रंगीन कीड़े ने फैलाई दहशत



--- रंजीत लुधियानवी, वरिष्ठ पत्रकार, कोलकाता।

पश्चिम बंगाल में व्यापक तौर पर फैले हुए रहस्यमय बुखार का रहस्य खुलने लगा है। पता चला है कि सिर्फ मच्छर ही नहीं राज्य में जारी बुखार के प्रकोप का एक और कारण लाल रंग का अद्भूत कीड़ा भी है। डाक्टरों का कहना है कि ट्रंबीक्युलिड नामक यह कीड़ा लोगों को बीमारी की चपेट में ले रहा है।

राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में फैले बुखार का पता लगाने के लिए कुछ दिन पहले डेंगू, चिकनगुनिया, एक्यूट एनसेफ्लाइटिस (एएस) की जांच की गई। इस दौरान पता चला कि खून के नमूना रिपोर्ट में टाईफास के जीवाणू मिले हैं। यह बीमारी डेंगू जैसे किसी वायरस के कारण नहीं होती है। इस बीमारी का कारण एक तरह का प्रोटोजोया या परजीवी कीड़ा है। पेड़ पौधों और झाड़-झंझाल में ऐसा कीड़ा पाया जाता है।

डाक्टरों का कहना है कि डेंगू का कोई प्रतिरोधक नहीं होता है, बीमारी के कारण देख कर ही उसका इलाज किया जाता है। लेकिन टाईफास नामक बुखार में ऐसा नहीं है। एंटीबायटिक से इसका इलाज किया जा सकता है। हालांकि डेंगू की तरह ही इस बुखार में भी बुखार, सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह बुखार बढ़ने से निमोनिया, मायोकार्डटिस, एनसेफ्लाइटिस हो सकता है। सबसे चिंता की बात यह है कि समय पर इलाज नहीं किए जाने से 40 फीसद तक लोगों की मौत हो सकती है जबकि सही समय पर इलाज करवाने से यह मृत्युदर घट कर सिर्फ दो फीसद रह सकती है। माना जा रहा है कि बीमारी का पता नहीं चलने के कारण उत्तर चौबीस परगना जिले में कई लोगों की मौत हो चुकी है।

राज्य के स्वास्थ्य अधिकारी डाक्टर विश्वरंजन शतपथी का कहना है कि अज्ञात बुखार के मामले में हम लोगों ने एक्यूट एनसेफ्लाटिस सिंड्रम का शक होने के कारण विभिन्न इलाकों से खून के नमूने इकट्ठा करके जांच के लिए भेजे गए थे। इसमें से कम से कम 25 फीसद मामले में स्क्रब टाईफस के जीवाणु मिले हैं। इस बीमारी का कारण एक कीड़ा है, जो गंदगी के कारण पनपता है। इस बारे में जिलों में सूचना भेज दी गई है और विभिन्न जगह परीक्षण भी हो रहा है।

सूत्रों का कहना है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के समय म्यांमार में फौजियों में पहली बार उक्त बीमारी देखी गई थी। इसके बाद कई अमेरिकी फौजी भी इस बीमारी के कारण मारे गए। 1944 के पहले तक इस बीमारी के बारे में एंटीबायटिक या वैक्सिन का आविष्कार नहीं हुआ था। वरिष्ठ डाक्टर सुकुमार मुखर्जी भी मानते हैं कि स्क्रब टाईफस के कई मरीज आ रहे हैं। दूसरी बीमारी के मुकाबले इसमें यह फर्क है कि उल्टी, सिरदर्द, बुखार जैसे लक्ष्ण होने के साथ ही  शरीर पर एक या दो एसकार या अल्सर पैदा हो जाते हैं। मुंह, शरीर या पैर पर अल्सर देख कर डाक्टर को बीमारी के बारे में पता लगाना आसान हो जाता है।

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