आत्मनिर्भर भारत पैकेज बिहार का लोकप्रिय उत्पाद मखाना भी शामिल



--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

माइक्रो फूड इंटरप्राइजेज (एमएफई) के लिए केंद्र सरकार ने दस हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। क्लस्टर आधारित इस स्कीम में बिहार का लोकप्रिय उत्पाद मखाना भी शामिल है।

आत्मनिर्भर भारत पैकेज की तीसरी किस्त में फूड प्रोसेसिंग, मत्स्य एवं डेयरी उद्योग, सब्जी उत्पादक एवं मधुमक्खी पालकों के लिए कई राहतों की घोषणा की गई है। कृषि आधारभूत परियोजनाओं के लिए एक लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है।

कृषि मंत्री डाॅ• प्रेम कुमार ने कहा कि यह बिहार के लिए गौरव की बात है। राज्य के मखाना उत्पादक किसानों को अब उनके उत्पाद का अच्छा मूल्य मिलेगा। किसानों के उत्पीड़न को रोकने के लिए नया कानून बनाने की भी घोषणा की गई है। इससे किसान अब अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे।

मधुमक्खी पालन क्षेत्र पर पांच सौ करोड़ राशि खर्च होगी। इसका लाभ देश के दो लाख मधुमक्खी पालकों को मिलेगा। हर्बल खेती के लिए चार हजार करोड़ की व्यवस्था की गई है। प्रावधान के तहत इस स्कीम का बिहार को काफी लाभ मिलेगा।

साथ ही टाॅप टू टोटल योजना पर भी 500 करोड़ राशि का प्रावधान किया गया है। इस योजना में पहले टमाटर, प्याज एवं आलू था। अब इसमें सभी सब्जी एवं फलों को शामिल किया गया है। खराब होने की स्थिति में पहले किसानों को सब्जी एवं फलों को कम मूल्य पर बेचना पड़ता था। अब इस नुकसान से किसान बच सकेंगे। पशुपालन क्षेत्र के आधारभूत विकास के लिए 15 हजार करोड़ राशि के प्रावधान से डेयरी इंडस्ट्री को लाभ मिलेगा।

मत्स्य संपदा योजना के लिए बीस हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसमें मछुआरों एवं नावों का भी बीमा होगा। एसेंसियल कमोडिटीज एक्ट में संशोधन की घोषणा से किसानों को फसल का बेहतर दाम मिल सकेगा। कृषि उत्पादों के परिवहन एवं भंडारण में 50 प्रतिशत अनुदान का भी प्रावधान किया गया है। यह किसानों के लिए वरदान साबित होगा।

इसके अलावा यूपी का आम, कश्मीर का केसर, आंध्रपदेश का मिर्च, तमिलनाडु का साबूदाना एवं नाॅर्थ इस्ट के बांस समेत कई राज्यों के प्रमुख उत्पादों की भी ब्रांडिंग होगी। इस स्कीम से देश के करीब दो लाख फूड प्रोसेसिंग यूनिट समेत इससे जुड़े लोगों को सहायता मिलेगी।

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