लखनऊ-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।
तहज़ीब के शहर लखनऊ में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में आज भारी हिंसा हुई। लखनऊ के परिवर्तन चौक से लेकर हज़रतगंज चौराहे तक उग्र प्रदर्शनकारियों ने भयंकर तोड़फोड़ की और आगज़नी किया। उग्र प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
मीडियाकर्मियों को भी परेशानी उठानी पड़ी। मीडिया की कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया।
इससे लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। आज सबेरे से ही यहाँ हज़रतगंज में तनाव का माहौल रहा। पूरे शहर में जगह-जगह अशांति का वातावरण है। स्थिति को नियंत्रित करने के पुलिस और प्रशासन तत्परता से लगा हुआ है जिससे शांति व्यवस्था बनी रहे।
पुलिस का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है जबकि प्रदर्शनकारियों ने सुबह से ही उपद्रव किया। सरकारी व आम लोगों के वाहनों को आग लगा दिया गया।
इसी बीच बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक विवादित बयान दिया कि इस मुद्दे पर जनमत संग्रह कराये। सीएए और एनआरसी अब नागरिकता बिल अब कानून बन चुका है। हालाँकि संविधान में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। इसी तरह हैदराबाद में भी मुस्लिम बहुल इलाक़े में भी भारी प्रदर्शन किया गया।
यूपी में हिंसा से नाराज़ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपात बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जो भी लोग पब्लिक प्रापर्टी को नुक़सान पहुँचाने के लिए ज़िम्मेदार हैं, उनसे नुक़सान की भरपाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को पहचान लिया गया है। हम सख़्ती से निपटेंगे।”
पुलिस अब स्थिति को सामान्य बता रही है। आमलोगों का कहना है कि यह ग़लत है। यह राजनैतिक मुद्दा है और इसे हवा दी जा रही है।
हालाँकि सरकार कहती है कि नागरिकता संशोधन क़ानून किसी की भी नागरिकता लेने का क़ानून नहीं है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस लोगों को गुमराह कर रही है।वैसे नागरिकता संशोधन क़ानून सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है।