कोरोना संकट के बीच ग्रहण



--डाॅ• इन्द्र बली मिश्र,
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी।

● आषाढ़ कृष्ण अमावस्या दिन रविवार यानी 21 जून 2020 को सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) लगेगा

भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण का समय 21 जून को सुबह 9:16 से यह ग्रहण आरंभ हो जाएगा व दोपहर 3 बजकर 4 मिनट पर समाप्त होगा, यानी यह सूर्यग्रहण कुल 5 घंटे 48 मिनट 3 सेकंड के लिए होगा। लेकिन इस सूर्यग्रहण का आरंभ और समापन का समय भारत में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग रहेगा।

इस ग्रहण का परमग्रास 99.4% रहेगा, यानी कुछ स्थानों पर सूर्य पूरी तरह छुप जाएगा। इस ग्रहण का व्यापक प्रभाव भारत, दक्षिण पूर्वी यूरोप, अफ्रीका, चीन, पाकिस्तान, वर्मा आदि स्थानों पर दिखाई देगा।

सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, चांद के धरती और सूर्य के बीच आने के कारण सूर्य ग्रहण होता है। इस दौरान चांद की छाया धरती पर पड़ती है और जिस जगह पर यह छाया पड़ती हैं वह आंशिक रूप से अंधेरा हो जाता है। ऐसे में सूर्य को नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए।

21 जून को सूर्य ग्रहण के समय 6 बड़े ग्रह रहेंगे वक्री, अतः यह सूर्य ग्रहण बेहद संवेदनशील है। मिथुन राशि में होने जा रहे इस ग्रहण के समय मंगल जलीय राशि मीन में स्थित होकर, सूर्य बुध चंद्रमा और राहु को देखेंगे, जिससे अशुभ स्थिति का निर्माण होगा। इसके अलावा ग्रहण के समय 6 ग्रह शनि गुरु शुक्र और बुध वक्र होंगे। राहु केतु हमेशा वक्र चलते हैं इसलिए इनको मिलाकर कुल 6 ग्रह वक्री रहेंगे जो शुभ फलदाई नहीं है।

■ अशुभ फल

1) प्राकृतिक आपदा से परेशानी- सूर्य ग्रहण के समय इन बड़े ग्रहों का वक्री होना प्राकृतिक आपदाओं जैसे अत्यधिक वर्षा, समुद्री चक्रवात, तूफान, महामारी आदि से जनधन की हानि हो सकता है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका को जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई में भयंकर वर्षा एवं बाढ़ से जूझना पड़ सकता है। ऐसे में महामारी और भोजन का संकट इन देशों में कई स्थानों पर हो सकता है।

2) आर्थिक मंदी : शनि मंगल और गुरु इन तीनों ग्रहों के प्रभाव से विश्व में आर्थिक मंदी का असर एक वर्ष तक बना रहेगा।

3) विश्व संबंधों में मतभेद होने की आशंकाएं रहेगी।

■ सूर्य ग्रहण का राशियों पर प्रभाव

•मेष : इस सूर्य ग्रहण के चलते मेष राशि वालों को उलझन बढ़ने की आशंका है। क्रोध और झुंझलाहट से मन व्यथित होगा। शुभ कार्य में विलंब होगा, किसी व्यक्ति से तनाव संभव।

•बृष : शुभ फलों की प्राप्ति होगी, निवेश से लाभ होगा प्रमोशन संभव है। किसी करीबी से तनाव मिलेगा, वाहन से कष्ट हो सकता है, साथ ही कोई अच्छी खबर मन मस्त कर देगी। शरीर के निचले भाग में कष्ट होगा।

•मिथुन : शुभ और अशुभ दोनों फल प्राप्त होंगे, सम्मान बढ़ेगा देश विदेश की यात्रा संभव, अनावश्यक खर्च से तनाव मिलेगा, मान सम्मान के प्रति सजग रहें, यात्रा से थकान होगी नवीन गृह का आनंद मिलेगा, जीवनसाथी से तनाव और सहयोग दोनों प्राप्त होंगे निवेश में हानि हो सकती हैं, स्वास्थ्य पर ध्यान रखें।

•कर्क : शुभ फलों की प्राप्ति होगी, कैरियर में उत्थान होगा, विरोधी परास्त होंगे, आर्थिक लाभ संभव है गर्दन पीठ या कमर दर्द से कष्ट होगा, सम्मान बढ़ेगा, किसी सहयोगी का आचरण तनाव का सबब बनेगा।

•सिंह : मिश्रित फलों की प्राप्ति होगी। अनावश्यक भय जन्म लेगा, कर्ज से तनाव मिल सकता है। संतान के भविष्य को लेकर चिंता से मन परेशान रह सकता है। कैरियर में कुछ समस्याएं आने से तनावग्रस्त रह सकते हैं खर्च से उलझन बढ़ेगी।

•कन्या : स्वास्थ्य को लेकर सजग रहें, स्वभाव पर काबू रखें। स्वास रक्तचाप और हड्डियों में दर्द से कष्ट होने की आशंका है। संतान पक्ष की चिंता होगी, कार्यस्थल पर तनाव मिल सकता है।

•तुला : कर्ज में वृद्धि से उलझन होगी। सम्मान बढ़ेगा, किसी सहयोगी से कष्ट की प्राप्ति होगी, कैरियर के जिम्मेदारियों मे बढ़ोतरी से मानसिक उलझन होगी।

•वृश्चिक : शुभ फलों की प्राप्ति होगी, प्रमोशन या करियर में बदलाव संभव है किसी मित्र से पीड़ा मिल सकती हैं। जीवनसाथी से उलझन हो सकती हैं, वाहन से कष्ट,माता-पिता की नरम सेहत से तनाव महसूस कर सकते हैं।

•धनु : मिश्रित फलों की प्राप्ति होगी। जीवनसाथी से तनाव और सहयोग दोनों प्राप्त होगा। निवेश में हानि, सेहत के लिए परेशानी भरा समय, कानूनी उलझन से मानसिक कष्ट होगा।

•मकर : सतर्क रहें, किसी करीबी से कोई धोखा संभव है, निवेश में हानि होगी, धन फसने का योग हैं। शरीर के निचले भाग में कष्ट होने की आशंका है। अधीनस्थ कर्मचारी तथा कर्ज से तनाव मिल सकता है।

•कुंभ : शारीरिक कष्टों से परेशानी हो सकती है। जीवनसाथी का आचरण कष्ट दे सकता है, मन बेचैन रहेगा तथा आंतरिक भय में वृद्धि होगी साथ ही संतान की चिंता होगी। मानसिक रूप से बेचैनी बनी रहेगी। धन की हानि होगी।

•मीन : आर्थिक लाभ संभव है। रक्तचाप या मधुमेह से कष्ट होगा, सम्मान बढ़ेगा। जीवनसाथी के सहोदर का आचरण तनाव का सबब बनेगा। पिता के स्वास्थ्य की चिंता होगी, भाई से या भाई को कष्ट की आशंका है। पारिवारिक तनाव मिल सकता है।

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