--- रंजीत लुधियानवी, वरिष्ठ पत्रकार, कोलकाता।
नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से प्रचार के लिए हर तरह के तौर तरीके प्रयोग में लाए जा रहे हैं लेकिन ममता बनर्जी सरकार ने साफ कर दिया है कि बंगाल में मुफ्त का प्रचार नहीं मिलेगा।ताजा टकराव पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की याद को मिटाने के लिए 31 अक्टूबर को किए जा रहे वैकल्पिक कार्यकर्म को लेकर हो रहा है।
मालूम हो कि राज्य सरकार ने सरदार पटेल की जयंती पर तमाम उच्च शिक्षण संस्थानों में एकता दौड़ के आयोजन के केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के निर्देशों का पालन करने से इंकार कर दिया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने कालेजों व विश्वविद्यालयों समेत तमाम उच्च शिक्षण संस्थानों को केंद्र के दिशानिर्देशों की अनदेखी करने का निर्देश दिया है।
शिक्षा मंत्री व तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी ने रविवार को यहां कहा कि सरकार सरदार पटेल की जयंती अपने तरीके से मनाएगी, केंद्र के दिशानिर्देश के मुताबिक नहीं।
ध्यान रहे कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती के मौके पर तमाम उच्च शिक्षण संस्थानों को एकता दौड़ आयोजित करने का निर्देश दिया है। "राष्ट्र सरदार बल्लभभाई पटेल को सैल्यूट करता है" की थीम पर नाटकों का मंचन करने और आयोजनों की वीडियो रिकार्डिंग विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भेजने को भी कहा है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को राज्य पर किसी भी चीज को थोपने का अधिकार नहीं है। किसी के निर्देश के आदर किसी व्यक्ति विशेष के प्रति सम्मान नहीं जताया जाता। खासकर आयोजनों की वीडियो रिकार्डिंग कर उसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भेजने के निर्देश पर हमें काफी आपत्ति है।
इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोबाइल फोन से आधार नंबर जोड़ने वाले केंद्र के निर्देश को खुली चुनौती देते हुए कहा था कि वे ऐसा नहीं करेंगी। उन्होंने कहा था कि वे चाहें तो मेरा मोबाइल कनेक्शन काट सकते हैं। लेकिन अपनी निजता बनाए रखने के लिए वे मोबाइल नंबर को आधार से नहीं जोड़ेंगी।
वैसे, शिक्षा के मुद्दे पर केंद्र व राज्य का टकराव कोई नया नहीं है। केंद्र ने सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों को बीते महीने 11 तारीख को स्वामी विवेकानंद की ओर से शिकागो में दिए गए भाषण की 125वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के सजीव प्रसारण का निर्देश दिया था। लेकिन राज्य सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर बंगाल के तमाम कालेजों और विश्वविद्यालयों को उक्त निर्देश की अनदेखी करने को कहा था। इससे पहले 15 अगस्त मनाने के तरीके पर विवाद रहा था और राज्य सरकार ने केंद्र के सुझाए तरीके का पालन करने से मना कर दिया था।