वाराणसी, 19 मार्च 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
काशी मंथन के संवाद कार्यक्रम में पावर ऑफ वन पर बोलते हुए मयंक नारायण सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी की यह ताकत थी की वर्ष 1893 में दक्षिण अफ्रीका की जिस ट्रेन से उन्हें उठाकर बाहर किया गया था उसी दिन उन्होंने यह प्रण कर लिया था कि अब वे रंगभेद को और सहन नहीं करेंगे। नमक कानून बनने के बाद 1930 में महात्मा गांधी मुट्ठी भर नमक के लिए अकेले ही चल पड़े। महात्मा के साथ लोग जुड़ते गए और कारवां बन गया।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ना तो कभी राज्य की मोक्ष की या धर्म की कामना की। उनके दिल में एक ही लक्ष्य था - वे स्वतंत्र भारत देखना चाहते थे।
स्वामी विवेकानंद भी युवाओं को प्रेरित किया करते थे। स्वामी जी ने युवाओं को अपनी कमजोरियों को त्याग कर अपने अंदर की शक्तियों को पहचानने की प्रेरणा दी।
आज युवाओं को अपने भीतर की सकारात्मक ऊर्जा को पहचानने की जरूरत है। इन्हीं युवाओं को एक नई ऊर्जा तथा स्फूर्ति के साथ समाज को आगे ले जाने का कार्य करना होगा।
अपने विचार के अंत में उन्होंने यह याद दिलाया कि इतिहास केवल शेरों का ही लिखा जाता है गीदड़ का नहीं।
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