वैज्ञानिक पद्धति से कम हो सकती हैं किसानों की समस्याएं



कोलकाता-प•बंगाल,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

वैज्ञानिक तकनीकों के कुशल उपयोग की सही समझ न होने से खेती की लागत बढ़ जाती है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। कृषि से जुड़ी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किसान नई तकनीक अपनाने के लिए तैयार तो हैं, पर उन्हें सही वैज्ञानिक मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। उन्हें सही मार्गदर्शन मिल जाए तो खेती घाटे का सौदा नहीं रहेगी। कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने ये बातें कोलकाता में चल रहे 5वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान उत्सव (आईआईएसएफ)-2019 में आयोजित कृषि वैज्ञानिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि “खेती में मौसम का बेहद महत्व है। किसानों को मौसम का रियल टाइम डेटा मिल जाए तो बेहतर कृषि प्रबंधन में उन्हें मदद मिल सकती है। विज्ञान और प्रौद्यागिकी की भूमिका इसमें काफी अहम हो सकती है। इसके साथ ही, किसानों की फसलों को बाजार उपलब्ध कराना भी जरूरी है। सरकार द्वारा शुरू किए गए खाद्य प्रसंस्करण के प्रयास इसमें मददगार हो सकते हैं।” किसानों के लिए संस्थागत ऋण की स्थिति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि “करीब 8 करोड़ किसान अभी भी संस्थागत ऋण से दूर हैं। उन्हें खेती के लिए समय पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने और साहूकारों से मुक्ति दिलाने में किसान क्रेडिट कार्ड अहम भूमिका निभा सकता है।”

कृषि वैज्ञानिक सम्मेलन आईआईएसएफ का एक अभिन्न हिस्सा है। वर्ष 2015 में दिल्ली में पहली बार आयोजित किए गए आईआईएसएफ से अब तक इसका आयोजन लगातार किया जा रहा है। कृषि नवाचार, कृषि विविधीकरण एवं एकीकृत कृषि पद्धति, मूल्य संवर्द्धन, वैल्यू चेन तथा बिजनेस मॉडल्स, टिकाऊ खेती के लिए वैकल्पिक पद्धति, स्मार्ट खेती और पॉलिसी एडवोकेसी जैसे सत्र कृषि वैज्ञानिक सम्मेलन का प्रमुख हिस्सा रहे हैं। इस सम्मेलन में कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी, छात्र और किसान मुख्य रूप से शामिल होते हैं।

कृषि वैज्ञानिक सम्मेलन के संयोजक डॉ• जे• पी• शर्मा ने कहा कि “टिकाऊ और मुनाफे की खेती मौजूदा समय की जरूरत है। किसान खेती में उपयुक्त बीजों और खाद एवं कीटनाशकों का संतुलित उपयोग करें तो लागत को सीमित रखने में मदद मिल सकती है। इस लक्ष्य को हासिल करने में औपचारिक अनुसंधान संगठनों के माध्यम से किसानों को मिलने वाला तकनीकी सहयोग उत्पादन और किसानों की आय वृद्धि में मददगार हो सकता है। इसके लिए कृषि शोधों का लाभ किसानों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।”

इस मौके पर मौजूद भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संघठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि “जमीनी स्तर पर नवाचार भी किसानों के कल्याण और ग्रामीण समृद्धि के लिए योगदान करने की क्षमता रखते हैं। किसानों के सफल बिजनेस मॉडल दूसरे किसानों को प्रेरित कर सकते हैं तो जमीनी नवाचार किफायती खेती में मददगार हो सकते हैं।” श्री कुलकर्णी ने कहा कि इस विज्ञान उत्सव में एकत्रित प्रतिभागियों को इस बात पर चिंतन करना चाहिए कि किसानों की आय कैसे बढ़ाई जा सकती है और देश की खाद्यान्न तथा पोषण सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।

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