बीएचयू : कुलपति पद के दावेदारों का गणेश परिक्रमा शुरु



--- हरेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार, वाराणसी।

☆ कौन बनेगा कुलपति , चर्चा जोरों पर.....

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो• जी• सी• त्रिपाठी का कार्यकाल 29 नवंबर को समाप्त हो रहा है। कुलपति पद पर नियुक्ति की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर तक निर्धारित है। सरकार की ओर से बीएचयू के नये कुलपति के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गयी है।

ऐसे में कुलपति बनने की अहर्ता रखने वाले बीएचयू सहित देशभर के प्रोफेसरों और अन्य विद्वानों ने अपना - अपना बायोडाटा मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजना शुरु कर दिया है। नया कुलपति कौन बनेगा इसकी चर्चा भी तेज हो गई है। कुलपति पद की लालसा पाले लोग सरकार के कद्दावर मंत्रियों से लेकर संघ की सरहद तक संबंधों की बिसात बिछाकर वक्त का इंतजार कर रहे हैं।

चर्चाओं के अनुसार हिमांचल यूनिवर्सिटी, शिमला के पूर्व कुलपति प्रो• एडीएन वाजपेयी, अखिल भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद की वर्तमान अध्यक्ष और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सदस्य प्रोफेसर सुषमा यादव, महाराजा सयाजीराव विवि वड़ोदरा के पूर्व कुलपति एवं शिक्षाविद प्रो• केसी मेहता के नाम तेजी से सामने आए हैं।

लेकिन प्रधानमंत्री के गृह प्रदेश के प्रो• मेहता भी किसी से कमतर नहीं आंके जा रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अबकी बार बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के न्यूरोलाजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष विभागीय राजनीति से आजिज होकर इस्तिफा दिये चिकित्सक प्रोफेसर विवेक शर्मा ने भी कुलपति पद के लिए आवेदन किया है। इनके अलावा बीएचयू सामाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष एवं पूर्व चीफ प्राक्टर प्रो• अरविंद कुमार जोशी, महिला महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो• संध्या सिंह कौशिक, तिलकामांझी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो• आर• एस• दुबे, विज्ञान संस्थान की डीन प्रो• चंदना हलदर, भौमिकी विभाग के प्रो• रामाश्रय सिंह, शारिरीक शिक्षा विभाग के प्रो• एन• बी• शुक्ला, आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो• राजीव संगल सहित एक दर्जन प्रोफेसरों के नाम की चर्चा कुलपति पद के आवेदन करने वालों में है।

कौन बनेगा कुलपति अब इसकी चर्चा जोरो पर शुरु हो गई है। अपने अपने तरीके से लोगों ने समीक्षा भी शुरु कर दिया है, कयास यह भी लगाये जा रहे हैं कि गत दिनों छेड़खानी से सुरक्षा की मांग को लेकर धरने पर बैठी छात्राओं पर बर्रबर लाठीचार्ज की कलंक को धोने के लिए सरकार किसी महिला प्रोफेसर को कुलपति बना सकती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुलपति बनने की लालसा पाले लोग संघ के शीर्ष स्वयं सेवकों से पिछले संबंधों की दुहाई देकर जुगाड़ में लग गये है। आवेदकों की नजर सर्च कमेटी के गठन पर भी है जिसका गठन मानव संसाधन विकास मंत्रालय करता है। सर्च कमेटी ही कुलपति पद के दावेदारों के नाम पर विचार करेगी। वैसे कौन कुलपति बनेगा यह तो भविष्य के गर्त में है लेकिन आने वाले नये कुलपति के सामने सबसे बडी चुनौती परिसर में शैक्षिक माहौल को बनाये रखने के साथ ही सुरक्षा की भी होगी।

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