विप्रजन निकले सड़कों पर, लगे भगवान परशुराम के जयकारे



इस धरती पर दो ही परम्परा प्रचलन में रही हैं ब्राह्मण और श्रमण। यह कहना कि ब्राह्मण परम्परा सर्वाधिक प्राचीन है तो बात अधूरी होगी और यह भी सही नहीं कि श्रमण पहले हुए। बस इतना समझ लें कि इन्हीं से ईश्वरवादी और अनिश्वरवादी धर्मों की उत्पत्ति हुई है। चाहे हिंदू, पारसी, यहूदी, ईसाई, इस्लाम हो या फिर चर्वाक, जैन, शिंतो, कन्फ्यु‍शियस या बौद्ध हो, आज धरती पर जितने भी धर्म हैं, उन सभी का आधार यही प्राचीन परम्परा रही है। इसी परम्परा ने वेद लिखे और इसी से जिनवाद की शुरुआत हुई। यही परम्परा आगे चलकर आज हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म कहलाती है। ब्राह्मण वह है जो ब्रह्म को ही मोक्ष का आधार मानता हो और वेद वाक्य को ही ब्रह्म वाक्य मानता हो। ब्राह्मणों अनुसार ब्रह्म, और ब्रह्मांड को जानना आवश्यक है तभी ब्रह्मलीन होने का मार्ग खुलता है। यद्यपि भारतीय जनसंख्या में ब्राह्मणों का प्रतिशत कम है, तथापि धर्म, संस्कॄति, कला तथा शिक्षा के क्षेत्र में इनका योगदान अपरिमित है।
वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को जन्म से ब्राह्मण और कर्म से क्षत्रिय भृगुवंशी परशुराम का जन्म हुआ था। इसी कारण अक्षय तृतीया के दिन पूरे भारत में परशुराम जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है। ब्राह्मण समाज की चार संस्थाओं ने मिलकर कोलकाता के सत्यनारायण पार्क से एक विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया। शोभायात्रा में लगभग 40 संस्थाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। विष्णु के छठवें अवतार परशुराम की जय-जयकार के नारों के साथ शुरू हुई यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर था। शोभा यात्रा गाजे बाजे के साथ निकाली गई थी। इसमें कुछ गगनभेदी नारों ने श्रद्धालुओं को थिरकने को भी मजबूर कर दिया। जब जब ब्राह्मण बोला है, राज सिंहासन डोला है जैसी धुनों से शोभा यात्रा का उत्साह बढ़ रहा था। इस मौके पर जगह-जगह चल समारोह निकाले गए। विभिन्न स्थानों पर हवन, यज्ञ, पूजा-अर्चना कर प्रसाद वितरण भी किया गया। वही समाजजनों ने भगवान परशुराम के आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम के संयोजक सचिन त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ, अखिल भारतवर्षीय श्रीगुर्जरगोड़ ब्राह्मण महासभा युवक संघ, विप्र सेवा ट्रस्ट ने आयोजक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम में पार्षद विजय ओझा, मिना देवी पुरोहित, राजेश सिन्हा, नवीन मिश्रा, मुन्ना बाजपेयी, गणेश जोशी, मनीष जोशी, मनीष शर्मा, अनिल उपाध्याय, अशोक सहल, अनिल मिश्रा, कामिनी तिवारी, पुर्णिमा चक्रवर्ती, भावना ओझा, सीमा उपाध्याय, कविवात शर्मा, सत्य प्रकाश पांडेय, वृज उपाध्याय, सुनील दीक्षित व अन्य उपस्थित रहें।

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