वाराणसी-उत्तर प्रदेश,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।
महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी द्वारा स्थापित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय भारतीय पारंपरिक ज्ञान-विज्ञान एवं आधुनिक वैज्ञानिक चिंतन का एक अद्भुयत संगम है। अपने ज्ञानदीप्त् संस्थापक द्वारा पल्लवित प्रदिपादित शिक्षा की समग्र एवं मूल्यनिष्ठ पद्धति को नूतन आयामों से जोड़कर यह विश्वविद्यालय युवा वर्ग के उन्नयन तथा उनकी सृजनात्मक प्रतिभा का संपोषण कर रहा है।
विगत एक वर्ष में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से प्राप्त वित्तीय एवं प्रशासनिक सहयोग से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा एवं शोध, विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण हेतु तथा स्वास्थ्य सेवाओं के उत्कॄष्टय मानकों को प्राप्त करने का सफल प्रयास किया है। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय समेत अन्य मंत्रालयों के सहयोग एवं संस्तुतियों से विगत एक वर्ष में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा कई नये अवसंरचनात्मक विकास किये गये तथा किये जा रहे है जो उच्च शिक्षा एवं शोध के अतिरिक्त स्वास्थ्य एवं मानव कल्याण के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुये हैं तथा होने वाले है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की इस विकास यात्रा में मानव संसाधन विकास मंत्रालय सहित भारत सरकार के कई अन्य मंत्रालयों एवं उपक्रमों का सराहनीय सहयोग रहा है। विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास के लिये उठाये गये कुछ प्रमुख कदमों का विवरण इस प्रकार है।
इस कड़ी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय को शोध एवं शिक्षा के क्षेत्र में चोटी के 500 अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों की सूची में शामिल करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय मे विश्ववस्तरीय संरचनात्मक विकास एवं शोध हेतु मानव संसाधन विकास मंत्रालय के इन्स्टीट्यूशन ऑफ एमिनेन्स स्कीम के तहत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय को 5 वर्षों के लिये 1000 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गयी है। इन्स्टीट्यूशन ऑफ एमिनेन्स के अंतर्गत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में कई परियोजनाओं को कार्यान्वित किया जा रहा है जिसमें मुख्य रुप से अन्तर्राष्ट्रीय छात्रावास का विस्तार, स्मार्ट क्लास रुम का निर्माण, स्नाातक एवं स्नात्कोत्तर प्रयोगशालाओं का उन्नयन, कृतक एवं स्टेट ऑफ दी आर्ट उपकरणों एवं सुविधाओं की स्थापना, केन्द्रीय ग्रन्थालय एवं विभागीय ग्रन्थालयों का उन्नयन, हाई पावर कम्प्यूटिंग सुविधा, सीवेज प्रणाली का जीर्णोद्धार, परिसर का सौन्दर्यीकरण आदि शामिल है। इसके अतिरिक्तु इन्स्टीट्यूटशन ऑफ एमिनेन्स के अंतर्गत से कई अन्य परियोजनओं को भी जल्दी ही क्रियान्वित किया जाना प्रस्तावित है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से प्रधानमंत्री स्वास्थय सुरक्षा योजना के अंतर्गत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 200 करोड़ रुपये की लागत से सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की स्थापना की गयी है जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया है। वर्तमान में यह सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक कोविड-19 के लिये चिकित्सकीय सुविधाएँ प्रदान कर रहा है तथा कोविड समर्पित चिकित्सालय के रुप में कार्य कर रहा है जिसके अंतर्गत सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में 40 आईसीयू और 160 नॉन वेन्टिलेटेड आइसोलेशन वार्ड के अतिरिक्त ऑपरेशन थियेटर, लेबर रुम, बायोकेमेस्ट्री एवं पैथोलॉजी टेस्ट, डायलिसिस सुविधा आदि की व्यवस्था की गयी है। इसके अतिरिक्त काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के अंतर्गत एक बोन मैरो ट्रान्सप्लांट एवं स्टेम सेल रिसर्च सेन्टर की भी स्थापना की गयी है तथा 38.5 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन एक क्षेत्रीय नेत्र संस्थान की स्थापना जल्द ही पूर्ण होने वाली है।
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 100 करोड़ रुपये की लागत से एक सेंट्रल डिस्कवरी सेन्टर की स्थापना की गयी है। इस सेंटर में मूलभूत और व्यावहारिक विज्ञान में अनुसंधान के लिए अत्याधुनिक उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध होंगी जो विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 125 करोड़ रुपये की लागत एक साथी सेन्टर की स्थापना की जा रही है। यह एक ही छत के नीचे नवाचार, उद्यमशीलता और स्टार्ट-अप को विकसित करने के लिए अत्याधुनिक सेंट्रल डिस्कवरी सेंटर (छह मंजिल की इमारत) में एक अन्योन्याश्रित पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमुख हिस्सा होगा। यह सेंटर बीएचयू में नवाचार को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र के अन्य संस्थानों के अभिप्रेरित शोधकर्ताओं के लिए केंद्रीकृत सुविधाएं, मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करेगा। यह पहल नई प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रसार के लिए संगठित होकर उच्च गुणवत्ता वाली विश्लेषणात्मक सेवाएं प्रदान करने का अवसर प्रदान करती है जिसके लिए भारतीय उद्योग विदेशी संस्थानों पर निर्भर रहते हैं। इसके अतिरिक्त एक बायोनेस्ट भी स्थापित किया जा रहा है जो जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों को प्रेरित करेगा।