बीएचयू : अब महिला प्रोफेसर के साथ हुई छेड़खानी की न्यायिक जांच



--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में छेड़खानी की घटनाओं को लेकर अब प्रशासन भी दबाव में है। गत जुलाई माह में पत्रकारिता एवं जनसंप्रेषण विभाग की दलित महिला प्रोफेसर के साथ छेड़खानी के मामले की न्यायिक जांच शनिवार से शुरु हो गया है। छेड़खानी का आरोप कला संकाय के संकाय प्रमुख पर लगाया गया है। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति कलीमुल्लाह ने शनिवार को बीएचयू के लक्ष्मण दास अतिथि गृह में बनाए गए कैंप कार्यालय दो अध्यापकों को तलब कर बयान दर्ज किया। तीसरे अध्यापक ने अपनी सुरक्षा का हवाला देते हुए जांच में हिस्सा नहीं लिया।

आयोग के सामने हाजिर होने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर डा• स्वर्ण कुमार और डा• अमिता चौधरी का अलग-अलग बयान दर्ज करने के बाद जस्टिस कलीमुल्लाह ने उनसे कई सवाल पूछे। तीसरे अध्यापक डा• ज्ञान प्रकाश मिश्र के न आने पर आयोग उन्हें फिर तलब करेगा। जांच रविवार को भी जारी रहेगी।

दलित महिला प्रोफेसर शोभना नार्लीकर ने कला संकाय के संकाय प्रमुख प्रो• कुमार पंकज पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करने के साथ ही उनके साथ छेड़खानी भी की है। शिकायत करने के बाद भी बीएचयू प्रशासन द्वारा कार्रवाई न करने पर महिला प्रोफेसर ने लंका थाने में एससी-एसटी एक्ट और छेड़खानी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। मामला गरमाने पर काफी दिनों बाद बीएचयू के कुलपति प्रो• जी• सी• त्रिपाठी ने न्यायिक जांच के लिए जस्टिस कलीमुल्लाह की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग गठित किया था।

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