डलमऊ/रायबरेली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।
● क्योंकि क्लीनिक के आगे नाली निर्माण की हिम्मत नहीं जुटा पाया नगर पंचायत डलमऊ प्रशासन
● गौरतलब है कि सड़क के मध्य से दोनों ओर 60 फ़ीट की दूरी पर पीडब्ल्यूडी की जमीन है जिस पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है। इसके साथ ही पूरी नगर पंचायत मार्केट अवैध रूप से तालाब की भूमि व बंजर भूमि पर बनी है
जब किसी व्यक्ति की ऊंची पहुँच व व्यक्ति रसूखदार हो तो शासन प्रशासन भी उसके आगे नतमस्तक होकर घुटने टेक देता है। जी हां यह लाइन इस समय एकदम सटीक बैठ रही है डलमऊ तहसील व नगर पंचायत प्रशासन पर क्योंकि डलमऊ नगर पंचायत के द्वारा डलमऊ-रायबरेली रोड पर पड़वा नाला स्थित नगर पंचायत की मार्केट के पास नाली का निर्माण चल रहा है नगर पंचायत कार्यालय से मिली स्टीमेट जानकारी के अनुसार नाली सड़क के किनारे नगर पंचायत द्वारा बनवाई गई दुकानों के एक छोर से दूसरे छोर यानी पड़वा नाला पुल तक बननी है। परंतु नाली अभी आधी ही बनी थी कि आगे ऊँची पहुँच व रसूखदार क्लीनिक संचालक का अवैध तरीके से बना क्लीनिक भी नाली बनाने के मार्ग के जद में आ गया। आता भी क्यों ना क्योंकि रसूखदार क्लीनिक संचालक ने लोक निर्माण विभाग के सारे नियमों को धता बताते हुए ताक पर रखकर अवैध तरीके से सड़क की पटरी की तरफ पक्का बरामदा व बेसमेंट का निर्माण करवा रखा था।
नगर पंचायत में ठेकेदारी के माध्यम से नाली निर्माण करवा रहे ठेकेदार के द्वारा जब क्लीनिक संचालक से कहा गया कि आप अपना अतिक्रमण हटा लीजिए नाली का निर्माण होना है तो क्लीनिक संचालक ने ठेकेदार से कहा कि नगर पंचायत को जितना जोर लगाना हो लगा ले मेरे सामने से अतिक्रमण किसी भी हाल में नहीं हटेगा और ना ही मेरे सामने किसी नाली का निर्माण होगा। गौरतलब है कि सड़क के मध्य से दोनों ओर 60 फ़ीट की दूरी पर पीडब्ल्यूडी की जमीन है जिस पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है। इसके साथ ही पूरी नगर पंचायत मार्केट अवैध रूप से तालाब की भूमि व बंजर भूमि पर बनी है। अब इस स्थिति में ठेकेदार को लगा कि कहां इन रसूखदार लोगों से झंझट मोल लिया जाए।
तभी ठेकेदार को क्लीनिक संचालक के प्रकोप से बचने के लिए एक जुगत सूझी कि यदि इस निर्माणाधीन नाली को मार्केट के बीच से बने किसानों के 15 फीट सकरे रास्ते से नाली को पड़वा नाले में गिरा दिया जाए तो ऊंची पहुँच रखने वाले क्लीनिक संचालक के प्रकोप से भी बचा जा सकता है और आगे नाली निर्माण में आने वाला खर्च भी बच जाएगा और पेमेंट पूरी नाली निर्माण का करवा लिया जायेगा। यानी सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी तथा मालामाल भी हो जाएंगे। इसी के चलते ठेकेदार ने किसानों के 15 फुट सकरे रास्ते के बीच में नाली निर्माण के लिए मिट्टी भी खोदवा डाली। परंतु किसानों की नाराजगी के चलते ठेकेदार की मनसा चल ना सकी।
किसानों को नाराजगी होती भी क्यों ना क्योंकि बेचारे अन्नदाताओं को अपने खेतों तक जाने में इसी जर्जर उबड़ खाबड़ सकरी गली से होकर जाना पड़ता है। और यदि उसमें भी किसी एक व्यक्ति के चलते अगर रास्ते में अवैध तरीके से नियम व कानूनों को दरकिनार करते हुए नाली का निर्माण कराया जाता है तो वह अन्नदाताओं के साथ अन्याय व उनका उत्पीड़न होगा। क्योंकि वैसे भी देश का अन्नदाता इस समय अपने आपको असहाय ही महसूस कर रहा है। खैर अगर प्रशासन रसूखदार क्लीनिक संचालक के प्रति कार्यवाही करते हुए आगे नाली का निर्माण नहीं करवा पा रहा तो इससे सरकार की छवि धूमिल व प्रशासन की क्षेत्र में किरकिरी होगी। क्योंकि सूबे में अपने प्रशासन के बल पर सुशासन का ढोल पीटने वाली योगी सरकार पूरे प्रदेश में अवैध अतिक्रमण पर सख्त तो दिख रही है लेकिन यहां पर प्रशासन की सुस्ती के चलते दबंग अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। डलमऊ क्षेत्र में इस प्रकरण को लेकर आम चर्चा व शोध का विषय है कि क्या प्रशासन क्लीनिक संचालक के आगे नतमस्तक ना होकर स्वतंत्र रूप से कार्य कर पाएगा या फिर क्लीनिक संचालक के रसूख के आगे बौना साबित हो जाएगा।
खैर फिलहाल तो अभी इस प्रकरण में एसडीएम डलमऊ सविता यादव ने कहा है कि प्रकरण की जानकारी है ईओ नगर पंचायत व लेखपाल को जांच के निर्देश दिए गए हैं जांच करके अपनी रिपोर्ट देंगे।इस प्रकरण के संदर्भ में जब ईओ नगर पंचायत अमित कुमार सिंह से मोबाइल पर बात करने का प्रयास किया गया तो उनके मोबाइल नम्बर पर दस बार फोन करने के पश्चात भी मोबाइल रिसीव नही हुआ। तथा इस प्रकरण में जब डलमऊ जाँच करने वाले क्षेत्रीय लेखपाल से मोबाइल पर वार्ता करने का प्रयास किया गया तो वह भी ईओ साहब से एक कदम आगे निकले क्योंकि लेखपाल साहब को ग्यारह बार उनके मोबाइल पर फोन करने के पश्चात भी उनका फोन रिसीव नही हुआ।
एसडीएम - 9454416629
लेखपाल - 9452231997
ईओ नगर पंचायत - 9580498890
चेयरमैन - 9415741193