बंगाल : कन्याश्री के मुकाबले पिछड़ गई सुकन्या समृद्धि योजना



---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 06 मार्च 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लड़कियों की शिक्षा और आर्थिक तौर पर उन्हें समृद्ध करने के लिए जोरशोर के साथ सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत की गई थी। इस बारे में जमकर विज्ञापनबाजी भी की गई जिसका असर रहा कि लोगों ने उत्साह में परियोजना के तहत खाते खुलवाने शुरू किए। लेकिन बाद में जब लोगों को पता चला कि इसमें सरकार की ओर से कुछ खास मिलने वाला नहीं है और लघु बचत राशि पर ब्याज की दर भी कम होने लगी, लोगों का उत्साह काफूर होने लगा। मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही तक के आंकड़ों से यह पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में यह खाता चलाने में लोगों में उत्साह नहीं रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक लघु बचत योजनाओं में जहां बीते साल पश्चिम बंगाल देश में पहले नंबर पर रहा है, वहीं सुकन्या समृद्धि योजना में वह छठवें स्थान पर है। रकम जमा करने की बात हो या खाता चालू रखने की बात, दोनों जगह पांच राज्य बंगाल के आगे हैं। ज्यादातर लोगों का कहना है कि कन्याओं की आर्थिक मदद के तौर पर शुरू की गई परियोजना में एक तो व्यक्ति को अपनी रकम जमा करनी पड़ती है, दूसरे इसका लाकिंग पीरियड रहता है लोग पैसे निकाल नहीं सकते। तीसरे ब्याज दर में लगातार कमी की जाती रही है। पहले लोगों को लगा था कि केंद्र की ओर से भी खाते में रकम जमा की जाएगी।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लड़कियों के लिए कन्याश्री परियोजना चालू की है। इसमें लड़की के परिवार वालों को एक पैसा भी निवेश करने की जरुरत नहीं है। राज्य सरकार की ओर से तय समय पर लड़की के बैंक खाते में पैसे भेज दिए जाते हैं। इसके साथ ही कान की बालियां समेत दूसरे गहने भी लड़कियों को प्रदान किए गए हैं। जब बगैर कोई रकम जमा करवाए लड़की के बैंक खाते में सरकार की ओर से पैसे आने लगें, तब कोई व्यक्ति अपनी जमा पूंजी सालों तक महज कुछ फीसद ब्याज के लिए क्यों सरकार को देना चाहेगा?

मालूम हो कि सुकन्या समृद्धि योजना में 10 साल तक की लड़कियों का खाता बैंक या डाकघर में खोला जा सकता है। इसमें अभिभावक साल में अधिकतम डेढ़ लाख रुपए तक की राशि जमा कर सकते हैं। लेकिन साल में कम से कम एक हजार रुपए जमा करने ही होंगे, ऐसा नहीं करने पर 50 रुपए जुर्माना लगेगा। लड़की के 21 साल की होने पर ही खाते में जमा सारी राशि निकाली जा सकती है। जबकि लड़की के 18 साल की होने पर जमा राशि का 50 फीसद ही निकाला जा सकता है। इस तरह कम से कम आठ-10 साल तक लोगों को पैसे जमा रखने होंगे।

सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने लघु बचत योजनाओं में सात बार ब्याज दर में कमी की है। इसमें सुकन्या समृद्धि योजना पर भी असर पड़ा है। लघु बचत योजना के एजेंटों का कहना है कि सरकार ने शुरू से ही परियोजना में किसी तरह के कमिशन की व्यवस्था नहीं की, जिससे उन्हें भी खाते खुलवाने का उत्साह नहीं रहा। लघु बचत योजनाओं में बीते साल राज्य पहले नंबर पर था, जब 89 हजार 992 करोड़ की रकम जमा हुई थी, दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश था, लेकिन फर्क करीब 20 हजार करोड़ रुपए का था। सुकन्या योजना में लगातार ब्याज दर कम करने के बाद पिछले महीने वृद्धि की गई थी, इसके बाद भी यह 8.5 फीसद है। परियोजना शुरू होने से लेकर दिसंबत तक राज्य में 8 लाख 44 हजार 84 खाता धारकों के कुल मिलाकर 1,695 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। खाता धारकों के मामले में पहले स्थान पर तामिलनाडू में 17 लाख से ज्यादा, दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश में 16 लाख से ज्यादा खाते हैं। जबकि जमा राशि के मामले में पहले स्थान पर महाराष्ट्र में 3900 करोड़ से ज्यादा, दूसरे स्थान पर कर्नाटक में 2400 करोड़ से ज्यादा राशि जमा है।

इधर, ममता ने पहले आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्ग की लड़कियों के लिए कन्याश्री परियोजना शुरू की थी, लेकिन बाद में आर्थिक स्तर को समाप्त करके राज्य की सभी लड़कियों को इस परियोजना में शामिल कर लिया गया। जिससे 50 लाख से ज्यादा लड़कियां इस परियोजना का फायदा हासिल कर रही हैं। दूसरी ओर, सुकन्या खाता खुलवा कर फंस चुके अभिभावक साल में न्यूनतम एक हजार रुपए जमा करके किसी तरह जुर्माने से बचना ही चाहते हैं। कई लोगों का कहना है कि अगर खाता बंद करने का अवसर दिया जाए तो ज्यादातर लोग यह खाता बंद कर देंगे।

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