बीएचयू का बजा यूरोप में डंका, बर्लिन में भी "फिर वही दिन"



--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।

☆ 13 अक्टूबर को स्वीडन के स्टॉकहोम एवं कार्लस्टड में भी होगा लोकार्पण

☆ अल्फ्रेड नोबेल के घर में भेंट होगी फिल्म की डीवीडी

काशी हिंदू विश्वविद्यालय चिकित्सा विज्ञान संस्थान का सर सुंदरलाल अस्पताल मरीजों की सेवा के क्षेत्र में वैश्विक रुख कर लिया है। मरीजों के हितों और जागरुकता के किए कार्यों का डंका यूरोपियन देश बर्लिन में भी बजने लगा है। सवावे की ओर से बर्लिन के प्रसिद्ध फाइअर कक्ष के 30वें मंजिल पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय न्यूरोलॉजी सेमिनार में लकवा जनजागरुकता पर निर्मित विश्व की पहली फिचर फिल्म "फिर वही दिन" का लोकार्पण हुआ। खचाखच भरे आडिटोरियम में दुनिया के ख्यातिलब्ध न्यूरोलॉजिस्ट, मनोचिकित्सक, बीएचयू सर सुंदरलाल चिकित्सालय के अधीक्षक डॉक्टर ओ• पी• उपाध्याय एवं फिल्म के प्रणेता प्रो• विजयनाथ मिश्रा मौजूद रहे।

कई देशों से जुटे चिकित्सकों ने बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग द्वारा निर्मित लकवा को समर्पित 'फिर वही दिन' फिल्म की खुले कंठ से सराहना की। चिकित्सकों ने फिल्म को मरीजों के लिए उपयोगी बताया और कहा कि फिल्म के संदेश को दूरतलक पहुँचाने में सरकारों को भी आगे आना चाहिए।

गौरतलब है कि 13 अक्टूबर को स्वीडन के स्टॉकहोम एवं कार्लस्टड में भी फिल्म का लोकार्पण होगा। इसके बाद 14 अक्टूबर को स्वीडन के स्टॉकहोम में फिल्म की एक कॉपी एल्फ्रेड नोबेल के घर पर बने संग्रहालय में भी भेट की जाएगी। ज्ञात हो कि विश्व के इस महान वैज्ञानिक की मौत भी लकवे से हुई थी। गौरतलब है कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के न्यूरोलाजी विभाग एवं नवदृष्टि विभूति फाउंडेशन की ओर से ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन लकवा जनजागरण के तहत लकवा रोग के प्रति समाज में फैले भ्रांति को दूर करने के उद्देश्य से "फिर वही दिन" फिल्म का निर्माण किया गया है। लकवा रोग जनजागरुकता पर भारत में निर्मित यह विश्व की पहली फिल्म है। फिल्म की परिकल्पना एवं शोध बीएचयू न्यूरोलाजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो• वी• एन• मिश्र एवं प्रख्यात फिल्म निर्माता नरेन्द्र आचार्य के निर्देशन में फिल्म का फिल्मांकन वाराणसी और आसपास के दर्शनीय एवं ऐतिहासिक स्थलों पर किया गया है। फिल्म का प्रीमियर शो आईपी माल सिगरा, वाराणसी में गांधी जयंती के अवसर पर गत 2 अक्टूबर को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो• बी• एम• शुक्ल के मुख्य आतिथ्य एवं संकटमोचन के महंत प्रो• विश्वम्भरनाथ मिश्र की अध्यक्षता में लोकार्पण हुआ था।

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