आखिर लोग क्यूं करने लगे हैं आत्महत्या ? 



--- रंजीत लुधियानवी, वरिष्ठ पत्रकार, कोलकाता।

हावड़ा जिले के उलबेड़िया के एक गांव में पिछले कुछ दिनों से हर दूसरे या तीसरे दिन कोई ना कोई खुदकुशी की कोशिश करता है। अपनी जाने देने वाला बच्चे से लेकर बूढ़ा तक कोई भी हो सकता है। उलबेड़िया के उस गांव में जिस तरह रोज-रोज आत्महत्या की कोशिश होती है, उससे पूरा गांव आतंकित है। लोग भयभीत हैं। गांववालों का मानना है कि इसके पीछे भूत-प्रेत का हाथ है। हालांकि, भूत-प्रेत जैसी कोई चीज नहीं होती। यह सिलसिला गांव में तीन लोगों की रहस्यमय हालत में हुई मौत के बाद शुरू हुआ।

सूत्रों ने बताया कि जिस तरह से यहां के लोग जान देने पर आमादा लग रहे हैं, उससे पूरा गांव चिंतित है। यह गांव शहर से बहुत करीब है। लिहाजा यहां ऐसी घटनाओं से हर कोई हैरान है। इसी महीने गांव में एक विवाहिता, एक बच्चे और एक अन्य निवासी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। तीनों की फंदे से झूलने के कारण मौत हुई।

सूत्रों का कहना है कि इसके बाद से गांव में कई लोगों ने जान देने की कोशिश की। यह सभी खुद को रस्सी से ही लटकाकर खत्म करने का प्रयास कर रहे थे। एक युवक को जब एक ओझा (तंत्र-मंत्र करने वाले) के पास ले जाया गया, तो उसने इसे गांव में हुई मौतों से जोड़कर देखा। खुदकशी के प्रयासों को गांव में हुई संदिग्ध मौतों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि कुछ गांववाले चाहते हैं कि साइंस फोरम के लोग यहां आए और पता लगाएं कि अचानक गांव में ऐसा क्यों हो रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हालात ऐसे हो गए हैं कि गांव के लोग अंधेरा होते ही घरों में खुद को कैद रखना चाहते हैं। घर से नहीं निकलते। पहले यहां लोग देर रात तक घरों से निकलते थे और घूमते फिरते थे। अब गांव में सन्नाटा पसरा रहता है। हालांकि डर की कोई वजह नहीं दिखती है। लोगों का कहना है कि शायद चोरों ने चोरी करने या आपराधिक गतिविधियां आसानी से करने के लिए अफवाहें फैलाई हैं, जिससे लोग घरों में कैद रहे और वे अपना काम आसानी से करते रहें। औपचारिक तौर पर पुलिस के पास इस बारे में शिकायत नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि पुलिस हालात पर नजर रखे हुए है और जल्द ही कुछ लोगों की गिरफ्तारी के बाद साजिश का पर्दाफाश हो सकता है।

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