5 जुलाई को मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा पर्व, जानिए इसका महत्व



--डाॅ• इन्द्र बली मिश्र,
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय,
वाराणसी-उत्तर प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह उत्सव गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता को दर्शाता है। इस साल यह पर्व 05 जुलाई दिन रविवार को मनाया जाएगा।

■ गुरु पूर्णिमा मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 4 जुलाई 2020 को 10 बजकर 49 मिनट से

गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त: 5 जुलाई 2020 को 09 बजकर 48 मिनट पर

■ जानिए गुरु पूर्णिमा पर पूजा विधि

यह दिन हर एक व्यक्ति के लिए खास है. खासकर विद्या अर्जन करने वाले लोगों के लिए इस दिन अपने गुरु की सेवा और भक्ति कर जीवन में सफल होने का आशीर्वाद जरूर प्राप्त करना चाहिए। साथ ही विद्या की देवी मां शारदे की जरूर पूजा करनी चाहिए। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नियमित दिनों की तरह पूजा करें। इसके बाद परम पिता परमेश्वर सहित सभी देवी और देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त करें। साथ ही अपने गुरु की सेवा श्रद्धा भाव से करें, तथा अपने गुरु से आशीर्वाद प्राप्त करें। सनातन परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है।

गुरु के महत्व को बताते हुए संत कबीर का एक दोहा बड़ा ही प्रसिद्ध है।

गुरु गोविन्द दोनों खड़े, काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥

इसके अलावा संस्कृत के प्रसिद्ध श्लोक में गुरु को परम ब्रह्म बताया गया है

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा-आराधना के साथ-साथ गुरु को दान दक्षिणा भी दी जाती है। देश में गुरु पूर्णिमा का बहुत ही महत्व है। गुरु पूर्णिमा को लोग बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाते हैं। महर्षि वेद व्यास प्रथम विद्वान थे, जिन्होंने सनातन धर्म के चारों वेदों की व्याख्या की थी। साथ ही सिख धर्म केवल एक ईश्वर और अपने दस गुरुओं की वाणी को ही जीवन का वास्तविक सत्य मानता आ रहा है।

गुरु पूर्णिमा महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। वेदव्यास संस्कृत के महान ज्ञाता थे। सभी 18 पुराणों का रचयिता भी महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। वेदों को विभाजित करने का श्रेय भी वेद व्यास को दिया जाता है। इसी कारण इनका नाम वेदव्यास पड़ा था। इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

इस वर्ष करोना संकट के बीच गुरु पूर्णिमा को गुरु का पूजन एवं उनका आशीर्वाद मोबाइल फोन अथवा वीडियो कॉल के जरिए करें।

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