मोदी ने कब कहा हवाई हमले में 300 लोग मरे : आहलुवालिया



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 03 मार्च 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

पाकिस्तान में आतंकी शिविरों पर हवाई हमले के केंद्र के दावों पर विरोधी दलों की ओर से सबूत की मांग की जा रही है। पूछा जा रहा है कि बताया जाए कि वहां कितने लोगों की मौत हुई थी। मालूम हो कि विदेशी मीडिया के मुताबिक वहां किसी की मौत नहीं हुई थी। शनिवार को एक अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक वहां महज एक कौवा मरा देखा गया था, एक वृद्ध वहां चोटिल हुआ था।

विपक्ष की मांग के बीच केंद्रीय मंत्री एस• एस• आहलुवालिया ने कहा है कि इन हमलों का मकसद लोगों की जान लेना नहीं बल्कि यह संदेश देना था कि भारत दुश्मन की सीमा के भीतर घुस कर मारने में सक्षम है। आहलुवालिया ने कहा कि न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न ही किसी सरकारी प्रवक्ता ने हवाई हमले में मरने वालों की कोई तादाद बताई है। उन्होंने कहा कि भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया में ही मरने वाले आतंकियों का अपुष्ट आंकड़ा बताया जा रहा है।

दार्जिलिंग के भाजपा सांसद व केंद्रीय इलेक्ट्रानिक्स व सूचना तकनीक राज्य मंत्री ने सिलीगुड़ी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने भारतीय व अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छपी रिपोर्ट्स भी देखी हैं और यह भी सुना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्या कहा है। हवाई हमलों के बाद ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक रैली थी। लेकिन उसमें उन्होंने मरने वालों के आंकड़ों के बारे में कुछ नहीं कहा था। आहलुवालिया ने सवाल किया कि क्या मोदी जी, किसी सरकारी प्रवक्ता या भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मृतकों का कोई आंकड़ा दिया है? उन्होंने कहा कि उक्त हवाई हमले का मकसद यह संदेश देना था कि जरूरत पड़ने पर भारत पाकिस्तान के घर में घुस कर हमला करने में सक्षम है। हम इंसानी जान नहीं लेना चाहते थे।

माकपा ने आहुलवालिया की उक्त टिप्पणी के वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया है कि क्या सरकार पाकिस्तान में आतंकी शिविरों को खत्म करने के अपने दावे से पीछे हट रही है?

लेकिन आहलुवालिया अपने बयान पर कायम हैं। उनका कहना है कि सरकार या किसी मंत्री ने मृतकों की तादाद के बारे में कुछ नहीं कहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों से उनसे सवाल किया था कि क्या वे सरकार के बयान या मीडिया की उन रिपोर्ट्स का समर्थन करते हैं जिनमें तीन से साढ़े तीन सौ आतंकवादियों के मरने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि वे सरकार के बयान के साथ हैं। आखिर वे मीडिया की रिपोर्ट का समर्थन कैसे कर सकते हैं?

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