दलितों के बीच आतंक का पर्याय है सुरेन्द्र मौर्य



बहाई /रायबरेली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

गाँव के जिन गरीब-गुरबों, दलितों, कमजोरों ने जिन हाथों को राजनैतिक ताकत इस विश्वास के साथ सौंपी थी कि वह उनकी मदद करेंगे और दबंगों के उत्पीड़न से बचाएंगे मगर उन्हें क्या मालूम था कि वही हाथ उन्हीं का गला दबाकर जीना मुश्किल कर देंगे। जी हां बहाई गाँव में तो कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। गत 27 अगस्त 2019 को न्यायालय श्रीमान विशेष न्यायाधीश कोर्ट नम्बर दो रायबरेली से सुरेंद्र मौर्य, हरि श्याम यादव को जेल भेज दिया गया। पीड़िता मायावती पत्नी रामनाथ चमार निवासी बहाई थाना लालगंज जनपद रायबरेली कोर्ट के माध्यम से हरिजन एक्ट की धाराओं में एसटीएन नंबर 145/2019 धारा 323, 452, 504, 506 आईपीसी व 3(1)10(द)(ध) एससी एसटी एक्ट लगा है।

• सुरेंद्र मौर्य का है लंबा-चौड़ा आपराधिक इतिहास

सुरेंद्र मौर्य का अपराधिक इतिहास लंबा चौड़ा है जिसके अंतर्गत मुकदमा अपराध संख्या 116/2010 अंतर्गत धारा 147, 323, 504, 506 आईपीसी मुकदमा अपराध संख्या 885/2008 अंतर्गत धारा 323, 504, 506, 147, 452 आईपीसी 3(1)10 एससी एसटी एक्ट थाना लालगंज के रजिस्टर नंबर 8 के अवलोकन से अभियोग पंजीकृत होना पाया गया है।

सुरेंद्र मौर्य प्रधान प्रतिनिधि ने इसके पूर्व शिवकली यादव पत्नी स्वर्गीय गंगा प्रसाद यादव निवासिनी पूरे भीखी मजारे बहाई को जूतों से मारा पीटा था। मनोज यादव पुत्र गंगाधर यादव निवासी को भी मारा पीटा था और दर्जनों मारपीट का निस्तारण पुलिस चौकी इंचार्ज की मदद से किया गया। चौकी में समझौता का खेल विगत 4 वर्षों से चल रहा है। इन सब घटनाओं के कारण आम जनमानस में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सुरेंद्र मौर्य व उनके सिपहसालार भय और आतंक का पर्याय बन चुके हैं।

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