भारत–रूस का संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास ‘इन्‍द्र-2017’  सफलतापूर्वक समाप्‍त हुआ



भारत–रूस के बीच तीनों सेनाओं का संयुक्‍त अभ्‍यास ‘इन्‍द्र 2017’ का सफलतापूर्वक संचालन 19 से 29 अक्‍टूबर 2017 तक रूस के ब्‍लादिबोस्‍तक में हुआ। इस अभ्‍यास के लिए इन्‍द्र का नाम इंडिया के आईएनडी और रसिया के आरए से लिया गया है। अब तक इन्‍द्र अभ्‍यास के दौरान तीनो सेनाओं – थल, वायु व नौसेना - के अभ्‍यास अलग-अलग होते थे। 2003 से लेकर अब तक रूसी डिफेंस फोर्स के साथ 17 ऐसे अभ्‍यास हो चुके हैं। इन्‍द्र 2017 के तहत पहली बार भारत और रूस के तीनों सेनाओं का संयुक्‍त अभ्‍यास हुआ। रूस ने भी पहली बार अपनी जमीन पर तीनों सेनाओं के संयुक्‍त अभ्‍यास का संचालन किया।

इन्‍द्र 2017 की थीम थी – ‘यूएन की इच्‍छा के अनुरूप किसी देश के अनुनय पर अंतरराष्‍ट्रीय आतंकवाद गतिविधियों पर कार्रवाई के लिए संयुक्‍त बल द्वारा मुहिम तैयार करना और संचालन करना।'

इस संयुक्‍त अभ्‍यास में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के 900 सैन्‍यकर्मियों ने तथा रूस के 1000 सैन्‍यकर्मियों ने हिस्‍सा लिया। इस अभ्‍यास का संचालन सर्गेवेस्की संयुक्त शस्त्र प्रशिक्षण रेंज, केप क्लर्क प्रशिक्षण क्षेत्र और जापान के समुद्र में किया गया।

यह एक एतिहासिक अवसर था जब विश्‍व के दो महान सशस्‍त्र सेनाओं ने हाथ मिलाया और संयुक्‍त अभ्‍यास किया। दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली सर्वोत्‍तम अभ्‍यासों की जानकारी मिली। तीनों सेनाओं के पहले भारत-रूस संयुक्‍त अभ्‍यास के दौरान जमीन पर, समुद्र में और हवा में प्रशिक्षण और प्रतिप्रशिक्षण अभ्‍यास किये गये। यह अभ्‍यास दोनों सेनाओं के बीच लक्ष्‍य की प्राप्ति के लिए आपसी तालमेल का उदहारण है।

इन्‍द्र 2017 संयुक्‍त अभ्‍यास पूरे विश्‍व में होने वाले भविष्‍य के सैनिक अभ्‍यासों के लिए एक मील का पत्‍थर साबित होगा। यह और भी महत्‍वपूर्ण है कि दोनों देशों ने यह उपलब्धि उस समय प्राप्‍त की है जब हम भारत-रूस मैत्री की 70वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।

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