विश्व खाद्य भारत 2017 एक्सपो



☆ विश्व खाद्य भारत मंच वैश्विक खाद्य फैक्ट्री के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा और यह देश को खाद्य सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है

☆ भारत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में करीब 10 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश लक्ष्य को आकर्षित करने और अगले 3 वर्षों में 10 लाख नौकरियां पैदा करने के लिए तैयार है

☆ भारत को खाद्य सुरक्षित बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति से अपील - अपनी थाली में खाने की बर्बादी न करें

☆ नई दिल्ली में 3 से 5 नवंबर को विश्व खाद्य भारत 2017 एक्सपो आयोजित किया जाएगा

16 अक्टूबर। केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने विश्व खाद्य भारत 2017 एक्सपो, नई दिल्ली में 3 से 5 नवंबर को आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय मंच, के लिए पूर्वालोकन संवाददाता सम्मेलन की अध्यक्षता की। भारत खाद्य अर्थव्यवस्था को बदलने और किसानों की आय को दोगुना करने के लिए भारत सबसे बड़ा खाद्य आयोजन करने के लिए तैयार है, श्रीमती बादल ने इसकी भव्यता की एक झलक औद्योगिक कर्ताधर्ता, विदेशी मिशन के प्रमुखों और मीडिया को एक संवादमूलक सत्र के जरिए दी। इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति भी उपस्थित थी।

विश्व खाद्य भारत 2017 हेतु रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि भारत भोज्य पदार्थ का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक तथा दूध, फल और सब्जियों, अनाज तथा मैरीन में अग्रणी है। इसमें 127 कृषि जलवायु वाले क्षेत्रों और खाद्य आयात करने वाले देशों के निकटता के साथ बहुत बड़ी क्षमता है। भारत, 1.3 बिलियन आबादी के साथ और एक बडे खुदरा क्षेत्र जिसे 2020 तक तिहरा करने का लक्ष्य रखा गया है, के कारण एक बड़ी मांग संचालित करने वाला बाजार प्रदान करता है। उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा कि भारत सरकार “प्रधान मंत्री किसान संपदा योजना” जैसी योजनाओं के माध्यम से सही बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रही है जो खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए एवं सभी सक्षम हितधारकों हेतु एक सक्षम वातावरण और एक नवीन संस्कृति का विकास करने की दिशा में काम कर रही है। विश्व खाद्य भारत 2017 इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता एवं नेतृत्व का धन्यवाद देते हुए श्रीमती बादल ने कहा कि सरकार पूरे देश में खाद्य संरक्षा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से, जिसमें विभिन्न देशों के बेहतरीन बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन किया जायेगा, जो भारत में खाद्य उद्योग की चुनौतियों के लिए प्रभावी समाधान खोजने में भी मदद करेगा जिसके अंतर्गत खाद्य अपव्यय से लेकर जलवायु की वजह से फसलों का अपव्यय शामिल होंगे। श्रीमती बादल ने आगे कहा कि इससे भारतीय किसानों को पर्यावरण के कारकों और बाजार के साथ सीधे संपर्क की कमी से भी पार पाने में काफी हद तक मदद मिलेगी। इस कार्यक्रम के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में भारत की क्षमता का पता चलेगा। विश्व खाद्य भारत 2017 की जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में लगभग 10 बिलियन अमरीकी डॉलर का निवेश लक्ष्य हासिल करने की क्षमता रखता है, जहां आने वाले 3 वर्षों में लगभग 1 मिलियन से भी ज्यादा नौकरियों मिलने की संभावना है। विश्व खाद्य भारत मंच के माध्यम से भारत 'ग्लोबल फूड फैक्टरी' और 'ग्लोबल सोर्सिंग हब' के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।

राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने इस भव्य आयोजन के बारे में विस्तार से बताया तथा साथ ही यह भी कहा कि यह भारत को खाद्य क्षेत्र में दुनिया के सामने प्रस्तुत करने हेतु बेहतर अवसर है। इस कार्यक्रम के माध्यम से भारत को विश्व स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी तथा खाद्य अपव्यय को कम करने, खाद्य सुरक्षा में वृद्धि करने और रोजगार सृजन करने में सहायता मिलेगा।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में सचिव जे• पी• मीणा ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश और व्यापार को आकर्षित करने के लिए पहला अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जायेगा तथा साथ ही  इसमें प्रतिभागियों के लिए विशेष सत्र, सम्मेलनों और नेटवर्किंग का भी आयोजन किया जायेगा। इस कार्यक्रम में 800 से भी ज्यादा वैश्विक और घरेलू प्रदर्शक भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग क्षेत्र की महिला उद्ममी भी भाग ले रही हैं। संक्षेप में, विश्व खाद्य भारत 2017 में 2000 देशों के 200 से अधिक प्रतिभागियों की मेजबानी की जा रही है, 30 देशों की 200 से अधिक कंपनियों, 18 मंत्री और व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडलों, लगभग 50 वैश्विक सीईओ, सभी प्रमुख घरेलू खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों के सीईओ और 28 राज्यों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं।

विश्व खाद्य भारत के जर्मनी, जापान और डेनमार्क सहयोगी देश हैं तो वहीं इटली एवं नीदरलैंड पर विशेष नजर रहेगी। भारत में जापान के राजदूत मि• केनजी हिरामास्सू, भारत में डेनमार्क के राजदूत मि• पीटर टेकसोई जेनसेन, भारत में नीदरलैंड के राजदूत मि• एलफोंसुस एस्टोलिंगा, भारत में इटली के राजदूत मि• लोरेंजो ऐंगलोनी देशों के प्रतिनिधियों ने भारत में निवेश को बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इन देशों ने भारत के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की इच्छा व्यक्त की है और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में क्रांति में अपनी भूमिका निभाने की भी इच्छा व्यक्त की है।

भारत और वैश्विक खाद्य श्रृंखला जैसे आईटीसी, वालमार्ट, नेस्ले, केलॉग्स और मेट्रो कैश एंड कैरी इंडिया इत्यादि के सीईओ और वरिष्ठ अधिकारी ने इस कार्यक्रम में दिल से शामिल होने को तत्पर हैं तथा इसे एक सफल कार्यक्रम बनाने हेतु कृतसंकल्प भी हैं।

ऐसा देखा गया कि विश्व की आबादी का एक छठा और संसाधनों का एक विशाल हिस्सा होने से भारत को “ग्लोबल फूड वैल्यू चेन हब” बनने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए और निजी उद्योग के इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

खाद्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए श्रीमती बादल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि "विश्व खाद्य भारत के साथ, हम भारतीय भोजन, मसाले, सामग्री और व्यंजनों के अपने अनुभवों से रूबरू कराने के लिए विश्व को आमंत्रित कर रहे हैं।

शेफ संजीव कपूर ने कहा कि 'फूड स्ट्रीट' विश्व के लिए भारत के सबसे आकर्षक प्रतिबिंब है। श्रीमती बादल के दिमाग की उपज फूड स्ट्रीट एक अनुभवात्मक मंच है जो दुनिया के व्यंजनों के पाक प्रथाओं, जायके, सुगंध से परिचित करायेगा और समकालीन प्रस्तुतीकरण और संलयन भोजन बनाने के लिए भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अपने उत्पादन की विविधता के साथ जश्न मनाएगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रैंड एंबेसडर एवं फूड स्ट्रीट के क्यूरेटर शेफ संजीव कपूर ने कहा कि समृद्ध पारंपरिक भारतीय व्यंजनों के रहस्यों को इस कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा।

पूरावलोकन सत्र विश्व खाद्य दिवस के उत्सव के साथ हुआ जिसमें श्रीमती बादल ने 'अपनी थाली में खाने की बर्बादी न करें' अभियान के साथ भोजन की बर्बादी के खिलाफ युद्ध लड़ने का वचन दिया। इस कार्यक्रम को कृषि एवं किसान विकास मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, विदेश मंत्रालय एवं नागर विमानन मंत्रालय ने भी अपना समर्थन दिया है।

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