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में एक वैदिक विज्ञान केंद्र की स्थापना की गई है, जिसका उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री द्वारा किया गया है। इस केंद्र का उद्देश्य हमारे प्राचीन ज्ञान और आधुनिक ज्ञान के बीच संबंध स्थापित करने हेतु शोध करना और साथ ही वेद के व्यापक क्षेत्र, ज्ञान के प्राचीन और शानदार स्रोत को पुनः स्थापित करके, आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समझने में इनके प्रभाव का अध्ययन करना है।
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की संस्तुति से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना और इस क्षेत्र में अनुसंधान के लिए हरित ऊर्जा केंद्र की स्थापना के लिए सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गए हैं। कई भवनों कि छतों पर रूफ-टॉप पीवी पैनल लगाए गए हैं जो अतिरिक्त बिजली पैदा कर रहे हैं। विश्व विद्यालय के दक्षिणी परिसर में भी रूफ-टॉप पीवी पैनल लगाने की पहल प्रक्रियारत है।
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के 356 करोड़ रुपये के वित्तीय सहयोग से विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों के लिए 520 फ्लैटों वाले आवासीय भवनों का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चूका है। यह संकाय सदस्यों की आवास की आवश्यकता को पूरा करेगा और गुणवत्तापरक संकाय सदस्यों को आकर्षित करने में सहायता करेगा। इसके अतिरिक्त 428 कमरों वाले एक महिला छात्रावास का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।
अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए 110 कमरों का छात्रावास निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चूका है। इससे विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी जो हमारी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग को बेहतर बनाने में सहायक होगा।
विश्वविद्यालय के कार्यों को स्वचालित ढंग से करने और पेपर लेस कार्यालय बनने की तरफ बढ़ते हुए ईआरपी का कार्यान्वयन पूरे जोरों पर है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा ट्रस्ट द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए गए सॉफ्टवेयर के माध्यम से विभिन्न कार्यालयी कार्यों के अलावा प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाया जा रहा है। विश्वविद्यालय के प्रवेश परीक्षाओं को ऑनलाइन मोड पर संपादित किया गया है।
विश्वविद्यालय ने रोलिंग विज्ञापनों के माध्यम से सहायक प्रोफेसर के लगभग 350 पदों पर चयन हेतु चयन समिति की बैठक संपादित की गयी है। प्रोफेसर एवं एसोसिएट प्रोफेसर के रिक्तपदों तथा असिस्टेंट प्रोफेसर के शेष रिक्त पदों का विज्ञापन जल्दी ही किया जायेगा। इसके अतिरिक्त इस दौरान 10 ग्रुप ए अधिकारियों और 499 गैर-शिक्षण कर्मचारियों (ग्रुप बी और ग्रुप सी) की भर्ती भी की गयी हैं।
विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सहयोग, संकाय और छात्र विनिमय, अध्ययन सामग्री के आदान-प्रदान और शोध परिणामों के लिए कई विदेशी संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। वर्ष के दौरान, 35 करोड़ रुपये से ज़्यादा के कुल अनुदान के साथ 131 नई शोध परियोजनाएं विभिन्न वित्त पोषण एजेंसियों द्वारा स्वीकृत किए गए। इसके अलावा, कुल 157 करोड़ रुपये से ज़्यादा के अनुदान के 369 शोध परियोजनाएं जारी हैं। विश्वविद्यालय के कई शिक्षकों को प्रतिष्ठित अकादमियों के अध्येता के रूप में चुना गया है, जैसे कि भारतीय विज्ञान अकादमी, राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी और राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान अकादमी। विदेशों में उन्नत शोध करने के लिए कई शिक्षकों को फैलोशिप और एसोसिएटशिप प्रदान की गई हैं।
विश्वविद्यालय ने कचरा से शून्य कार्बन उत्सर्जन सहित 3.5 मेगावाट बिजली उत्पन्न करने के लिए एक विद्युत संयंत्र स्थापित करने हेतु एक भारतीय निजी कंपनी मेसर्स ई 2 डब्ल्यू प्रा• लि• के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है। कंपनी अपनी लागत पर एक बिजली संयंत्र स्थापित करेगी, परिसर से बागवानी और घरेलू कचरे सहित सभी अपशिष्ट पदार्थों को एकत्र करेगी और इसे बिजली पैदा करने के लिए संसाधित करेगी। विश्वविद्यालय ने 25 वर्षों के लिए एक बिजली खऱीद समझौता पर भी हस्ताक्षर किया है जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालय को मौजूदा बिजली दरों पर 30% की छूट प्रदान की जाएगी। इस प्लांट में द्वि-उत्पाद के रुप में प्राप्त गर्म पानी और ठंडी हवा को विश्वविद्यालय के अस्पताल को मुफ्त में उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारत सरकार के दिशानिर्देशों एवं सहयोग से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की यह विकास यात्रा निरंतर चलती रहेगी तथा यह विश्वविद्यालय अपने संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी के सपनों को साकार करने में सार्थक सिद्ध होगा।