--- रंजीत लुधियानवी, वरिष्ठ पत्रकार, कोलकाता।
रेलवे की ओर से बचत करने के लिए एक के बाद दूसरे तरह के खर्चों पर कटौती की जा रही है। अब ट्रेन के डिब्बों पर लगाए जाने वाले आरक्षण चार्ट को बंद किया जा रहा है। जिससे कागज की बचत के साथ चार्ट लगाने वाले व्यक्ति की जरुरत को भी खत्म किया जा सके। कई रेलवे स्टेशनों पर पहले ही चार्ट लगाने की व्यवस्था बंद कर दी गई है। इसके बजाए डिजिटल चार्ट सिस्टम वाली मशीनें लगा दी गई हैं। मशीनों में ही लोग स्थिति का जायजा ले सकते हैं।
किसी मेल या एक्सप्रेस ट्रेन के रवाना होने से पहले डिब्बों पर चार्ट लगाए जाते रहे हैं। लेकिन दक्षिण पूर्व रेलवे की ओर से सोमवार से यह प्रथा बंद की जा रही है। अब रेलगाड़ियों के डिब्बों पर चार्ट नहीं लगाए जाएंगे।
दक्षिण पूर्व रेलवे के प्रवक्ता संजय घोष ने पत्रकारों को बताया कि सोमवार 16 अक्टूबर से तय किया गया है कि ट्रेनों के डिब्बों पर आरक्षण चार्ट नहीं लगाए जाएंगे। प्राथमिक तौर पर हावड़ा स्टेशन से यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। इससे जहां ट्रेन के बाहरी हिस्से की साफ-सफाई रहेगी, वहीं कागज की बचत भी की जा सकेगी। उनका मानना है कि इसके कारण रेलवे पर्यावरण की ज्यादा सुरक्षा कर सकेगा।
मालूम हो कि दक्षिण पूर्व रेलवे की ओर से हावड़ा से पश्चिम और दक्षिण भारत के लिए ट्रेनें चलाई जाती हैं। इसमें मुंबई, चेन्नई, अमदाबाद शामिल है। आरक्षण चार्ट ट्रेन के सभी डिब्बों के दरवाजे के पास लगाए जाते रहे हैं। पहले लोग अपने आरक्षण की स्थिति, सीट का पता लगाने के लिए ट्रेन के दरवाजे के निकट लगा चार्ट देखते थे। लेकिन बदलते हुए समय में एसएमएस और इंटरनेट के व्यवहार के बाद चार्ट की उपयोगिता कम हो गई है।
रेलवे अधिकारी का कहना है कि आरक्षण के समय ट्रेन के टिकट पर ही सारा कुछ लिखा होता है, जबकि वेटिंग लिस्ट और आरएसी वाले एसएमएस के जरिए अपनी स्थिति का पता लगा लेते हैं। ट्रेन रवाना होने के चार घंटे पहले सारी स्थिति साफ हो जाती है।
इसके साथ ही विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर डिजिटल चार्ज सिस्टम लगाए गए हैं। जबकि दूसरे कई स्टेशनों पर मैनुअल बोर्ड में वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों की स्थिति का ब्यौरा दिया जाता है। इसके अलावा लोग आइवीआरएस सिस्टम के तहत 139 नंबर डायल करके फोन पर भी टिकट के बारे में ताजा स्थिति की जानकारी हासिल कर सकते हैं।