ये कौन सा साल है! 2019, बीजेपी फिनिश : ममता बनर्जी



कोलकाता, 19 अप्रैल 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

पिछले लोक सभा चुनावों की तुलना में वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव बड़ा रोमांचकारी प्रतीत हो रहा। सभी राजनीतिक दल एक दूसरे को ठेंगा तो दिखा ही रहे है वहीं एक दूसरे की इज्जत उछालने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे। 2 से 3 घण्टों की फिल्मों में कहानी दौरान क्लाइमेक्स बदलता रहता है वहीं लगभग 2 महीने चलने वाली आम चुनाव 2019 भी क्लामेक्स पर क्लाइमेक्स ठोके जा रहा है। मजेदार बात है कि गाली-गलोज, तोड़-फोड़, डर, फाइट सीन, खूनी खेल ब्लड पॉलिटिकल का नज़ारा आम चुनाव में आम बात है। पश्चिम बंगाल इससे अछूता नहीं है। शहर तो शहर ग्रामीण अंचल बाप रे बाप। कभी कोई पेड़ पर लटका मिला, कभी कोई खून से लतपत दिखा, कभी कोई रोते रोते अपने हाथ-पैर की दुहाई देता तो कभी कोई पार्टी के झण्डे तले कूटा जाता। गनीमत है आम जनता इससे कोसो दूर हैं, राजनीतिक दलों के कार्यकर्तार्ओ पर राहु-केतु की दशा है।

हमारे पश्चिम बंगाल में मात्र दो नेताओं व दो दलों की ही विशेष चर्चा है। एक हमारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दूसरे हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। या कहें ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)। एक ओर हमारे प्रधानमंत्री समूचे देश में गरज रहे है तो वहीं हमारी मुख्यमंत्री पूरे पश्चिम बंगाल में बरस रही हैं।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व भारतीय जनता पार्टी पर आक्रामक रूख़ अपनाते हुए कहा कि भाजपा सरकार के भयंकर रूप और उसकी फासीवादी पॉलिटिक्स के खिलाफ एकमात्र पार्टी है तृणमूल कांग्रेस। हमारी पार्टी के सांसदों ने संसद के अंदर और बाहर अभी तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन दिया है। वहीं मोदी बाबू के नाम पर लोग सिनेमा बना रहे हैं, मोदी बाबू के नाम पर कोट बना रहे हैं। दुकान बना रहे हैं। अब बचा क्‍या है! अब सिर्फ जूता बनाना बाकी है और उस जूते को हम लोग पूरे भारतवर्ष में पहन कर घूमेंगे।

उन्होंने कहा कि जब ये लोग देश तोड़ेंगे, तब इनको एक वोट के लिए थप्पड़ पड़ने चाहिए। उनको एक वोट दो और पूछो कि नोटबंदी क्यों की? उन्‍हें एक वोट दो और पूछो कि बेरोजगारी क्यों फैलाई? उनसे जवाब मांगो। किसान आत्महत्या क्यों कर रहे हैं? जवाब दो। आदिवासी पर क्यों हमला करते हो? जवाब दो। देश का इतिहास भी बदल दे रहे हो, गांधीजी को भूल गए। ये कौन सा साल है! 2019 बीजेपी फिनिश।

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