाया है जिससे उसका कोई लेना-देना नहीं था। दूसरी ओर, सीबीआइ के एक अधिकारी ने कोलकाता पुलिस की ओर से ऐसा कोई समन भेजे जाने से इंकार किया है। उसका कहना था कि एजंसी को कोलकाता पुलिस की ओर से कोई समन नहीं मिला है। इस बारे में श्रीवास्तव ने अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है।

ध्यान रहे कि बिहार में नब्बे के दशक में करोड़ों के चारा घोटाले में एक स्थानीय मिल मालिक दीपेश चांडक की कथित भागीदारी की जांच के सिलसिले में सीबीआइ ने बीते साल अगस्त में मिल के कर्मचारी खट्टर के घर छापा मारा था। अब कोलकाता पुलिस की ओर से यह समन ऐसे समय भेजा गया है जब सारदा घोटाले के सिलसिले में पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ के मुद्दे पर पुलिस और इस जांच एजेंसी के बीच टकराव हो चुका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के धरने पर बैठने की वजह से इस मुद्दे पर केंद्र व राज्य आमने-सामने आ गए थे।

॥■॥ लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट देंगे मुस्लिम मतदाता

भाजपा को मुसलमानों के वोट मिल रहे हैं। भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अली हुसैन का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव में राज्य में दल को खासे मुस्लिम वोट मिलेंगे। भाजपा नेता का मानना है कि पश्चिम बंगाल के मुस्लिम मतदाता तीन या चार राजनीतिक दलों में बंटे हुए हैं। इसका एक हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को पसंद करता है। करीब 50 हजार मुसलमानों ने छिट महल के बारे में भारत और बांग्लादेश के बीच हुए समझौते का समर्थन किया था।

उन्होंने कहा कि कूचबिहार में 24 फीसद मुसलमान हैं और इसका एक बड़ा हिस्सा भाजपा के लिए काम कर रहा है। कूचबिहार लोकसभा सीट जीतने के लिए भाजपा के काफी अच्छे आसार हैं। इसके साथ ही भाजपा उत्तर बंगाल में अंग्रेज बाजार से लेकर मालदा और तूफानगंड तक मजबूत स्थिति में है।

उन्होंने कहा कि मैं भाजपा के नेताओं के साथ मुस्लिमों के मुद्दों पर खुलकर बात करता हूं। हम मुस्लिम लोगों के अपने विचार हैं और दल में उसे प्रकट करना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह लोगों को मालूम होना चाहिए कि सभी आतंकवादी मुसलमान नहीं होते और सभी आतंकवादी मुसलमान नहीं होते। मुझे खुशी है कि भाजपा नेताओं ने भी मुसलमानों के बारे में अपने विचार बदल डाले हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान मतदाता किसी भी सीट पर उम्मीदवार को जीताने और हराने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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