लखनऊ : 47वीं भारतीय पुलिस विज्ञान कांग्रेस के समापन समारोह को केन्द्रीय गृह मंत्री ने संबोधित किया



लखनऊ- उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ में 47वीं भारतीय पुलिस विज्ञान कांग्रेस के समापन समारोह में बोलते हुए कहा कि भारत आज विश्व के नेतृत्व के लिए अग्रसर है किन्तु यह तभी संभव है जब हमारी आंतरिक सुरक्षा चुस्त दुरुस्त होगी। उन्होंने कहा कि भारत की 15000 किलोमीटर से ज्यादा जमीनी सरहद, 7500 किलोमीटर का कोस्टलाइन बॉर्डर के साथ साथ जब भारत को मुश्किल में रखने के प्रयास हो रहे हो तब आंतरिक सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। अमित शाह ने कहा कि 130 करोड़ का बाजार दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र है ऐसे में साइबर अटैक और फेक करेंसी पर रोक लगाना जरूरी है।

अमित शाह ने कहा कि आज देश के सामने आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद, साइबर क्राइम आदि को कंट्रोल करने के साथ-साथ पड़ोसी देशों द्वारा खड़ी की गई चुनौतियां भी शामिल हैं। श्री शाह ने कहा कि जब तक देश आंतरिक रूप से सुरक्षित नहीं होगा, विकसित नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि संविधान को स्प्रिट को समझकर कार्य करना होगा। उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में भव्य पुलिस स्मारक बनाया जिसके माध्यम से आमजन के सम्मुख पुलिस की वीरगाथा प्रदर्शित की जा रही है। उन्होने इस पुलिस स्मारक में प्रदर्शित करने के लिए राज्यों की पुलिस द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों पर लघु फिल्म और डाकुमेंटरी भेजने को कहा ताकि जनता की नजर में पुलिस की छवि बेहतर की जा सके।

अमित शाह ने पाकिस्तान के बारे में बोलते हुए कहा कि हम पड़ोसी तो बदल नहीं सकते किंतु स्वयं को चुस्त दुरूस्त रख सकते हैं जिसके लिए हमारी सुरक्षा अभेध होनी चाहिए।

श्री शाह का कहना था की भारत की विशाल, विविधतापूर्ण सस्‍कृ‍ति जहां भारत के लिए गौरव की बात है वहीं ज़िम्मेदारी भी बढ़ाती है। इतनी विविधताओं के कारण दुश्मन को भेद खड़ा करने की जगह मिलती है जिसकी रोकथाम जरूरी है। उन्होंने आगे कहा की शायद ही कोई दूसरा बल होगा जिसके 33 हजार से ज्यादा जवानों ने देश की सुरक्षा में अपनी जान की आहुति दी हो, वह हमसे आशा करते हैं कि हम मां भारती को विश्‍व में सर्वोच्च स्थान पर पहुंचा कर उनके बलिदान को सार्थक करने का काम करें। श्री शाह ने यह भी कहा कि आंतरिक सुरक्षा में राज्यों की अहम भूमिका होती है। उनका कहना था कि उत्तरप्रदेश में योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था में काफी सुधार किया है। उनका यह भी कहना था कि सिर्फ भवन से नहीं बल्कि भवन के अंदर काम करने वालों की भावना बेहतर परिणाम दे सकती है जिसके लिए परिवर्तन की आवश्यकता है। उन्होने कहा की यह भारतीय पुलिस साइंस कांग्रेस परिवर्तन का माध्यम बने तभी इसकी सार्थकता होगी।

अमित शाह ने कहा कि हमें अपने युवाओं को नशे के जहर से बचाना है क्योंकि युवा पीढ़ी को इससे दूर रखे बिना कोई देश कभी दुनिया का नेतृत्व नहीं कर सकता। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब समय आ गया है कि भारत विश्व का नेतृत्व करे। श्री शाह ने यह भी कहा कि केंद्र तथा राज्यों के नारकोटिक्स ब्यूरो में सामंजस्य बिठाने के लिए बदलाव की आवश्यकता है जो जल्द ही किया जाएगा। श्री शाह ने धारा 370 तथा अयोध्या राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की भूमिका की सराहना की। श्री शाह ने कहा कि पूरे देश में एनआरसी एवं नागरिकता संशोधन बिल केंद्र और राज्य के सुरक्षा बलों के सामंजस्य से लागू किया जा सकता है।

अमित शाह का कहना था कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्मार्ट पुलिस की कल्पना रखी है। स्मार्ट का मतलब सेंसेटिव, मॉडर्न, अलर्ट तथा रिस्पोंसिव के साथ टेक्नोसेवी होना भी है।

श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन कर दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं जिसके लिए निहायत जरूरी है कि देश की आंतरिक कानून व्यवस्था मजबूत हो। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सीआरपीसी तथा आईपीसी में बदलाव वक्त की जरूरत है जिसपर काम किया जा रहा है। अमित शाह का कहना था कि जब देश में अंग्रेजों के समय में पुलिस व्यवस्था की स्थापना की गई थी तब राज्य का रक्षण, खजाने का रक्षण, क्रांतिकारियों का दमन आदि की सोच थी। यह उनकी सोच को दर्शाता था क्योंकि उन्हें अपना राज्य बरकरार रखना था। श्री शाह ने कहा कि वर्तमान में पुलिस का दायित्व लोगों की सेवा तथा मानव अधिकारों की रक्षा का है। उन्होने पुलिस व्यवस्था के साथ पुलिसिंग व्यवस्था में सुधार को समय की आवश्यकता बताया। उन्होने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की नेशनल पुलिस यूनिवर्सिटी तथा फॉरेंसिंक यूनिवर्सिटी बनेगी जिसका उद्देश्य पुलिस तथा सशस्त्र बलों में जाने वाले विद्यार्थियों को तैयार करना होगा। अमित शाह ने कहा कि देश में केसों में सजा कराने का अनुपात दयनीय है जिसे फॉरेंसिक साइंस की वैज्ञानिक रिपोर्ट की मदद से सुधारा जा सकता है। उन्होने कहा कि इसके लिए मानव संसाधन की व्यवस्था भी करनी होगी।

श्री शाह का कहना था कि एक दृष्टि से बीपीआरएंडडी का काम समायोजन है। इसके साथ बेस्ट प्रैक्टिस का एक्सचेंज, समस्याओं को ढूंढने, उनके समाधान पर चिंतन और उसका समाधान ढूंढने का भी काम बीपीआरएंडडी का है।

Image Gallery
Budget Advertisementt