हावड़ा 6 मई। राजनीतिक शुचिता के पर्याय थे आचार्य विष्णु कान्त शास्त्री। महामहिम राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने भारतीय गुरुकुलम की ओर से आयोजित आचार्य विष्णु कान्त शास्त्री स्मृति साहित्य सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए यह बात रत्नाकर नॉर्थ पॉइंट स्कूल के सभागार में शनिवार को कही। उन्होने कहा कि शिक्षा, साहित्य, संस्कृति व विज्ञान प्रेमी हावड़ा व कोलकाता वासी 1987 से स्थापित भारतीय गुरुकुलम के इस आयोजन में मुझे आ कर प्रसन्नता हुई। मुझे बताया गया कि 1987 से शिक्षा, साहित्य, विज्ञान व संस्कृति के उन्नयन के साथ समाज सेवा मूलक कार्यों द्वारा पश्चिम बंगाल के हावड़ा अंचल में यह संस्था विभिन्न साहित्यिक शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करती हुई अब तक शताधिक शिक्षकों को शिक्षक दिवस व गणेश पूजा के अवसर पर सम्मानित कर चुकी है। वास्तव में जिस समाज में शिक्षक व शिक्षा का सम्मान होता है, वही समज उन्नति के शिखरों का स्पर्श करता है। समाज को शिक्षित करने का बड़ा दायित्व अध्यापक समाज पर है इसीलिए अपने यहाँ इसे ब्रह्मा विष्णु महेश के साथ साक्षात परब्रह्म रूप में स्वीकार किया गया है। मुझे यह बताया गया कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक डा० हेडगेवार के समर्थ उत्तराधिकारी परंपूजनीय गुरु गोलवरकर के नाम पर गत वर्ष शिक्षक दिवस पर एक सम्मान आईआईईएसटी के निदेशक डा० अजय कुमार राय को दिया गया था। मुझे यह भी बताया गया कि परम पूजनीय गुरुजी संघ के सर्वमान्य और सर्वश्रेष्ठ विभूति रहे हैं। उनके नाम का सम्मान निश्चित रूप से राष्ट्र भाव की जागृति करेगा। ऐसा मेरा दृण विश्वास है। महामहिम श्री त्रिपाठी ने कहा कि आज मुझे यहाँ उपस्थित होकर अतिरिक्त प्रसन्नता हो रही है क्योंकि आज इस मंच पर हम सब के परम अदरणीय केवल हावड़ा कोलकाता पश्चिम बंगाल ही नहीं सारे देश में अपनी विद्वता, बाग्मिता और विनम्रता के लिए लोकप्रिय जन नेता अदरणीय विष्णु कान्त शास्त्री के नाम से आज एक सम्मान प्रदान किया गया। शास्त्री जी के बारे में बोलते हुए महामहिम ने कहा कि उनके दीप्त व्यक्तित्व से हम सभी अभिभूत रहे हैं। उनके साथ काम करते हुए मेरे जैसा साहित्यिक सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ता भी सदेव प्रेरित होता रहा है। उत्तर प्रदेश में राज्यपाल के तौर पर शास्त्री जी के कार्यकाल के दौर का संस्मरण सुनाते हुए महामहिम ने कहा कि एक आदर्श आधायपक के साथ संवेधानिक मर्यादाओं का पालन करने वाले राजनेता आचार्य विष्णु कान्त शास्त्री राजनीतिक शुचिता के पर्याय थे तथा उनके साहित्यिक व सांस्कृतिक व्यक्तित्व पर भी उन्होने प्रकाश डाला।
इसके साथ ही महामहिम ने इस सम्मान के औचित्य की चर्चा करते हुए कहा कि डा० प्रेम शंकर त्रिपाठी से बेहतर इस सम्मान की पात्रता और किसी में नहीं हो सकती। आचार्य शास्त्री के आदर्शों को डा० त्रिपाठी ने अपने जीवन में उतारा है। साथ ही डा० ऋषिकेश राय के शोध कार्य को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आज राष्ट्रवादी विचारधारा की जरूरत है।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता कलकत्ता विश्वविद्याल की हिन्दी विभागाध्यक्ष डा० राजश्री शुक्ला ने डा० प्रेम शंकर त्रिपाठी को आचार्य शास्त्री का पट्ट शिष्य बताते हुए उनकी बाग्मिता और सहृदयता की प्रशंसा की।
इस औसर पर सुरेन्द्र नाथ सन्ध्य कॉलेज कोलकाता की उर्दू विभागाध्यक्ष डा० नुशरत जहां ने आचार्य शास्त्री से संबन्धित संस्मरण सुना कर उनके उदार व्यक्तित्व की चर्चा की तथा डा० त्रिपाठी के शिक्षा व साहित्य के क्षेत्र में योगदान के साथ छात्र-वत्सलता की चर्चा की।
इस मौके पर आचार्य विष्णु कान्त शास्त्री साहित्य सम्मान से सम्मानित डा० प्रेम शंकर त्रिपाठी ने संस्था गुरुकुलम तथा मंचस्त अतिथियों के प्रति आभार जताते हुए अपने जीवन पर आचार्य शास्त्री के आदर्शों के प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि इस तरह का सम्मान या पुरस्कार यदि 40 वर्ष के उम्र के लोगों को दिया जाए तो उन्हे शिक्षा व साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।
गुरुकुलम सम्मान से सम्मानित डा० ऋषिकेश राय ने कहा कि इस संस्था की ओर से दिया गया यह सम्मान सारस्वत परम्परा का सम्मान है।
इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने मान पत्र व सम्मान राशि का चेक डा० प्रेम शंकर त्रिपाठी को तथा डा० ऋषिकेश राय को मान पत्र प्रदान किया। श्रीफल व माल्यार्पण डा० आनन्द पाण्डेय और रत्नाकर पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम के आरम्भ में आचार्य विष्णु कान्त शास्त्री के चित्र पर महामहिम तथा मंचस्थ अतिथियों ने श्रधासुमन अर्पित किया। महामहिम राज्यपाल का स्वागत मुख्य द्वार पर भारतीय गुरुकुलम के अध्यक्ष डा० आनन्द पाण्डेय, रत्नाकर नॉर्थ पॉइंट स्कूल के प्राचार्य डा० राजेश पाण्डेय तथा संदीप खोसला ने किया।
मंच का संचालन युवा पत्रकार प्रकाश पाण्डेय ने किया।