बिहार मछली पालन में 'ग्रीन बजट' के जरिए और अधिक होगा उत्पादन



--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

बिहार में मछली उत्पादन को बढ़ावा लेकर लंबे समय से कोशिश की जा रही है और इसका असर भी दिखने लगा है। बिहार में मछली की मांग 6.42 लाख मीट्रिक टन है जबकि इसे पूरा करने में 2 लाख मीट्रिक टन की कमी है जिसे इसी साल पूरा करने की उम्मीद है। बिहार में नए-नए तालाबों का निर्माण कराया जा रहा है जिससे मछली उत्पादन बढ़ा है।

पशुपालन विभाग के प्रधान सचिव एन• विजयलक्ष्मी ने कहा है कि फिलहाल बिहार से 30 हजार टन मछली नेपाल और दूसरे राज्यों को यहां से भेजा भी जा रहा है लेकिन ज्यादा मात्रा में दूसरे राज्यों से मछली मंगाई जाती है। इसी साल बिहार अपनी मांग को पूरा करने के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा।

गांव लेकर शहर तक जल जीवन हरियाली अभियान के तहत तालाब का जीर्णोद्धार कार्य किया जा रहा है और नए-नए तालाब भी बनवाए जा रहे हैं। इन तालाबों में मछली पालन की योजना है और इसके लिए काम भी शुरू कर दिया गया है। गांव में तालाब बनने से मछली पालन कर स्थानीय ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है।

जल जीवन हरियाली को लेकर राज्य सरकार गंभीर है और इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया गया है। साथ ही पहली बार बिहार में ग्रीन बजट इस बार लाया जा रहा है जिसमें तालाब-पोखर और जल संरक्षण को लेकर भी विशेष प्रावधान होगा। इसको लेकर बजट के पहले चर्चा भी हो चुकी है।

आपको बता दें कि 23 फरवरी से बिहार में राष्ट्रीय सहकारिता महासम्मेलन आयोजित किया जा रहा है जिसमें बिहार में नीली क्रांति और मछुआरों-किसानों की आय दोगुनी करने सम्बंधित प्रस्ताव लाए जाएंगे।

जल जीवन हरियाली से बनने वाले तालाब को लेकर आने वाले दो-तीन वर्षो में बिहार में मछली उत्पादन यहां की स्थानीय मांग से काफी ज्यादा हो जाएगी और इसका असर आर्थिक विकास के तौर भी देखने को मिलेगा।

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